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नेपाल : हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग, चीन के खिलाफ राजशाही फिर से हो बहाल

नई दिल्ली/काठमांडू-NewsXpoz : नेपाल में चीन की अपनी मनमर्जी चलाना चाहता है. इसके पीछे चीन की सबसे बड़ी चाहत यह है कि नेपाल और भारत के बीच रिश्ते बिगड़ जाए. चीन की ही चालबाजियों के कारण नेपाल में हमेशा एक अशांत सरकार रही है. लेकिन अब नेपाल का एक वर्ग चीन को अपने देश से बाहर फेंक देना चाहता है.

नेपाल में उठी हिन्दू राष्ट्र की मांग : इसकी जीती-जागती तस्वीर कुछ दिनों पहले काठमांडू में देखने को मिली. काठमांडू में हजारों की संख्या में एकजुट होकर लोगों ने नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने की पुरजोर मांग उठाई. इतना ही नहीं इन लोगों की यह भी मांग थी कि नेपाल में राजशाही फिर से बहाल हो. इन सभी लोगों को नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र का समर्थक बताया जा रहा है.

चीन के खिलाफ गुस्सा : चीन की दखलअंदाजी की वजह से परेशान लोग सड़क पर उतर आए. हालात इस कदर खराब हुए कि नेपाल सरकार को काठमांडू में दंगा-रोधी पुलिस को भेजना पड़ा. पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के कथित हजारों समर्थकों ने काठमांडू के केंद्र तक पैदल मार्च करने की कोशिश की. हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लोगों पर लाठियां भाजनी पड़ी और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े.

रिपोर्ट्स में चौंकाने वाला दावा : रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि  प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय ध्वज लिए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के समर्थन में नारे लगा रहे थे. शहर के केंद्र की तरफ बढ़ते प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाबलों ने बल प्रयोग कर रोका. जानकारों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों का गुस्सा चीन के खिलाफ था. चीन के बढ़ते हस्तक्षेप से नेपाल का एक वर्ग लंबे वक्त से नाराज चल रहा है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नेपाल की सरकार भी चीन से प्रभावित है. जिसके चलते जनता को भुगतना पड़ता है. लोगों का आरोप है कि नेपाल सरकार ने हवाई अड्डे और राजमार्ग चीन को बेच दिए हैं.

2006 में खत्म हुई राजशाही : यही कारण है कि लोग नेपाल में एक बार फिर राजशाही चाहते हैं. उनकी मांग है कि नेपाल हिन्दू राष्ट्र बने और देश एक राजा के अधीन हो. बता दें कि नेपाल में हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद 2006 में राजशाही खत्म कर दी गई थी.

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