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सावधान! लोन-ऐप से कर्ज लेना खतरनाक… बन सकता है ‘मौत-का-लोन’ ?

धनबाद-NewsXpoz (राजीव सिन्हा 8340201239) : इस आधुनिक युग में रुपये की जरूरत हर इंसान को है। जीवन में अनेकों प्रकार की जरूरतों को पूरा करने के लिए रुपया ही मुख्य साधन है। दुसरे शब्दों में हम यह भी कह सकते है कि इंसान धरती पर रूपये कमाने की मकसद से पैदा हुआ है! लेकिन यह पूरा सच नहीं है… कई लोगों के विचार इससे अलग भी है। इन रुपयों (Maut-Ka-Loan) की जरूरत को पूरा करने के लिए सभी इंसान अलग-अलग के माध्यम और तरीके अपनाते हैं।

लेकिन दुनिया में कई लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जिंदगी में कर्ज (Maut-Ka-Loan) भी लेने को मजबूर होते हैं। आज के इंटरनेट युग में लोगों की इसी जरूरत को कई कंपनी तथा अपराधियों ने अपना व्यवसाय बना लिया है। और इसी व्यवसाय को हथियार बनाकर भारत के पडोशी दुश्मन देश ने साइबर अपराधियों का नेटवर्क खड़ा कर चूका है। जो तुरंत लोन देने वाले ऐप्स के ज़रिए लोगों को जाल में फँसाने का घिनौना और जानलेवा धंधा चला रहे है।

इसे आम बोलचाल की भाषा में  ‘चाइनीज लोन’ ऐप (Maut-Ka-Loan) भी कहते हैं। इसका जाल फैलता ही जा रहा है, जिसमें फंसकर लोग आत्महत्या तक कर रहे हैं। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चाइनीज लोन ऐप्स कंपनियां वसूली के लिए अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर को बतौर एजेंट्स हायर कर रही हैं। यही नहीं, ये एआई के जरिए कर्ज (Maut-Ka-Loan) लेने वाले की न्यूड फोटो बनाते हैं और सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते हैं और ब्लैकमेलिंग शुरू करते हैं।


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कई ऐप्स मिनटों में आसान लोन देने का दावा करते हैं। हालांकि सभी हानिकारक नहीं हैं, उनमें से बहुत सारे, एक बार इंस्टॉल हो जाने पर, आपको अपना नाम, पता, संपर्क, फोटो, आईडी कार्ड और बैंक विवरण जैसी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं। परिणामों के बारे में सोचे बिना उनके जाल में फंसने से, घोटालेबाज बाद में इस जानकारी का उपयोग करके आपसे जबरन वसूली कर सकते हैं।

वे नकली तत्काल ऋण ऐप (Maut-Ka-Loan) बनाते हैं, सावधानीपूर्वक छिपाते हैं और ऐप स्टोर, सोशल मीडिया या तृतीय-पक्ष वेबसाइटों पर आक्रामक रूप से प्रचारित करते हैं। वे सरल पुनर्भुगतान विकल्पों के साथ बड़े ऋण के वादे के साथ लोगों को आकर्षित करते हैं।

लोन ऐप के जरिए फ्रॉड कैसे होता है? :

