Xpoz-स्पेशलधनबाद-झारखंडप्रदेशबिहार-बंगाल एवं ओडिशा

झारखंड बना हाथियों की ‘कब्रगाह’…! हादसा या साजिश?

रांची (राजीव सिन्हा 9135421800) : झारखंड प्रदेश के विभिन्न जिलों में जंगली हाथियों (haathiyo-ka-kabragah) की लगातार मौत चिंता का सबब बन गया है। वन्य प्रेमी विशेषज्ञों का मानना है कि यह महज हादसा नहीं है…, इसके पीछे एक सोची समझी गहरी साजिश हो सकती है। जिससे हाथियों के खाल सहित कीमती दांत की तस्करी सुगमता से किया जा सके।

जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार के संबंधित विभागों की असरदार नियंत्रण नहीं होने और वन्य प्राणियों की लगातार उपेक्षाओं के कारण झारखंड में वन्य जीव के कीमती खाल व दांत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने वाला गिरोह इन दिनों पैर पसार चुका है। इन तस्करों के कुछ सदस्य हाथी दांत के साथ सिंहभूम तथा राज्य के कई स्थानों से बीते दिनों पकड़े गए हैं।


NewsXpoz पर ताजा खबर देखें-पढ़ें और सुने…

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हाथियों के खाल व दांत की है डिमांड : झारखंड के जंगलों में मृत हाथियों (haathiyo-ka-kabragah) की पाये जाने की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हाथियों की मौत के पीछे भी वन्य जीव संरक्षण उनके शरीर से मिलने वाली चीजों के कारोबार को जिम्मेदार ठहरा रहे है। मालूम हो कि चीन हाथियों के शरीर से मिलने वाली चीजों का सबसे बड़ा बाजार है। वहां हाथियों की खाल का इस्तेमाल इंसान के पेट और त्वचा की बीमारियों के इलाज में किया जाता है। साथ ही इससे आभूषण भी बनाए जाते हैं।  खून के रंग वाले मानकों की माला व लॉकेट की बड़ी मांग विश्व बाजार में है। इंटरनेट पर इन चीजों का प्रचार-प्रसार कर बेचा जाता है।

हाथियों का शिकार पूरी दुनिया में दांतों के लिए किया जाता है। हाथी दांत (haathiyo-ka-kabragah) के शिकार में नर और व्यस्क हाथियों को एक खास उम्र के बाद निशाना बनाया जाता है। लेकिन खाल के मामले में ऐसा नहीं है। हाथी के चमड़े से बनने वाली चीजों का कारोबार और हाथियों के शिकार में संबंध को सीधे तौर पर प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। लेकिन दोनों में साथ-साथ आई तेजी देखने के बाद ज्यादा विश्लेषण की जरूरत नहीं पड़ती है। चीन की पारंपरिक दवा और दूसरे दवा बेचने वाले प्लेटफार्म पर हाथियों के चमड़े के पाउडर बेचने के सबूत मिले हैं।

झारखंड बना हाथी दांत के तस्करों का बड़ा केंद्र : जंगल में घुसकर हाथियों (haathiyo-ka-kabragah) की हत्या और उनके दांत काटने वाले अपराधियों ने झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम से लेकर चीन तक अपना नेटवर्क फैला रखा है। वर्ष 2022 के नवंबर माह में चाईबासा के कुम्हारटोली मोहल्ले में एक घर में छापेमारी कर वन विभाग और पुलिस की टीम ने पांच तस्करों को गिरफ्तार किया था। ये सभी लोग एक अंतरराज्यीय गिरोह के नेटवर्क से जुडे हुए थे। इनके ठिकाने से 10 हाथी दांत बरामद किए गए थे।

गिरफ्तार तस्कर झारखंड, ओडिशा और बिहार के रहने वाले बताये गए।  इनमें चाईबासा जगन्नाथपुर निवासी अनिश अहमद अंसारी, ओडिशा बड़बिल के अमरजीत जायसवाल और संजीत जायसवाल, रांची का चंदन कुमार और बिहार के समस्तीपुर का रंजीत कुमार सिंह शामिल थे।

हाथियों का है रास्ता : कई हाथियों (haathiyo-ka-kabragah) के आने-जाने का रास्ता दुमका के मसलिया से जामताड़ा, धनबाद, गिरिडीह होते हुए हजारीबाग है। इसी रास्ते से वे लौटते भी हैं। सैकड़ों साल से वे इसी रास्ते से आते-जाते हैं। इनका संघर्ष इसी इलाके में अधिक होता है। हाथियों की गणना 2017 में अंतिम बार हुई थी। तब 555 हाथी थे। यह संख्या अब बढ़कर करीब 700 हो चुकी है।

