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अयोध्या : पीएम मोदी ने चांदी का छत्र किया भेंट

अयोध्या : रामनगरी में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ अयोध्या ही नहीं, देश में भी नए युग का आगाज हो गया। पांच सदियों का इंतजार सोमवार को कृष्णशिला में प्राण स्थापना के साथ समाप्त हो गया और रामलला पूर्ण स्वरूप में भव्य मंदिर में विराजमान हो गए। उनका नाम बालक राम रखा गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलला की पहली आरती उतारी। स्वर्णमयी सिंहासन पर विराजमान रामलला को चांदी का छत्र अर्पित किया और मां जानकी के प्रतीक स्वरूप में चुनरी भी चढ़ाई। प्रधानमंत्री ने रामलला को 1008 रजत कमल अर्पित किए। 45 मिनट का अनुष्ठान पूर्ण हुआ, तो देशवासी अभिभूत हो उठे। इस दौरान, जन्मभूमि परिसर पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई।

पीएम मोदी ने इस अवसर को देश में नए युग की शुरुआत का प्रतीक बताया। प्राण प्रतिष्ठा का गवाह बने श्रद्धालुओं को 35 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा, रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। अब वह दिव्य मंदिर में रहेंगे। मेरा पक्का विश्वास है कि जो घटित हुआ है, उसकी अनुभूति देश-दुनिया के कोने-कोने में रामभक्तों को हो रही होगी। यह क्षण अलौकिक है।

यह समय सबसे पवित्र है। यह माहौल, यह ऊर्जा, यह पल… प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद है। 22 जनवरी, 2024 का सूरज एक अद्भुत आभा लेकर आया है। यह नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। राममंदिर भारत के उत्कर्ष-उदय का साक्षी बनेगा। मंदिर सिखाता है कि लक्ष्य प्रमाणित हो तो उसे हासिल किया जा सकता है।

पीएम मोदी ने जैसे ही राम जन्मभूमि परिसर में प्रवेश किया, तो शहनाई, शंख, ढोलक की मंगलध्वनि गुंजायमान होने लगीं। सुनहरे वस्त्र पहने पीएम मोदी दोनों हाथों में रामलला के लिए उपहार के साथ दोपहर 12:07 बजे गर्भगृह में पहुंचे। उपहार राममंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि को सौंपा।

पीएम मोदी ने सबसे पहले विराजमान रामलला व उनके भाइयों का पूजन किया। इसके बाद अचल मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए उन्होंने जैसे ही संकल्प लिया, जयश्रीराम की ध्वनि गूंजने लगी। अनुष्ठान में पीएम के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, यजमान डॉ. अनिल मिश्र भी शामिल हुए। गर्भगृह में राममंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि व जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्न तीर्थ भी मौजूद रहे। अनुष्ठान पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ के निर्देशन में पूर्ण हुआ।

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