  • पीड़ित अपने फोन में लोन ऐप डाउनलोड करता है। इंस्टॉलेशन के दौरान ऐप यूजर से फोन का डेटा जैसे SMS, फोटोज, स्टोरेज एक्सेस करने की इजाजत मांगती है।
  • लोन अप्लाई करने के बाद बताई गई रकम का 60-70% अकाउंट में आ जाता है। बाकी प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर काट लिया जाता है।
  • वह लोन ऐप यूजर के फोन मे मालवेयर इंस्टॉल कर देती है। इसके बाद फोन हैक हो जाता है। आपके फोन में मौजूद हर डेटा हैकर्स के पास पहुंचता है।
  • फिर ब्‍लैकमेलिंग और री-पेमेंट के लिए कॉल्‍स का सिलसिला शुरू होता है। ब्याज ज्यादा मांगा जाने लगता है, हिडन चार्ज बताए जाते हैं।
  • गैंग यूजर के कॉन्टैक्ट्स को टारगेट करता है। उन्हें परेशान करके पीड़ित को मजबूर किया जाता है। कई बार लोन चुकाने के बाद भी यह जारी रहता है।
  • महिलाओं को सोशल मीडिया पर मौजूद उनकी तस्वीरों से छेड़छाड़ करके परेशान किया जाता है। ये तस्‍वीरें दोस्तों, सहकर्मियों और फैमिली मेंबर्स को भेजी जाती हैं। जब तक मांगी गई रकम चुका न दी जाए, ये सब चलता रहता है।

इन सभी इंस्टैंट लोन ऐप (Maut-Ka-Loan) की खास बात यह थी कि जैसे ही कोई ऐप इन्स्टॉल करता, उसका सारा डेटा क्लाउड पर सेव हो जाता. केवाइसी के नाम पर पीड़ित से उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो सहित पहचान से जुड़े तमाम दस्तावेज मांगे जाते हैं। ये दस्तावेज बाद में रेजरपे जैसे पेमेंट गेटवे पर नए फर्जी वर्चुअल अकाउंट बनाने में काम लिए जाते हैं।

वर्चुअल कॉल के लिए आईडी बनाई जाती है। पीड़ितों को कॉल करने के लिए एसटीआइ और ऐनक्स जैसे ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल होता है। इन ऐप्लिकेशन की मदद से वर्चुअल नंबर से व्हाट्सऐप कॉल की जाती है। धमकी भरे मैसेज भेजे जाते हैं। इन नंबर पर अगर कोई कॉल बैक करने की कोशिश करता तो वह नहीं लगता है। अगर कोई कॉल (Maut-Ka-Loan) के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले इंटरनेट कनेक्शन का आईपी एड्रेस खंगालता तो यह किसी दूसरे देश का आईपी एड्रेस दिखाता ही. इस तरह से ये लोग लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बचते रहते हैं।

एक बार केवाईसी होने के बाद पीड़ित के बैंक अकाउंट में पैसे डाल दिए जाते हैं। इसमें जीएसटी, ब्याज और फाइल चार्ज के नाम पर कर्ज (Maut-Ka-Loan) में दी जाने वाली रकम से दोगुना पैसा वसूला जाता है। उदाहरण के तौर पर, 2700 रुपए का लोन लेने वाले पीड़ित को सात दिन के भीतर 5000 से ज्यादा की रकम चुकानी होती है। लोन सात दिन के लिए दिया जाता है। लेकिन पांचवें दिन से पीड़ित को कॉल जानी शुरू हो जाती है।

ज्यादातर केस में लोग इतना पैसा (Maut-Ka-Loan) नहीं चुका पाते हैं। ऐसी स्थिति में पहले उस शख्स को ब्लैकमेल किया जाता है। उसे धमकी भरे फोन किए जाते है। उसकी फोन गैलरी से किसी महिला रिश्तेदार या उसकी खुद की तस्वीर को फोटोशॉप करके उसे ब्लैकमेल किया जाता है। अगर वह फिर भी पैसे नहीं देता तो दूसरे फेज में उसकी अश्लील फोटो और लोन की डिटेल उसके करीबी लोगों के पास भेजा जाता है। पीड़ित शख्स के घर वालों और रिश्तेदारों को गालियां देना, उन्हें धमकाना आम हथकंडा है। फिर भी अगर कोई पैसा न दे तो पीड़ित के बारे में अपमानजनक बातें लिखकर उसके कॉन्टैक्ट लिस्ट के हर नंबर पर भेजना शुरू कर दिया जाता है।

