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श्री राम मंदिर : कोर्ट में दिन भर ध्वज दंड पकड़े बैठा रहा काला बंदर  

अयोध्या धाम-NewsXpoz : आज प्रभु राम के जन्मस्थान का अदालती आदेश से ताला खुलने और एक बंदर से जुड़ा रोचक किस्सा, जिसे संबंधित न्यायाधीश ने अपनी किताब में भी लिखा है। साथ ही ताला खोलने का आदेश देने वाले फैजाबाद जिला न्यायालय के तत्कालीन जिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम पांडेय की, जिनकी तरक्की की राह में रोड़े अटकाए गए।

साल  था 1985। सचिवालय में न्याय विभाग में न्यायिक सेवा के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम पांडेय की नियुक्ति हुई। कुछ ही दिन बाद उन्हें फैजाबाद का जिला जज बना दिया गया। वह एक दिन राम जन्मभूमि आए। दर्शन किए और वहां मौजूद एक पुजारी से पूछा कि इस मामले का निर्णय क्यों नहीं हो पा रहा है? पुजारी न्यायाधीश को पहचानता तो था नहीं, बोला-महोदय किसी ऐसे जज ने अभी तक जन्म नहीं लिया, जो इस मुकदमे का फैसला कर दे। इसी के बाद न्यायाधीश ने ताला खोलने का फैसला दिया।

सभी लोगों ने माना दैवीय चमत्कार : अब ताला खोलने के फैसले और उस रहस्यमय बंदर की कहानी। यह संयोग था या कोई दैवयोग, इसका फैसला सबके विवेक पर। घटना कुछ ऐसा हुआ था कि जिस दिन ताला खोलने का फैसला आया, उस दिन एक काला बंदर अदालत की छत पर लगे तिरंगा ध्वज का दंड पकड़े सुबह से शाम तक बैठा रहा। उस दिन अदालत में काफी भीड़ थी।

स्वाभाविक रूप से लोग ताला खोलने को लेकर दायर अपील पर फैसला सुनने आए थे। इन लोगों ने बंदर को मूंगफली दी। फल दिए। पर, उसने हाथ तक नहीं लगाया। जस्टिस पांडेय ने शाम को फैसला सुनाया। फैसला होते ही वह वहां से चला गया।

फैसले के बाद जस्टिस पांडेय वापस बंगले पर लौटे। उनके साथ तत्कालीन जिलाधिकारी  और एसएसपी भी थे। जस्टिस पांडेय ने देखा कि वह बंदर उनके बंगले के बरामदे में भी मौजूद है। उन्हें बंगले पर सुरक्षित पहुंचाने आए जिलाधिकारी और एसएसपी ने भी यह दृश्य देखा। सभी ने इसे दैवीय चमत्कार माना और उसके हाथ जोड़े।

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