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‘गरीब, महिलाएं, युवा और अन्नदाता की आकांक्षाएं अहम’, बजट भाषण में बोलीं वित्त मंत्री

नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अंतरिम बजट पेश कर रही हैं। यह बजट मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम बजट है। वित्तमंत्री इस बार छठा बजट सदन में पेश कर रही हैं। मोरारजी देसाई के बाद सीतारमण ही दूसरी वित्त मंत्री हैं, जिन्हें छह बार बजट पेश करने का मौका मिला। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अंतरिम बजट भाषण में कहा, ‘हमारी सरकार ने नागरिक प्रथम और न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन दृष्टिकोण के साथ जवाबदेह, जन केंद्रित और विश्वास आधारित प्रशासन प्रदान किया है।’

संसद में अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘पिछले 10 साल में 30 करोड़ मुद्रा योजना ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए…ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं को 70% आवास महिलाओं को मिले हैं।’

‘औसत वास्तविक आमदनी 50 फीसदी बढ़ी है। महंगाई दर संभली हुई है। परियोजनाएं समय पर पूरी हो रही हैं। लोग अच्छे से रह रहे हैं और अच्छी आमदनी कर रहे हैं। बड़ी योजनाओं की प्रभावी तरीके से और समय पूरा किया जा रहा है। जीएसटी ने एक देश, एक मार्केट और एक टैक्स की धारणा को मजबूत किया है। आईएफएससी ने वैश्विक वित्तीय निवेश का रास्ता खोला है।’

‘गरीब का कल्याण, देश का कल्याण, हम इस मंत्र के साथ काम कर रहे हैं। ‘सबका साथ’ के उद्देश्य के साथ हमने 25 करोड़ लोगों को विविध तरह की गरीबी से बाहर निकाला है। भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए काम कर रहे हैं।’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘पिछले 10 साल में हमने सबके लिए आवास, हर घर जल, सबके लिए बैंक खाते जैसे कामों को रिकॉर्ड समय में पूरा किया। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया गया। अन्नदाताओं की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया। पारदर्शिता के साथ संसाधनों का वितरण किया गया है। हम असमानता दूर करने का प्रयास किया है ताकि सामाजिक परिवर्तन लाया जा सके। प्रधानमंत्री के मुताबिक गरीब, महिलाएं, युवा और अन्नदाता, ये ही चार जातियां हैं, जिन पर हमारा फोकस है। उनकी जरूरतें, उनकी आकांक्षाएं हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।’

‘देश को नया उद्देश्य और नई आशा मिली। जनता ने सरकार को फिर बड़े जनादेश के साथ चुना। हमने दोगुनी चुनौतियों को स्वीकार किया और सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ काम किया। हमने सामाजिक और भौगोलिक समावेश के साथ काम किया। ‘सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ हमने कोरोना के दौर का सामना किया और अमृतकाल में प्रवेश किया। इसके नतीजतन हमारा युवा देश के पास अब बड़ी आकांक्षाएं, उम्मीदें हैं।’

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