देश-विदेश

शीतकालीन सत्र : जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो विधेयक लोकसभा में पारित

नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र का छह दिसंबर को तीसरा दिन है। आज राज्यसभा में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं, लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा होने के आसार हैं। मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ने यह विधेयक पेश किया था।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि कल गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा था कि किसी देश में 1 से अधिक संविधान, 1 से अधिक ध्वज कैसे हो सकते हैं? अगर वे दुनिया भर में देखें तो ऐसे कई देश हैं जहां 1 से अधिक संविधान, 1 से अधिक ध्वज हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका के, 50 राज्यों में हर एक का अपना संविधान और अपना ध्वज है।

इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में उनके पास न केवल अपना संविधान है और अपना ध्वज है, बल्कि प्रत्येक राज्य का अपना प्रधानमंत्री भी है… आप कह सकते हैं कि भारत में हम ऐसा नहीं चाहते। यह ठीक है लेकिन यह मत कहो कि किसी भी देश के पास यह नहीं हो सकता क्योंकि अन्य देशों के पास यह है।

जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2023 पर BJP सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि ये बिल बहुत प्रगतिशील और समय के अनुकूल है। वहां(जम्मू और कश्मीर) पर विस्थापितों, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण दिया गया है… यह बिल काबिल-ए-तारीफ है, जिसे अच्छी नीयत के साथ लाया गया था। इसलिए ये बिल बहुत ही सरलता के साथ पास भी हो गया।

केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 लोकसभा में पेश किया गया है। इस दौरान बिल पर चर्चा की जाएगी और इसे पारित किया जाएगा। इसके साथ ही लोकसभा में जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो विधेयक भी लोकसभा में पारित किए गए हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नाम के साथ सम्मान जुड़ा है, इसे वही लोग देख पाते हैं, जो अपने से पीछे रह गए लोगों की अंगुली पकड़ कर संवेदना के साथ उन्हें आगे बढ़ाना चाहते हैं। वो लोग इसे नहीं समझ सकते, जो इसका उपयोग वोटबैंक के लिए करते हैं। नरेन्द्र मोदी ऐसे नेता हैं, जो गरीब घर में जन्म लेकर देश के प्रधानमंत्री बने हैं, वह पिछड़ों और गरीबों का दर्द जानते हैं।

अमित शाह ने कहा, ‘मैं जो विधेयक (जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन अधिनियम 2023 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2023) लेकर आया हूं वो 70 वर्षों से जिन पर अन्याय हुआ, अपमानित हुए और जिनकी अनदेखी की गई, उनको न्याय दिलाने का विधेयक है।

लोकसभा में जम्मू-कश्मीर से संबंधित दो ऐतिहासिक विधेयकों पर अपनी बात रख रहे हैं। लोकसभा में प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार प्रस्ताव में 58,378.21 करोड़ रुपये का कुल नकदी व्यय शामिल है। अतिरिक्त व्यय में खाद सब्सिडी पर 13,351 करोड़ रुपये का खर्च भी शामिल है।

NewsXpoz Digital

NewsXpoz Digital ...सच के साथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *