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जननायक कर्पूरी ठाकुर को 100वीं जयंती से पहले भारत रत्न

नई दिल्ली-NewsXpoz : बिहार के दिग्गज नेता और दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर के लिए मोदी सरकार ने भारत रत्न का ऐलान किया है. कर्पूरी ठाकुर की जन्म जयंती से एक दिन पहले यह ऐलान केंद्र सरकार मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. कर्पूरी ठाकुर भारत के एक प्रशिक्षित स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और बिहार राज्य के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. लोकप्रियता के कारण उन्हें जन-नायक कहा जाता था.

कर्पूरी ठाकुर बिहार के बहुत लोकप्रिय और ईमानदार नेता थे. वे गरीबों और पिछड़ों के उत्थान के लिए हमेशा तत्पर रहते थे. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे बिहार के दो बार मुख्यमंत्री बने और उन्हें कभी भी चुनाव हारना नहीं पड़ा. कर्पूरी ठाकुर ने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया. इस आंदोलन के दौरान उन्हें 26 महीने जेल में रहना पड़ा. जेल से छूटने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया.

कर्पूरी ठाकुर की राजनीतिक यात्रा : कर्पूरी ठाकुर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की. वे 1952 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए. 1967 में वे बिहार के शिक्षा मंत्री बने. 1970 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने. उनके मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए, जिनमें से एक था गरीबों और पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान करना. 1977 में वे फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बने. उनके दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जिनमें से एक था बिहार में खाद्यान्न का राशन प्रणाली लागू करना.

भारत छोड़ो आन्दोलन से शुरू हुआ करियर : कर्पूरी ठाकुर का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान समस्तीपुर के एक गांव पितौंझिया, जिसे अब कर्पूरीग्राम कहा जाता है, में नाई जाति में हुआ था. जननायक जी के पिताजी का नाम श्री गोकुल ठाकुर तथा माता जी का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था. इनके पिता गांव के सीमांत किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा नाई का काम करते थे. भारत छोड़ो आन्दोलन के समय उन्होंने २६ महीने जेल में बिताए थे. कर्पूरी ठाकुर का निधन 17 फरवरी, 1988 को पटना में हुआ था. उन्हें बिहार के इतिहास के सबसे लोकप्रिय और सफल नेताओं में से एक माना जाता है.

क्या बोले पीएम मोदी? : सरकार के इस ऐलान पर पीएम ने लिखा कि मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने सामाजिक न्याय के प्रतीक महान जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय लिया है और वह भी ऐसे समय में जब हम उनकी जन्मशती मना रहे हैं. यह प्रतिष्ठित सम्मान हाशिये पर पड़े लोगों के लिए समानता और सशक्तिकरण के समर्थक के रूप में उनके स्थायी प्रयासों का एक प्रमाण है. उन्होंने आगे लिखा कि दलितों के उत्थान के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता और उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने पर एक अमिट छाप छोड़ी है. यह पुरस्कार न केवल उनके उल्लेखनीय योगदान का सम्मान करता है बल्कि हमें एक अधिक न्यायपूर्ण और न्यायसंगत समाज बनाने के उनके मिशन को जारी रखने के लिए भी प्रेरित करता है.

अब तक भारत रत्न से सम्मानित देश की महान विभूतियां : 1954 – 1- सी राजगोपालाचारी (राजनेता, लेखक, वकील और इंडिपेंडेंट एक्टिविस्ट) – तमिलनाडु, 2- सर्वपल्ली राधाकृष्णन (दार्शनिक और राजनीतिज्ञ) – तमिलनाडु
3- सीवी रमन (भौतिक शास्त्री) – तमिलनाडु, 1955 – 4- भगवान दास (दार्शनिक) – उत्तर प्रदेश, 5- एम विश्वेश्वरैया (सिविल इंजीनियर, राजनेता) – कर्नाटक, 6- जवाहर लाल नेहरू (पूर्व प्रधानमंत्री और लेखक) – उत्तर प्रदेश. 1957 – 7- गोविंद बल्लभ पंत (स्वतंत्रता सेनानी)-उत्तराखंड. 1958 – 8- धोंडो केशव कर्वे (समाज सुधारक और शिक्षक) – महाराष्ट्र.

