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जॉर्डन के बाद अब सीरिया में भी अमेरिकी सेना के खिलाफ रॉकेट हमला

वाशिंगटन : जॉर्डन के बाद अब सीरिया में भी अमेरिका और उसके सहयोगी बलों पर हमला हो गया। अमेरिका के रक्षा अधिकारी का कहना है कि सीरिया में अमेरिकी और सहयोगी बलों के खिलाफ रॉकेट दागे गए। हमें निशाना बनाया जा रहा है। एक दिन पहले जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर भी हमला हो गया था, जिसमें तीन सैनिकों की मौत हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मध्यपूर्व में अक्तूबर के मध्य से अमेरिका के खिलाफ हमले बढ़ गए हैं। इसका मुख्य कारण इस्राइल और हमास युद्ध है। दरअसल, अमेरिका इस्राइल का समर्थन कर रहा है और इसी वजह से मध्य पूर्व के देश नाराज हैं और विरोध में अमेरिका और अमेरिकी प्रतिष्ठानों और अमेरिकी सेना के खिलाफ हमले हो रहे हैं।

अमेरिका के एक रक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीरिया के गश्ती बेस शादादी पर अमेरिका और साथी बलों के खिलाफ कई रॉकेट दागे गए। हालांकि, किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जॉन किर्बी ने कहा कि हम ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहते। हम सैन्य तरीकों से शासन का संघर्ष नहीं चाहते। हम तनाव बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रहे। इससे पहले सोमवार को व्हाइट हाउस ने जॉर्डन में हुए हमले का मुंह तोड़ जवाब देने की कसम खाई। इस वजह से क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने का संकट पैदा हो गया है।

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने भी ड्रोन हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत पर गहरा दुख जताया। इसके साथ ही गुस्सा जाहिर करते हुए ऑस्टिन ने कहा, ‘राष्ट्रपति जो बाइडन और वह अमेरिकी बलों पर हमले बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम अमेरिका, अपने सैनिकों और अपने हितों की रक्षा के लिए सख्त कार्रवाई करेंगे।’

एक दिन पहले, उत्तरी जॉर्डन में सीरिया की सीमा के पास हमला हुआ था। दरअसल, जॉर्डन में अमेरिका के लगभग 4,000 सैनिक तैनात हैं। जॉर्डन की सीमा इराक, इस्राइल, फलस्तीन, सऊदी अरब और सीरिया के साथ लगती है। अमेरिकी सेना लंबे समय से जॉर्डन का इस्तेमाल बेस के रूप में कर रही है।

इसी तरह सीरिया में अमेरिका के 900 सैनिक तैनात हैं। ये सैनिक सीरिया में सक्रिय आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट को तबाह करने के लिए कुर्द सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज के साथ काम कर रहे हैं। ईरान समर्थित समूह लंबे समय से अमेरिकी सैनिकों को इराक और सीरिया से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन प्रयासों को तेज करने के लिए समूहों ने गाजा में जारी इस्राइल-हमास युद्ध को बतौर पृष्ठभूमि इस्तेमाल किया है। पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास-इस्राइल युद्ध शुरू होने के बाद से इराक और सीरिया में मौजूद अमेरिका सेना निशाने पर है। यहां अमेरिकी सेना को लगभग रोज ही ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ रहा है।

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