कारोबार

शेयर बाजार धड़ाम; सेंसेक्स 1053 अंक टूटा, निफ्टी 21250 से नीचे

नई दिल्ली : घरेलू शेयर बाजार में मंथली एक्सपायरी और बजट से पहले मंगलवार को बड़ी मुनाफावसूली दिखी और बेंचमार्क इंडेक्स धड़ाम हो गए। सेंसेक्स और निफ्टी मंगलवार की सुबह मजबूत शुरुआत बावजूद गिरकर लाल निशान पर बंद हुए। मंगलवार को सेंसेक्स 1,053.10 अंकों यानी 1.47% की गिरावट के साथ 70,370.55 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, निफ्टी 333.00 अंक या 1.54% टूटकर 21,238.80 के स्तर पर बंद हुआ।

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार बंद होने के दौरान सेंसेक्स के 30 शेयरों का हाल : मंगलवार के कारोबारी सेशन के दौरान बाजार में बैंकिंग, मेटल, रियल्टी और मीडिया सेक्टर में जमकर बिकवाली देखी गई। एकमात्र फार्मा सेक्टर के शेयरों में खरीदारी दिखी पर इससे बाजार मजबूती हासिल नहीं कर पाया और आखिरकार लाल निशान पर ही बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार की गिरावट के दौरान निवेशकों को करीब आठ लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

निफ्टी के टॉप गेनर्स और टॉप लूजर्स शेयर ये रहे : भारतीय शेयर बाजार के हॉन्गकॉन्ग को पछाड़कर दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार बनने के ठीक बाद बाजार में यह बड़ी बिकवाली आई। इस दौरान शेयर बाजार के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 3% तक फिसले। मंगलवार के कारोबारी सेशन के दौरान दलाल स्ट्रीट के निवेशकों को बाजार पूंजीकरण के रूप में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के शेयर गिरकर 366.3 लाख करोड़ रुपये पर आ गए।

शेयर बाजार में गिरावट के पांच बड़े कारण ये रहे : वैश्विक बाजारों में मजबूती के बावजूद बैंकों, तेल व गैस, एफएमसीजी और मेटल सेक्टर के शेयरों में बिकवाली से बाजार से धड़ाम हो गया। केवल फार्मा सेक्टर के शेयरों में खरीदारी दिखी। केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट ही निफ्टी में आई पूरी गिरावट में  लगभग आधे के लिए जिम्मेदार रही।

1. बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में कमजोरी : शेयर बाजार में मंगलवार को आए नुकसान के लगभग एक तिहाई के लिए अकेले हैवीवेट काउंटर एचडीएफसी बैंक जिम्मेदार रहा। एचडीएफसी बैंक के शेयर एक बार फिर 3% तक गिर गए क्योंकि निवेशकों ने दिसंबर तिमाही के परिणामों के बाद आई गिरावट के दौरान खरीदने का उत्साह नहीं दिखाया। एचडीएफसी बैंक के अलावा बैंकिंग सेक्टर के अन्य शेयरों में भी गिरावट दिखी। निफ्टी बैंक दो प्रतिशत तक फिसल गया। इस दौरान आईडीएफसी बैंक के शेयरों में 6.5% की गिरावट आई। इंडसइंड बैंक, पीएनबी, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और एसबीआई के शेयर भी कमजोर हुए। इससे बाजार को खासा नुकसान उठाना पड़ा।

2. रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में कमजोरी : मंगलवार को शेयर बाजार में गिरावट का बड़ा कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में में आई कमजोरी रही। शेयर बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनी के शेयर दो प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए और बाजार की गिरावट के लिए बैंकिंग शेयरों में कमजोरी के बाद दूसरा कारण बने। कंपनी के तिमाही नतीते काफी हद तक उम्मीद के अनुसार रहे हैं। रिलांयस के अलावे ऑयल व गैस सेक्टर के अन्य शेयरों में भी कमजोरी दिखी। आईओसी, एचपीसीएल, अदाणी टोटल गैस, ऑयल इंडिया, ओएनजीसी और बीपीसीएल के शेयरों में 4-6% की गिरावट आई।

3. स्वामित्व मानदंडों पर सेबी का रुख : बाजार नियामक सेबी विदेशी निवेशकों के लिए नए और कड़े नियम लागू कर सकता है। हालांकि विदेशी बैंकों और ऑफशोर फंड मैनेजरों के एक वर्ग ने नियमों में ढील बनाए रखने की अपील की थी। अनुमानों के मुताबिक, नए नियमों का पालन करने में असमर्थ फंड्स की ओर से अगले छह महीनों में 1.5 लाख करोड़ रुपये से 2 लाख करोड़ रुपये तक की बिकवाली की जा सकती है।

4. एफआईआई की ओर से हो रही बिकवाली : पिछले दो महीनों में खरीदारी के बाद एफआईआई इस महीने में अब तक 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के भारतीय शेयरों शेयरों की बिकवाली कर चुका है। म्युचुअल फंडों की अगुवाई में घरेलू संस्थान बिकवाली को थामने की कोशिश में जुटे हैं। हालांकि इस महीने एफआईआई की ओर से अब तक हुई बिकवाली शेयर बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण रहा है।

5. खुदरा निवेशकों की मुनाफावसूली : खुदरा निवेशकों की ओर से मूल्यांकन पर ज्यादा विचार किए बिना शेयरों की खरीदारी को देखते हुए विश्लेषक लंबे समय से कई सेक्टर के शेयरों के ओवरबॉट जोन में जाने की चेतावनी दे रहे हैं। पिछले 3 महीनों में, निफ्टी लगभग 9% ऊपर है, जबकि मिड और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 17% तक चढ़ चुके हैं। यही कारण है कि निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली दिख रही है जिससे बाजार में नकारात्मक माहौल बना।

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