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छठ महापर्व 2023 : आज पहला दिन नहाय-खाय पर कद्दू-भात

धनबाद-NewsXpoz रिपोर्ट : (अमन्य सुरेश +91-8340184438) : लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत आज से हो रही है. आज पहला दिन नहाय खाय है. छठ व्रती आज गंगा स्नान और भगवान भास्कर की पूजा करते हुए नहाय खाय के साथ छठ की शुरुआत करेंगे. छठ के पहला दिन नहाय खाय का भी विशेष महत्व है. आज के दिन को कद्दू भात भी कहा जाता है.

छठ के पहले दिन नहाय खाय पर कद्दू की विशेष परंपरा है. छठ व्रती आज प्रसाद में कद्दू का उपयोग करते हैं. अरवा चावल का भात, चना दाल, अगस्त का फूल, नया आलू और फूल गोभी से बनी सब्जी से नहाए खाय के दिन बने प्रसाद को ग्रहण करते हैं. इस पूरे प्रसाद को बनाने के लिए सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है. लाल की जगह हरी मिर्च का उपयोग किया जाता है.

पूजा में शुद्धता का रखा जाता है ख्याल : नहाए खाय के दिन से ही छठ व्रती शुद्धता का पूरा ख्याल रखते हैं. प्रसाद बनाने की बात हो या फिर पूजा से जुड़े किसी भी काम की, साफ-सफाई और शुद्धता में कमी नहीं रखी जाती है. नियम का पूरा पालन किया जाता है. जहां संभव है वहां छठ व्रती या उनके अन्य परिवार के सदस्य गंगा स्नान करके प्रसाद बनाना शुरू करते हैं. गंगा जल घर लाकर प्रसाद में भी उसे मिलाते है.

शुक्रवार को स्थानीय हाट में कद्दू साठ रुपये किलो तक बिके जो कि इस वर्ष का सबसे उंचा दाम रहा. लोक आस्था के महापर्व के नियम को माननेवालों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है और बाजार में इसकी उपलब्धता नगन्य रही, जिसके चलते दाम आसमान पर पहुंचा दिखाई दिया. भारी मांग व कम उपलब्धता ने इसे सबसे मंहगा सब्जी बना दिया. नियम पालन के वजह से लोगों को खरीदना भी पड़ा. एक दिन पूर्व तक कद्दू का दाम महज पंद्रह रुपये किलो पर था जो कि दूसरे दिन अचानक ही साठ पर पहुंच गया. दुकानदारों ने भी इस मौके का भरपूर लाभ उठाया।

 

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नहाय खाय के दिन गंगा घाटों पर सुबह से ही छठ व्रतियों की भीड़ देखी जा रही है. छठ व्रती ने कहा कि आज पहला दिन नहाय खाय है. सूर्य देव की आराधना और मां गंगा की पूजा की जाती है. इसके बाद हमलोग नहाय खाय का प्रसाद बनाते हैं.

बता दें कि आज नहाय खाय के बाद कल शनिवार को खरना होगा. इसमें छठ व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम में गुड़ से बनी खीर और रोटी से खरना करेंगे. इसके बाद 36 घंटा निर्जला उपवास रखकर रविवार की शाम को  अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. 20 नवंबर सोमवार की सुबह उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा.

पहले दिन क्या है कद्दू खाने का महत्व? : नहाय खाय के दिन कद्दू खाने के पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी है. इस दिन व्रती प्रसाद के रूप में कद्दू-चावल ग्रहण कर 36 घंटे तक निर्जला व्रत पर रहती हैं. कद्दू खाने से शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं. कद्दू में पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट और पानी पाया जाता है. इसके अलावा यह हमारे शरीर में शुगर लेवल को भी बनाए रखता है. कद्दू को इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर खाया जाता है जो व्रत रखने वालों को 36 घंटे तक रोजा रखने में मदद करता है.

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Posted & Updated by : Rajeev Sinha 

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