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बिहार : बुर्का में स्कूल आने से रोका तो टीचर्स का सिर कलम करने की धमकी

शेखपुरा-NewsXpoz : बिहार में शेखपुरा के एक सरकारी स्कूल में बुर्का को लेकर बवाल हो गया है. टीचर्स ने जब छात्राओं के बुर्का पहनकर आने पर ऐतराज जताया तो उन्होंने घर जाकर यह बात अपने परिवार वालों को बता दी. इससे भड़के परिवार वालों ने बुर्के से रोकने पर टीचर्स का सिर कलम करने की धमकी दी है. इस घटना से स्कूल के हेडमास्‍टर समेत सभी टीचर्स बुरी तरह डर गए हैं और उन्होंने उस स्कूल से अपना सामूहिक तबादला मांगा है.

बुर्के से रोके जाने पर हंगामा : रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला शेखपुरा जिले के तहत आने वाले शेखोपुर सराय नगर पंचायत के माध्यमिक विद्यालय चारूआवां का है. वहां पर कुछ छात्राओ के बुर्का पहन स्कूल आने पर स्कूल के हेडमास्टर सत्येंद्र चौधरी ने उन्हें डांट दिया था और स्कूल ड्रेस में आने की हिदायत दी थी. छात्राओं ने घर जाकर इस बात की शिकायत अपने मां-बाप से की. इससे भड़के मां-बाप ने दूसरे लोगों को इकट्ठा किया और स्कूल में जाकर हेडमास्टर को जमकर खरीखोटी सुनाई.

मां-बाप ने कहा कि  बुर्का पहनना उनके मजहब से जुड़ा है और इस तरह स्कूल आने वाली छात्राओं को कोई रोक नहीं सकता. इस पर हेडमास्टर ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि बुर्का पहनकर और धार्मिक कट्टरपन में आकर छात्राएं तरक्की नहीं कर सकती. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार के नियमों के मुताबिक कोई भी स्टूडेंट स्कूल ड्रेस के अलावा कुछ और पहनकर नहीं आ सकता.

हेडमास्टर को जान से मारने की धमकी : इस पर स्कूल में आए पैरंट्स भड़क गए और हेडमास्टर को गाली-गलौज करते हुए जान मारने की धमकी देने लगे. इस घटना के बाद हेडमास्टर ने डीएम और जिला शिक्षा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है. उन्होंने आग्रह किया कि उनका तबादला दूसरे स्कूल में कर दिया जाए. वहीं जब मीडिया ने पूरे मामले की पड़ताल की कई चौकाने वाली जानकारी सामने आई हैं.

स्थानीय लोगों की माने तो इस स्कूल में मुस्लिम बच्चे बड़ी तादाद में पढ़ते हैं. करीब दो माह पूर्व इस विद्यालय में शिक्षा सेवक की भर्ती निकली थी. जिसके तहत महादलित समाज से शिक्षा सेवक की भर्ती की जानी थी लेकिन गांव के ही कुछ राजनीतिक लोगों ने बाकी लोगों को भड़काकर स्कूल के हेडमास्टर पर तालीमी मरकज शिक्षा सेवक की बहाली करने का दबाव डालना शुरू किया, जो कि नियम विरुद्ध था. उनकी मंशा थी कि तालीमी मरकज के जरिए उनकी बेटी की भर्ती हो जाए. जब विवाद बढ़ा तो स्कूल में शिक्षा सेवक की भर्ती रद्द कर दी गई. इसके बाद आरोपियों के मसूबों पर पूरी तरह पानी फिर गया और वे छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर अक्सर धार्मिक भावनाऐं भड़काकर स्कूल में हंगामे की स्थिति पैदा करवा देते हैं.

सरकारी पैसे लेकर भी नहीं पहनते ड्रेस : स्कूल के हेडमास्टर सत्येंद्र कुमार चौधरी कहते हैं कि स्कूल की वर्दी खरीदने के लिए सरकारी योजना के तहत सभी बच्चों को बराबर पैसा मिलता है. इसके बावजूद मुस्लिम छात्राएं स्कूल ड्रेस की जगह बुर्का पहनकर स्कूल पहुंचती हैं, जो बिहार सरकार के निर्देशों के खिलाफ है. गांव के मुस्लिम समुदाय ने इसे अपने मजहब और दीन से जुड़ा मामला बताते हुए स्कूल के हेडमास्टर और टीचर्स पर इसे जरूरत से ज्यादा तूल देने का आरोप जड़ा है. वहीं, गांव के पूर्व मुखिया एक कदम और आगे निकल गए. उन्होंने विवाद बढ़ने के हालात में स्कूल पर ताला लगाने की चेतावनी दे दी है.

टीचर्स ने जताया हत्या का डर : मामले को बढ़ता देख जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रमेश प्रसाद चरुआवां विद्यालय पहुंचे और स्थानीय जनप्रतिनिधि समेत ग्रामीणों और विद्यालय के शिक्षकों के साथ बैठक की. लेकिन किसी प्रकार का निष्कर्ष नही निकला. जिसके पश्चात अधिकारी वापस लौट गए. इस पूरे मामले को लेकर हेडमास्टर सत्येंद्र कुमार चौधरी ने शेखपुरा जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला अधिकारी को चिट्ठी लिखकर जानमाल की सुरक्षा और सरकारी व्यवस्था को सख़्ती से लागू करने की मांग की है.

अफसरों ने साधी चुप्पी : हेडमास्टर ने बताया कि जब-जब छात्राओं को विद्यालय में बुर्का और हिजाब की जगह स्कूल ड्रेस पहनकर आने के लिए कहा जाता है, तब-तब उनके अभिभावक आकर धमकी देते हैं. 6 अक्टूबर को भी कुछ छात्राओं को बुर्का पहन कर आने से मना किया था. तभी कई अभिभावक व ग्रामीण यहां पहुंचे और कहा कि यह हमारा धार्मिक मामला है, इसे हम लोग नहीं छोड़ेगे और उन्होंने दबाव बनाना शुरू कर दिया. जिसको लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगे गए हैं, जो अब तक नहीं मिले हैं.

जबरन मुस्लिम टीचर भर्ती करवाने की कोशिश : छठ पूजा की छुट्टी के बाद 29 नवंबर को पुनः बुर्का और हिजाब को लेकर कहे जाने पर 70-80 की संख्या में ग्रामीणों ने विद्यालय में आकर हंगामा करना शुरू कर दिया और अभद्र व्यवहार करते हुए गाली गलौज की. कुछ ग्रामीणों की ओर से जान से मारने की धमकी भी दी गई. जिसकी सूचना जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित जिला प्रशासन को दी गई. उन्होंने कहा कि टोला सेवक की बहाली के दौरान भी यह लोग नियम के विरुद्ध तालीमी मरकज की बहाली की मांग कर रहे थे. इन लोगों के द्वारा विरोध किए जाने की वजह से आज तक ना टोला सेवक की बहाली हुई और ना ही कमेटी का गठन किया गया है.

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