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थाने में जब्त वाहन, बन गए कबाड़… परेशानी का सबब; कब मिलेगी निजात

धनबाद (राजीव सिन्हा-9135421800) : पुलिस और पुलिस स्टेशन का नाम जेहन में आते ही लोगों को सुरक्षा तथा अनुशासन का बोध होता है… लेकिन कोयलांचल के कई थाने में प्रवेश करने के साथ ही यह सोच बदल जाती है! …क्योंकि थाने में जमा पुराने वाहन कबाड़ का गोदाम और जंगल का रूप अख्तियार कर चूका है। जो वहां जाने वाले लोगों के साथ-साथ पुलिसवालों को भी भयभीत करता है। गाड़ियों की कबाड़ इतनी अधिक मात्रा में जमा हो चुकी है कि यह कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है। लेकिन न जाने क्यों सरकार इसके प्रति उदासीन रवैया अख्तियार की हुई है, यह समझ से परे है।

हालांकि समय-समय पर इन्हें नीलाम करने तथा हटाने की चर्चा अवश्य होती है। परन्तु एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभिन्न थानों में जमा कबाड़ रुपी वाहन परेशानी का सबब बनती दिख रही है। अगर ऐसे कबाड़ के ढेर को जल्द हटाया नहीं गया तो… आने वाले दिनों में पुलिस अपनी ड्यूटी का निर्वहन शायद पूर्ण रूप से ना कर सके। क्योंकि जप्त की जाने वाली गाड़ियों को खड़ा करने के लिए थानों में कोई जगह शेष नहीं बचेगी।

थाने के नए भवनों का हुआ था निर्माण : कुछ वर्ष पहले राज्य के कई जिलों में नए थाना भवनों का निर्माण हुआ था। हुआ था। मकसद साफ़ था की राज्य के लोगों को पुलिस स्टेशन कॉर्पोरेट लुक में दिखे। साथ ही पुलिस की कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर अन्य राज्यों के पुलिस स्टेशन से आधुनिक व तकनीकी तौर से जोड़ा जा सके। परन्तु थाना परिसर में वर्षों से जमे कबाड़ ने एक बार फिर झारखंड पुलिस को पुरानी स्थिति में ला खड़ा किया है।

थानों के सामने सड़कों पर अतिक्रमण : अगर थाने ही सड़कों और नालों पर अतिक्रमण करने लगें, तो उन्हें कौन रोकेगा? शहर के ज्यादातर थानों में कबाड़ बनीं गाड़ियों ने काफी जगह घेर रखी है। चकाचक थाना परिसरों के बाहर भी यही स्थिति रहती है। इस कारण ट्रैफिक तो जाम हो ही रहा है, साथ ही हादसों में भी बढ़ोतरी हो रही है।

एनएच पर अतिक्रमण बढ़ा रहे थाने : जिले के नेशनल हाइवे पर अवस्थित बरवाअड्डा, राजगंज, तोपचांची, गोविंदपुर, निरसा समेत कई थानों के सामने पड़ीं गाड़ियां रोड का अतिक्रमण कर रही हैं। ये वह गाड़ियां हैं, जिन्हें या तो आपराधिक वारदातों के मामलों में जब्त किया गया या किसी घटना में जब्त किया गया है।

वर्षों से नीलामी नहीं : जिले के थानों में करीब 10 वर्षों से जब्त गाड़ियों की नीलामी नहीं की गई है। पुलिस लाइन में आखिरी बार करीब पांच साल पहले कुछ विभागीय गाड़ियों की नीलामी हुई थी। डेढ़ साल पहले कुछ थानों में पड़ीं कुछ अनक्लेम्ड गाड़ियों की नीलामी का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन उन पर कोई फैसला नहीं हो सका है।

गाड़ियों के कबाड़ से बढ़ा है खतरा : हाल के दिनों में धनबाद सदर थाना में हुई आगलगी से यह बात स्पष्ट हो चुका है कि कबाड़ वहां मौजूद पुलिस कर्मियों तथा लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है। क्योंकि थाना परिसर में जमे कबाड़ हादसे को आमंत्रित कर रहे हैं।

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Posted & Updated by : Amanya Suresh 

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