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धनबाद : बुधनी ने दुनिया को कहा अलविदा, जवाहरलाल ने गले में डाला था हार

पंचेत : देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ पंचेत डैम का उद्घाटन करने वाली बुधनी माझीयाईन इस दुनिया को अलविदा कह कर चली गई। पंचेत डैम का उद्घाटन देश के लिए गौरव की बात है, पर बुधनी माझीयाईन के लिए अभिशाप साबित हुआ।

दरअसल यह बात 6 दिसंबर 1959 का है। पंचेत डैम का उद्घाटन करने वाले देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पहुंचे थे। उनका भव्य स्वागत के लिए बुधनी को चुना गया, क्योंकि बुधनी ने बांध निर्माण में सक्रिय मजदूर का काम किया था।

जब मंच पर प्रधानमंत्री पहुंचे तो बुधनी ने तिलक लगाकर उनके गले में पुष्प हार डाला। फिर उसी हार को निकाल कर प्रधानमंत्री ने बुधनी के गले में डाल दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री की उपस्थिति में बुधनी द्वारा डैम का उद्घाटन किया गया। देश के  बड़े-बड़े चैनलों और अखबारों में प्रधानमंत्री साथ बुधनी का तस्वीर भी छापा।

अब तक सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। पर बुधनी जब अपने गांव पहुंचा तो गांव वालों ने जमकर उसकी प्रताड़ना की। उनके गांव वालों का कहना था परंपरा के अनुसार दूसरे जाति के पुरुष से तुम्हारा विवाह हो चुका है। अतः बुधनी को गांव से प्रताड़ित कर निकाल दिया गया। देश के प्रधानमंत्री साथ विवाह के कलंक को वह जीवन भर मिटा नहीं पाई।

बाद में उनके जीवन में सुधीर दत्त नाम का एक शख्स आया जिससे उनकी एक पुत्री है। आपको बताते चले बुधनी का जन्म 1946 में हुई थी। उनकी बेटी रतना का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री की पत्नी होने के बावजूद मां को किसी प्रकार की सुख सुविधा नहीं मिला। मां के पेंशन से ही परिवार चलता था अब माँ भी नहीं रही। अतः सरकार से गुहार है मेरे लिए एक घर एवं मां का पेंशन सुचारू रूप से जारी रखा जाए।

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Posted & Updated by : Rajeev Sinha 

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