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गणतंत्र दिवस : 132 पद्म पुरस्कारों की घोषणा, वेंकैया समेत पांच को पद्म विभूषण

नई दिल्ली-NewsXpoz : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को पद्म पुरस्कारों का एलान कर दिया गया है। इसके तहत पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किए जाने वाली हस्तियों के नामों का एलान किया गया। इस बार राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति ने दो युगल समेत 132 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी है। देर रात जारी सूची में पांच पद्म विभूषण, 17 पद्म भूषण शामिल हैं। इसके अलावा 110 पद्म श्री पुरस्कारों का भी एलान किया गया है। पुरस्कार पाने वालों में 30 महिलाएं हैं। सूची में आठ विदेशी,  एनआरआई, पीआईओ, ओसीआई श्रेणी के व्यक्ति शामिल हैं।

वहीं, नौ मरणोपरांत पुरस्कार भी दिए जाने का एलान किया गया है। इससे पहले 23 जनवरी को सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कूर्परी ठाकुर को भारत रत्न से नवाजने का एलान किया था। पद्मविभूषण पाने वाली हस्तियों में पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, अनुभवी अभिनेत्री वैजयंतीमाला बाली, सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक स्वर्गीय बिंदेश्वर पाठक और  साउथ के मेगा स्टार चिरंजीवी, भारतीय शास्त्रीय भरतनाट्यम नर्तकी पद्मा सुब्रमण्यम शामिल हैं।

पीएम मोदी ने दी बधाई : पद्म पुरस्कारों के एलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर सम्मानित लोगों को बधाई दी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा,’ उन सभी लोगों को बधाई, जिन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारत विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को महत्व देता है। वे अपने असाधारण कार्यों से लोगों को प्रेरित करते रहें।’

पिछले साल 106 पद्म पुरस्कारों का हुआ था एलान : इससे पहले पिछले साल राष्ट्रपति ने 106 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी थी, इनमें 6 पद्म विभूषण, 9 पद्म भूषण और 91 पद्म श्री शामिल थे। 19 पुरस्कार विजेता महिलाएं थीं। पुरस्कार पाने वालों में 19 महिलाएं हैं। सात लोगों को मरणोपरांत इस सम्मान के लिए चुना गया है। पद्म सम्मान देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं और यह तीन श्रेणियों- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री में प्रदान किए जाते हैं।

पहले जानें पद्म पुरस्कारों के बारे में : 

भारत सरकार ने देश के दो सर्वोच्च नागरिक सम्मान – भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में की थी।
इन पुरस्कारों से देश-विदेश के उन लोगों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने किसी क्षेत्र में कोई प्रतिष्ठित व असाधारण कार्य किया हो, जिसमें लोक सेवा का तत्व जुड़ा हो।
हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर इन पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। फिर मार्च या अप्रैल में होने वाले समारोह में राष्ट्रपति द्वारा विजेताओं को सम्मानित किया जाता है।
सामान्यत: मरणोपरांत ये पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान नहीं है। लेकिन कुछ विशिष्ट मामलों में सरकार के पास ये निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
नियम के अनुसार, किसी को अगर वर्तमान में पद्मश्री दिया गया है, तो फिर उसे पद्म भूषण या पद्म विभूषण अब से पांच साल बाद ही दिया जा सकता है। लेकिन यहां भी कुछ विशिष्ट मामलों में पुरस्कार समिति छूट दे सकती है।
जिस दिन समारोह में राष्ट्रपति द्वारा सम्मान दिया जाता है, उसके बाद सभी विजेताओं के नाम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए जाते हैं।

पहले क्या थे पुरस्कारों के नाम : 
1954 में जब भारत रत्न के साथ पद्म पुरस्कारों की शुरुआत हुई, तब सिर्फ पद्म विभूषण नाम अस्तित्व में आया था। पद्मश्री और पद्म भूषण नहीं।
पद्म विभूषण के अंतर्गत ही पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग के नाम से विजेताओं को सम्मान दिया जाता था।
हालांकि ये नामकरण सिर्फ एक साल ही चलन में रहा। फिर 8 जनवरी 1955 को राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी अधिसूचना में इन पुरस्कारों को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण नाम दिया गया।

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