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छठ पर्व का तीसरे दिन डूबते सूर्य को देंगे अर्घ्य

नई दिल्ली : लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो चुका है। यह पर्व बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है। छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना की जाती है। यह पावन पर्व 4 दिन तक चलता है। 19 नवंबर को छठ पूजा का तीसरा दिन है। तीसरे दिन पहली अर्घ्य दी जाती है, जिसका बहुत महत्व माना जाता है।

आज महापर्व छठ का तीसरा दिन है और हर घाट इसी तरह के भक्ति गीत से गूंजे उठेगा। आज भगवान सूर्य देव को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। आज नदी, तालाब और झील इत्यादि किनारे बने घाट पर लोग छठ का डाला लेकर पहुंचेंगे, जहां व्रती महिलाएं सूर्यास्त के समय पूरे श्रद्धा भाव से भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य देंगी।

व्रती पानी में खड़े होकर ठेकुआ, गन्ना समेत अन्य प्रसाद सामग्री से सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं और अपने अपने संतान की लंबी आयु के साथ परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। रविवार को व्रती महिलाएं सूर्य देव को पहला अर्घ्य देंगी। छठ पूजा के तीसरे दिन ढलते सूर्य को पूजा का विधान है। ऐसे में आपको बता दें कि रविवार को सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 25 मिनट का रहेगा।

छठ व्रत का महत्व : धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, छठ का व्रत करने से भगवान सूर्य देव समेत छठी मैया का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और मन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। हिंदू धर्म में छठ पूजा का महत्व काफी अधिक है। कार्तिक मास के शुक्‍ल पक्ष की षष्‍ठी से शुरू होने वाले इस व्रत को छठ पूजा, सूर्य षष्‍ठी पूजा और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है।

(Disclaimer : यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। NewsXpoz एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Posted & Updated by : Rajeev Sinha 

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