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पीएम मोदी ने घरेलू पर्यटन बढ़ाने पर दिया जोर, देशवासियों से किए नौ आग्रह

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के खोडलधाम ट्रस्ट कैंसर अस्पताल के शिलान्यास कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। इस दौरान अपने  संबोधन में पीएम मोदी ने कहा यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैं खोडलधाम की पवित्र धरती और इसके श्रद्धालुओं से जुड़ रहा हूं। समाज कल्याण के लिए श्री खोडलधाम ट्रस्ट आगे आया है। आज से यहां अमरेली में कैंसर अस्पताल और रिसर्च सेंटर का काम शुरू हो रहा है। इस दौरान पीएम मोदी ने जनता से नौ आग्रह भी किए, जिनमें घरेलू पर्यटन को बढ़ाने की अपील की गई थी।

प्रधानमंत्री ने किए नौ आग्रह : गुजरात के खोडलधाम मंदिर ट्रस्ट द्वारा निर्मित किए जाने वाले कैंसर हॉस्पिटल के भूमिपूजन समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया भी शामिल हुए। कार्यक्रम में अपने संबोधन में पीएम मोदी ने लोगों से नौ आग्रह किए, जिनके तहत पानी की एक-एक बूंद बचाने और पानी संरक्षण के लिए लोगों को जागरुक करने, गांव स्तर पर भी लोगों को डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए प्रेरित करने, गांवों-कस्बों और शहरों को साफ रखने, स्थानीय उत्पादों और मेक इन इंडिया उत्पादों को प्रोत्साहित करने, देश में घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहित करने, किसानों में जैविक खेती को बढ़ावा देने, श्री अन्न को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करने, फिट रहने और किसी भी तरह से नशे से दूर रहने की अपील की।

सस्ती दवाओं से बचाए गरीबों के 30 हजार करोड़ रुपये : प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार कैंसर के मरीजों के लिए परेशानी मुक्त इलाज सुनिश्चित कर रही है। बीते नौ सालों में देश में करीब 30 नए कैंसर अस्पताल विकसित किए गए हैं। 10 नए कैंसर अस्पतालों में काम चल रही है। गुजरात ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। आज गुजरात एक बड़े मेडिकल हब में तब्दील हो गया है। 2002 तक गुजरात में सिर्फ 11 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज इनकी संख्या बढ़कर 40 हो गई है। इन 20 सालों में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर पांच गुनी हो गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा ‘देश के विकास के लिए  लोगों का स्वस्थ रहना जरूरी है। हमने आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए शुरू की है। इस योजना से अब तक छह करोड़ लोग लाभान्वित हो चुके हैं। सरकार ने 10 हजार जन औषधि केंद्र भी खोले हैं, जहां लोगों को 80% डिस्काउंट पर दवाइयाँ मिल रही हैं। सस्ती दवाइयों की वजह से ग़रीब के तीस हजार करोड़ रुपये खर्च होने से बचे हैं।’

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