हाथियों की मौत पर जांच कमिटी गठित : पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया व मुसाबनी वन क्षेत्र में बीते दिनों हुई सात हाथियों (haathiyo-ka-kabragah) की मौत का मामला अब भारत सरकार तक पहुंच गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा गठित टीम ने रविवार को मुसाबनी व चाकुलिया का दौरा कर घटनास्थल की जांच की। हाथियों की मौत कैसे हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं व इसे कैसे रोका जा सकता है, इन्हीं तीन बिंदुओं पर मुख्य रूप से जांच की गई।

जांच में कई लोग हैं शामिल : जांच टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए व ग्रामीणों से बातचीत कर जानकारी ली। जांच दल में वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एचवी गिरीशा, बोर्ड के सदस्य एन. लक्ष्मीनारायण, वन विभाग (झारखंड सरकार) के वन संरक्षक, रांची पीआर नायडू व बिजली विभाग मुख्यालय (रांची) के जीएम मंतोषमनी सिंह के अलावा जमशेदपुर की डीएफओ ममता प्रियदर्शी, चाकुलिया रेंजर दिग्विजय सिंह, विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार, कार्यपालक अभियंता राजकिशोर व सहायक अभियंता अमरजीत प्रसाद शामिल थे।

हाथियों के मौत की विभिन्न घटनाएं : प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार घट रही घटनाओं से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ये सब सुनियोजित तरीके से (haathiyo-ka-kabragah) तस्करों के गैंग द्वारा किया जा रहा है।

  • केस 1 – पूर्वी सिंहभूम स्थित मुसाबनी वन क्षेत्र के बेनासोल के उपरबंधा पोटास जंगल में 33 हजार वोल्ट के बिजली तार की चपेट में आने से 5 हाथियों की दर्दनाक मौत हो गई है। बता दें कि कॉपर लिमिटेड की खदानों के लिए हाईटेंशन तार जंगल के बीच से ले जाया गया है, जिससे यह हादसा हुआ है.
  • केस 2 – पूर्वी सिंहभूम के चाईबासा में 18 दिसंबर 2022 को 11,000 वोल्ट करंट के संपर्क में आने से करंट लगने से एक हाथी की मौत हो गई थी।
  • केस 3 – रांची के इटकी थाना क्षेत्र के डोला गांव के केवड़बेड़ा जंगल में सुबह एक नर जंगली हाथी मृत पाया गया।
  • केस 4 – पिछले महीने में भी पूर्वी सिंहभूम में एक हाथी की मृत्यु बिजली की तार की चपेट मे आकर हुई थी।
  • केस 5 – 23 नवंबर 2023 को एक हाथी की मौत गांडेय क्षेत्र गिरिडीह में हुई।

वन्य जीवों को बचाने के प्रति गंभीरता की कमी : वन्य प्रेमी सह सामाजिक कार्यकर्त्ता राणा घोष का कहना है कि एकाधिकार प्रणाली, कुप्रबंधन और लापरवाही के कारण लगभग 10 से अधिक हाथियों की मौत हो गई है। इसलिए इन मामलों की सूक्ष्मता और ईमानदारी से जांच हो। सभी कोणों और बिंदुओं से मौत के सही कारण का पता लगाया जाए। कुछ बिंदुओं से हाथियों की लगातार मौत एक सुनियोजित हत्या भी लगती है। अगर ये मौतें लापरवाही के कारण हुई हैं, तो भी यह एक हत्या है।

क्या कहते हैं अधिकारी : गिरिडीह वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि दलमा और बेतला की तरह अन्य जंगलों को घना और विस्तृत करना होगा। उनके लिए भोजन और पानी का प्रबंध जंगल में ही करना होगा।बेरिकेडिंग भी करनी होगी। तब हाथी जंगल से बाहर नहीं आएंगे, इससे संघर्ष रोका जा सकता है। एक बात और कि दलमा और बेतला में जंगल इंसानों की आबादी भी काफी दूर है। पारसनाथ से संथाल परगना तक के इलाके में जंगल सिकुड़ गए हैं। जंगल से सटी कई बस्तियां बस गईं हैं।

NewsXpoz Digital

NewsXpoz Digital ...सच के साथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *