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नेपाल में देर रात हिली धरती, 129 से अधिक लोगों की हुई मौत; सामने आईं भयावह तस्वीरें

नई दिल्ली-NewsXpoz : देर रात नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता 6.4 रही. भूकंप की वजह से नेपाल में 129 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, दिल्ली-NCR समेत के अलग-अलग कई राज्यों में भी भूकंप  के झटके महसूस किए. भूकंप के झटके लगते ही लोग अपने घरों से बाहर आ गए. भारत में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और बिहार तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए.

बता दें कि नेपाल में भूकंप शुक्रवार की रात 11 बजकर 32 मिनट पर आया. नेपाल में भूकंप का केंद्र होने की वजह से वहां पर इसका ज्यादा असर देखने को मिला. दक्षिण जाजरकोट के कई इलाकों में दीवारों में दरार आ गई तो कई कच्चे घरों का कुछ हिस्सा टूट गया. नेपाल के स्थानीय मीडिया के मुताबिक, भूकंप के झटकों की वजह से करीब 129 लोगों की जान चली गई. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

धरती हिलने के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए. लोग सो रहे थे और कुछ सोने की तैयारी कर रहे थे. तभी अचानक से भूकंप के झटकों से पंखा हिलने लगा और लोग बाहर की ओर भागे. अक्सर ऐसा होता है कि भूकंप के बाद आफ्टर शॉक भी आता है, ऐसे में लोग लंबे समय तक अपने घर के बाहर खड़े रहे.

जान लें कि नेपाल में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.4 मापी गई. इस भूकंप का केंद्र नेपाल के साउथ जाजरकोट इलाके में था. ये भूकंप जमीन में करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था. यही वजह है कि करीब 700 किलोमीटर दूर दिल्ली में भी इसके झटके महसूस किए गए.

गौरतलब है कि भूकंप की वजह से साउथ जाजरकोट के कई इलाकों में दीवारों में दरार आ गई. इसके अलावा कई कच्चे घरों का कुछ हिस्सा टूट गया. भूकंप के बाद जाजरकोट में नुकसान का आकलन करने में नेपाल पुलिस जुटी हुई है. मलबे में दबे लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा है.

आपको बता दें कि उत्तर भारत में एक महीने में तीसरी बार तेज भूकंप आया है. पिछले महीने की 22 अक्टूबर को आए भूकंप का केंद्र भी नेपाल ही था. तब 6.1 तीव्रता के भूकंप के बाद एक के बाद एक तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे.

नेपाल के पीएम प्रचंड नेपाली आर्मी की 16 मेंबर्स की मेडिकल टीम के साथ जाजरकोट के लिए रवाना हो गए हैं. बीती रात आए भूकंप का सेंटर जाजरकोट के बरेकोट में था. इसकी वजह से नलगढ़ नगर पालिका, रुकुमपास्चिम के अथाविस्कोट नगर पालिका में ज्यादा नुकसान पहुंचा है. भूकंप से दो जिलों में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है.

क्यों आता है भूकंप? : दरअसल, धरती के अंदर ऐसी 7 प्लेट्स मौजूद हैं, जो लगातार मूव करती रहती हैं. ऐसे में लगातार घूमते हुए ये प्लेट्स जहां सबसे ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है. बार-बार टकराने से इन प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं और जब इन पर ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. ऐसे में पृथ्वी के नीचे मौजूद ऊर्जा बाहर आने का रास्ता तलाशती हैं और इसी डिस्टर्बेंस के बाद धरती पर भूचाल आता है.

किसे कहते हैं टेक्टोनिक प्लेट्स? : भू वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी का बाहरी आवरण बड़े-बड़े टुकड़ों से मिलकर बना होता है, जिसे टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है. ये प्लेट ठोस चट्टान का एक विशाल स्लैब होता है, जिन्हें लिथोस्फेरिक प्लेट भी कहते हैं, ये प्लेटें आपस में एक साथ फिट होती हैं, लेकिन ये एक जगह पर ही स्थिर नहीं होती हैं, बल्कि पृथ्वी के मैटल लेयर पर तैरती रहती हैं. मैटल पृथ्वी के क्रस्ट और कोर के बीच की लेयर होती है.

पृथ्वी के स्थलमंडल का अहम हिस्सा होती हैं टेक्टोनिक प्लेट. दरअसल, धरती की चार परत इनर, आउटर, क्रस्ट और मैटल कोर है. इनमें सबसे ऊपरी परत क्रस्ट, मैटल कोर के साथ मिलकर लीथोस्फेयर बनाती हैं. लीथोस्फेयर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनती है.  ये प्लेट्स अलग-अलग दिशा में घूमती हैं और इनके आपस में टकराने से भूकंप आता है.

डरहम यूनिवर्सिटी के स्ट्रक्चरल जियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ बॉब होल्डवर्थ के मुताबिक अगर भूकंप 6.5-6.9 की तीव्रता से आए तो एक मीटर तक जमीन खिसक जाती है. इससे ज्यादा तीव्रता से भूकंप आने पर इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है.

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Posted & Updated by : Rajeev Sinha 

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