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पीएम मोदी का ब्लॉग, G20 में चार शब्द ने हमारे दृष्टिकोण को किया परिभाषित

नई दिल्ली-NewsXpoz : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की जी20 की अध्यक्षता और एक नये बहुपक्षवाद की सुबह की बात की है. पीएम मोदी ने एक ब्लॉग में लिखा कि गुरुवार (30 नवंबर) को 365 दिन पूरे हुए, जब भारत को जी20 की अध्यक्षता करने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि ये ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) की भावना को प्रतिबिंबित करने, प्रतिबद्धता जताने और फिर से इस पल को जीने का मौका है.

पीएम मोदी ने लिखा कि जिस वक्त हमने जी20 की अध्यक्षता संभाली. उस वक्त दुनिया कई तरह की परेशानियों से जूझ रही थी. दुनिया कोविड-19 से उबर रही थी, उसके ऊपर जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा था, वित्तीय अस्थिरता और कर्ज की समस्या ने भी उसे परेशान किया हुआ था. ये सबकुछ ऐसे समय पर हो रहा था, जब दुनियाभर में बहुपक्षवाद घट रहा था. दुनिया में चल रहे संघर्षों और प्रतिस्पर्धा के बीच विकास सहयोग प्रभावित हुआ, जिससे प्रगति में बाधा आई.

ब्लॉग में और क्या-क्या कहा गया? : अपने ब्लॉग में पीएम मोदी ने लिखा कि जी20 का अध्यक्ष बनते हुए भारत ने दुनिया को यथास्थिति का एक विकल्प दिया. इसने जीडीपी-केंद्रित से मानव-केंद्रित प्रगित की ओर कदम बढ़ाए. भारत का मकसद दुनिया को ये याद दिलाना रहा है कि हमें कौन सी चीजें जोड़ती हैं, न कि वो चीजें जो हमें विभाजित करती हैं. आखिर में वैश्विक बातचीत को कुछ लोगों के हितों से आगे बढ़कर कई लोगों की आकांक्षाओं को रास्ता देना रहा. इसके लिए बहुपक्षवाद में सुधार की जरूरत थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे लिखा कि समावेशी, महत्वाकांक्षी, कार्य-उन्मुख और निर्णायक- ये वो चार शब्द हैं, जो जी20 अध्यक्ष के तौर पर हमारे दृष्टिकोण को पूरी तरह से परिभाषित करते हैं. नई दिल्ली लीडर्स डेक्लेरेशन (एनडीएलडी) इन चारों की बातों को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता का सबूत है. एनडीएलडी को सर्वसम्मति के साथ सभी जी20 सदस्य देशों के जरिए अपनाया गया है. समावेशिता हमारी अध्यक्षता के केंद्र में रही है.

पीएम मोदी आगे लिखते हैं कि जी20 के स्थायी सदस्य के तौर पर अफ्रीकन यूनियन को शामिल करने से 55 अफ्रीकी देश एक बार में ही जी20 से जुड़ गए हैं. इस तरह इस वैश्विक संगठन में शामिल देशों की कुल आबादी दुनिया की 80 फीसदी आबादी के बराबर है. इस सक्रिय रुख ने वैश्विक चुनौतियों और अवसरों पर अधिक व्यापक बातचीत को बढ़ावा दिया है.

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