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कोचिंग सेंटरों का मकड़जाल, नियम-कानून की अनदेखी; विभाग बेपरवाह

धनबाद (राजीव सिन्हा 8340201239) : जिले में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो चुका है। बाजार व नुक्कड़ों में लुभावने विज्ञापनों से कई कोचिंग सेंटर (Coaching-Fraud) छात्रों-अभिभावकों को बरगलाने की कोशिशों में जुटे हुए है। इन कोचिंग सेंटर द्वारा छात्रों को बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे किये तो जाते है, परंतु इनमें कितनी सच्चाई रहती है…यह वहां अध्ययनरत छात्र ही बेहतर तरीके से बता सकते है।

इन कोचिंग सेंटरों का एकमात्र उद्देश्य होता है कि छात्रों-अभिभावकों को भविष्य के सुनहरे सपने दिखाकर ज्यादा से ज्यादा आर्थिक दोहन किया जा सके। इसमें कुछ कोचिंग संस्थान (Coaching-Fraud) शिक्षा के प्रति छात्रों का मार्गदर्शन करते है। लेकिन कई कोचिंग सेंटर (Coaching-Fraud) शिक्षा की ओट में ठगी का दुकान भी खोले बैठे है। ऐसे आर्थिक दोहन करने वाले कोचिंग सेंटरों के खिलाफ शिक्षा विभाग तथा सरकार की लापरवाही व निष्क्रियता से छात्रों-अभिभावकों को लगातार चूना लग रहा है। जबकि सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है।  


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इन दिनों जिले में नियम विरुद्ध कोचिंग सेंटरों का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। जबकि झारखंड सरकार ने कोचिंग संस्थान चलाने के लिए नियम कानून बना रखे हैं, लेकिन धनबाद जिले में संचालित अधिकतर कोचिंग क्लासेस (Coaching-Fraud) इन नियमों को ताक में रखकर मनमर्जी से मोटी फीस वसूल कर कोचिंग सेंटरों का संचालन कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन कोचिंग सेंटरों का जाल अब ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका है। यह छात्रों को बिना पूरी सुविधा दिए मोटी फीस वसूल रहे हैं।

छात्रों के जीवन से खिलवाड़ को देखते हुए भी जिम्मेदार शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन बैठे हैं। यह उनकी कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में डाल देता है। वैसे तो कोचिंग संस्थानों (Coaching-Fraud) में प्रशिक्षित करियर काउंसलर/मनोचिकित्सक की सेवाएं आवश्यक हैं और फीस भी एक साथ नहीं लेकर त्रैमासिक लेने का भी प्रावधान होता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

आवासीय कॉलोनियों में भी खुल गए हैं कोचिंग सेंटर्स : जिले के कई आवासीय कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मोहल्ले में पिछले कुछ वर्षों में कई कोचिंग सेंटर (Coaching-Fraud) खुल गए हैं। पूरे दिन बच्चों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे शोर तो होता ही है। साथ ही घर की प्राइवेसी भी भंग होती है। आवासीय कॉलोनियों में या घरों में कोचिंग चलने से जहां लोगों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं पार्किंग की भी समस्या खड़ी हो जाती है। इस पर कॉलोनी के लोगों का कहना है कि बच्चे साइकिल और मोटरसाइकिलों को रोड पर या गलियों में खड़ी कर देते हैं। लोगों के शिकायत करने के बाद भी कोचिंग सेंटर संचालक सुनने को तैयार नहीं होते हैं।

यहां चल रहे हैं सबसे अधिक कोचिंग सेंटर : जिला मुख्यालय के गली-गली में ट्यूशन और कोचिंग सेंटर (Coaching-Fraud) चल रहे हैं। जहां पर बच्चों की क्लासेस संचालित हो रही हैं। इस क्षेत्र में करीब दर्जनों कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जहां पर करीब 2 हजार से अधिक लड़के ट्यूशन पढ़ते हैं। शहर के एलसी रोड, मनोरम नगर, माडा कॉलोनी, हाउसिंग कॉलोनी, हीरापुर, चिरागोरा, बरमसिया, मनईटांड़, गाँधी नगर, गाँधी रोड, धनसार, शास्त्री नगर, धोवाटाड़, सरायढेला, जेसी मलिक, तेलीपाड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। अधिकांश बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहे हैं। इस ओर शिक्षा विभाग की और से कभी कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

नहीं हैं सुविधाए : शहर में जितने भी कोचिंग सेंटर (Coaching-Fraud) चल रहे हैं, वह छात्र-छात्राओं से मनमाफिक मोटी फीस तो लेती हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं देते। एक बड़े हाल में 70 से 80 छात्र-छात्राओं को बैठाकर पढ़ाया जाता है। जहां पर छात्र-छात्राओं को घंटों बैठे रहने के बाद भी न तो मूलभूत सुविधाएँ की भी व्यवस्था नहीं होती है और न ही शुद्ध पेयजल तथा पार्किंग की। कई कोचिंग सेंटर्स में छात्र-छात्राओं के लिए टॉयलेट भी उपलब्ध नहीं है।

यह है नियम : शिक्षा विभाग से लेना होता है अनापत्ति प्रमाण पत्र

  1. राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार कोचिंग संस्थान के संचालन के लिए मापदंड तय किए गए है। इनके अनुरूप कोचिंग संस्थान चलाने के लिए शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर नगरीय निकाय से अनुज्ञा लेनी होती है।
  2. कोचिंग इंस्टीट्यूट संचालन के जिए 3000 स्क्वायर फीट क्षेत्रफल न्यूनतम किया गया है। यह भवन वाणिज्य या संस्थान गत शैक्षणिक भू उपयोग परिवर्तन होना आवश्यक है। जो कुछ कोचिंग सेंटरों को छोड़कर किसी के पास नहीं है। जबकि शहर में लगभग 100 से अधिक स्थानों पर कोचिंग क्लासेस का संचालन किया जा रहा है। जो अधिकतर आवासीय मकानों में संचालित हो रहे हैं। इन कोचिंग सेंटरों को व्यावसायिक श्रेणी में आने के कारण श्रम विभाग से भी पंजीयन कराना आवश्यक होता है। जो अधिकतर कोचिंग क्लासेस के पास नहीं है।
  3. राज्य सरकार के निर्देशानुसार कोचिंग संस्थानों पर भवन विनियमों में संस्थानिक मापदंड लागू होते हैं। इसके अनुसार जहां कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा है, वहां के कोचिंग सेंटरों पर दुपहिया और कार पार्किंग भी होनी चाहिए। छात्र-छात्राओं के अनुपात में अलग-अलग शौचालयों का होना आवश्यक है। अग्निशमन की एनओसी होनी चाहिए।
  4. जिस भवन में कोचिंग सेंटर चलाया जा रहा है, वहां छात्रों के लिए कैंटीन, कोचिंग कार्यालय, स्टाफ रूम होना आवश्यक है। इस तरह किसी प्रकार की सुविधा नहीं होने के बावजूद कोचिंग सेंटरों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है।

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