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धनतेरस आज, बन रहे हैं कई शुभ योग

नई दिल्ली : आज  यानी 10 नवंबर को धनतेरस का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज से ही दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। धनतेरस के दिन सोने,चांदी के आभूषण और धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा है।

कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर 2023 दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 11 नवंबर की दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर होगा। धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, इसलिए धनतेरस 10 नवंबर यानी आज ही मनाई जा रही है।

इस बार धनतेरस तिथि पर प्रीति योग बन रहा है। इस योग का निर्माण शाम 5:06 बजे के बाद होगा और रातभर रहेगा। अतः इस योग में पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी।

आज यानी 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से त्रयोदशी तिथि शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 11 नवंबर की दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर होगा। धनतेरस के दिन पूजा प्रदोष काल में होती है, इसलिए धनतेरस 10 नवंबर यानी आज ही मनाई जा रही है।

धनतेरस से जुड़ी एक दूसरी कथा है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन देवताओं के शुभ कार्य में बाधा डालने पर भगवान विष्णु ने असुरों के गुरू शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार, देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। वामन भगवान द्वारा मांगी गयी तीन पग भूमि, दान करने के लिए कमण्डल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य राजा बलि के कमण्डल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर गए।

तब भगवान वामन ने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमण्डल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई। इसके बाद राजा बलि ने संकल्प लेकर तीन पग भूमि दान कर दिया। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिल गई और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुणा धन-संपत्ति देवताओं को फिर से प्राप्त हो । इस इस कारण से  भी धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।

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Posted & Updated by : Rajeev Sinha 

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