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दिल्ली : बार-बार माफी मांगने से बच नहीं सकते, पवन खेड़ा को SC से झटका

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी के चलते मुकदमे का सामना कर रहे कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे मुकदमें को रद्द करने से इंकार कर दिया है. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी पवन खेड़ा की याचिका को खारिज कर दिया था. उन्होंने इस आदेश को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया. पवन खेड़ा हालांकि इस बयान के लिए माफी मांग चुके हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि वो बार-बार माफी मांगकर मुकदमे से नहीं बच सकते.

पवन खेड़ा पर यह  एफआईआर दरअसल पिछले साल मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान के चलते हुई थी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने  अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाये गए आरोपों का जिक्र  करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा. इस दौरान उन्होंने कहा कि जब अटल बिहारी वाजेपयी जेपीसी बना सकते हैं तो नरेंद्र ‘गौतमदास मोदी’ को क्या समस्या है. इसके बाद उन्होंने आसपास खड़े लोगों से पूछा कि नाम गौतम दास है  या दामोदर दास! इसके बाद उन्होंने बोला कि नाम भले ही दामोदर  दास है, उनका काम गौतम दास का है. हालांकि इसके बाद उन्होंने सफाई दी कि पीएम के नाम को लेकर उन्हें भ्रम था. लेकिन इसको लेकर यूपी और असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई.

पिछले साल 23 फरवरी को असम पुलिस ने पवन खेड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया. हालांकि उसी दिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत भी मिल गई. 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने असम और वाराणसी में दर्ज एफआईआर को लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर भी कर दिया. इसके बाद अगस्त में उन्हें लखनऊ के स्थानीय कोर्ट से नियमित जमानत भी मिल गई.

पवन खेड़ा ने निचली अदालत से जारी समन और चार्जशीट को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. उन्होंने हाईकोर्ट में इस बयान के बिना शर्त माफी भी मांगी लेकिन हाईकोर्ट ने कोई राहत देने से इंकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हालांकि वो भी पवन खेड़ा के बयान को ठीक नहीं  मानते. लेकिन खेड़ा ने ये बयान अनजाने में दिया है. वो बिना शर्त इसके लिए माफी मांगने को तैयार हैं.

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