1961- 9- बिधान चंद्र रॉय (चिकित्सक, राजनेता, परोपकारी) – पश्चिम बंगाल, 10- पुरूषोत्तम दास टंडन (स्वतंत्रता सेनानी) – उत्तर प्रदेश. 1962 – 11-राजेंद्र प्रसाद (वकील, राजनेता और विद्वान) – बिहार. 1963 – 12- ज़ाकिर हुसैन (शिक्षा दार्शनिक) – आंध्र प्रदेश, 13- पांडुरंग वामन काणे (इंडोलॉजिस्ट और संस्कृत विद्वान) – महाराष्ट्र. 1966 – 14- लाल बहादुर शास्त्री (स्वतंत्रता सेनानी) – उत्तर प्रदेश. 1971 – 15- इंदिरा गांधी (राजनेता) – उत्तर प्रदेश. 1975 – 16- वी वी गिरि (समाज सुधारक) – ओडिशा. 1976 – 17- के कामराज (राजनेता) – तमिलनाडु. 1980 – 18- मदर टेरेसा (कैथोलिक नन) – पश्चिम बंगाल. 1983 – 19- विनोबा भावे (समाज सुधारक) – महाराष्ट्र. 1987- 20- खान अब्दुल गफ्फार खान (समाज सुधारक) – पाकिस्तान. 1988 – 21- एम जी रामचन्द्रन (अभिनेता और राजनेता) – तमिलनाडु. 1990 – 22- बी आर अम्बेडकर (समाज सुधारक) – महाराष्ट्र, 23- नेल्सन मंडेला (रंगभेद विरोधी कार्यकर्ता) – दक्षिण अफ्रीका.

1991 – 24- राजीव गांधी (राजनेता) – उत्तर प्रदेश, 25- सदर वल्लभभाई पटेल (स्वतंत्रता सेनानी) – गुजरात, 26- मोरारजी देसाई (राजनेता) – गुजरात. 1992- 27- अब्दुल कलाम आज़ाद (वैज्ञानिक) – पश्चिम बंगाल, 28- जेआरडी टाटा (उद्योगपति) – महाराष्ट्र, 29- सत्यजीत रे (फिल्म निर्माता) – पश्चिम बंगाल. 1997 – 30- गुलज़ारीलाल नंदा (भारतीय राजनीतिज्ञ) – पंजाब, 31- अरुणा आसफ अली (स्वतंत्रता सेनानी) – पश्चिम बंगाल, 32 – ए पी जे अब्दुल कलाम (एयरोस्पेस और रक्षा वैज्ञानिक) – तमिलनाडु. 1998 – 33- एमएस सुब्बुलक्ष्मी (कर्नाटक शास्त्रीय गायिका) – तमिलनाडु, 34- चिदम्बरम सुब्रमण्यम (भारतीय राजनीतिज्ञ) – तमिलनाडु, 1999 – 35- जयप्रकाश नारायण (समाज सुधारक) – बिहार, 36- अमर्त्य सेन (अर्थशास्त्री) – पश्चिम बंगाल, 37- गोपीनाथ बोरदोलोई (स्वतंत्रता सेनानी) – असम, 38- रविशंकर (सितार वादक) – उत्तर प्रदेश.

2001 – 39 – लता मंगेशकर (पार्श्व गायिका) – महाराष्ट्र, 40 – बिस्मिल्लाह खान (हिंदुस्तानी शास्त्रीय शहनाई वादक) – उत्तर प्रदेश, 2009 – 41 – भीमसेन जोशी (हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक) – कर्नाटक, 2014 – 42 – सीएनआर राव (प्रोफेसर) – कर्नाटक, 43 – सचिन तेंदुलकर (क्रिकेटर) – महाराष्ट्र, 2015 – 44 – मदन मोहन मालवीय (विद्वान एवं समाज सुधारक)-उत्तर प्रदेश, 45 – अटल बिहारी वाजपेयी (राजनेता) – मध्य प्रदेश, 2019 – 46 – नानाजी देशमुख (समाजसेवी) – महाराष्ट्र, 47 – भूपेन हजारिका (पार्श्व गायक, गीतकार, संगीतकार, कवि और फिल्म निर्माता) – असम, 48 – प्रणब मुखर्जी (राजनेता) – पश्चिम बंगाल, 2024 – 49 – कर्पूरी ठाकुर (राजनेता)-बिहार.

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