अगर कोई पीड़ित समय पर पैसा लौटा दे तो भी ये लोग उसका पीछा नहीं छोड़ते हैं। समय पर पैसा लौटा देने वाले शख्स के बैंक अकाउंट में बिना उसे बताए पैसा ट्रांसफर कर दिया जाता और फिर शोषण का नया चक्र शुरू होता है।  यह सारा काम अवैध रूप से चीनी अपराधियों द्वारा ऑपरेट करने की बात विभिन्न जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है। भारत में अब तक लोन कंपनियों की वसूली की वजह से ज्यादातर लोगों ने आत्महत्या कर ली है। अधिकांश पीड़ित इस स्कैम के बारे में बात करने में बहुत शर्म महसूस करते हैं। इस प्रकार अपराधी काफी हद तक गुमनाम और छिपे हुए हैं।

  1. AI का कर रहे इस्तेमाल : चाइनीज लोन कंपनियां वसूली करने के लिए अपने यहां सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को हायर कर रही हैं। जिनसे फिर वो लोगों की न्यूड फोटो और वीडियो बनवाते हैं। इस काम को करने में AI इनकी मदद करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से लोगों की वीडियो और फोटो बनाना काफी आसान हो जाता है। इसके बाद लोन एप कंपनियां लोगों के रिश्तेदारों, दोस्तों, ऑफिस हर जगह ये फोटो भेजते हैं। साथ ही लोन लेने वाले व्यक्ति को भी ब्लैकमेल करते हैं, कि अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए तो वो उनकी न्यूड फोटो किसी के साथ जोड़कर उन्हें बदनाम करेंगे।
  2. इससे भी काम नहीं बना तो देते हैं गालियां : लोन (Maut-Ka-Loan) देने वाले ऐप उगाही के लिए थर्ड पार्टी कॉल सेंटर का सहारा लेते हैं। बीबीसी इन्वेस्टिगेशन की हाल ही कि एक डाक्यूमेंट्री में कॉल सेंटर के अंदर की हकीकत को भी बेहद बारीकी से दिखाया गया है। इसके लिए कॉल सेंटर में काम कर चुके एक शख्स को अंडरकवर भेजा गया। करीब डेढ़ महीने तक उसने दो कॉल सेंटर्स में काम किया। इस दौरान वहां चल रही हलचल को रिकॉर्ड किया। पड़ताल में सामने आया कि कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग पहले तो प्यार से बात करते हैं। लेकिन ऐसा दो से तीन बार ही होता है। उसके बाद ये लोग गाली-गलौज पर उतर आते हैं। बीबीसी की पड़ताल के मुताबिक, कॉल सेंटर वाले यहां तक कहते हैं कि अगर लोन नहीं चुका सकते तो अपनी बहन को बेच दो.. घर बेच दो.. जमीन बेच दो।
  3. गूगल ने 17 ऐसे लोन ऐप को हटाया है : टेक जॉयन्ट गूगल ने प्ले स्टोर से लोन देने वाले 17 ऐप्स को हटा दिया है। ये ऐप यूजर्स के साथ फ्रॉड कर रहे थे। इनमें स्पॉय मेलवेयर पाया गया है। साइबर सिक्योरिटी फर्म ESET की एक रिसर्च रिपोर्ट में पता चला कि धोखाधड़ी करने वाली कई इंस्टेंट लोन ऐप एंड्रॉयड यूजर्स को टारगेट कर रहे हैं। रिपोर्ट में 18 ऐप की पहचान की गई थी, इनमें से गूगल ने 17 ऐप हटा दिए हैं। जबकि एक ऐप के डेवलपर्स ने अपनी पॉलिसी को गूगल के नार्म्स के अनुसार बदल दिया है। इस कारण उसे प्ले स्टोर से नहीं हटाया गया है।
  4. अभी एक्टिव हैं फर्जी लोन ऐप : गूगल के एक्शन से पहले ये ऐप 1.20 करोड़ बार डाउनलोड किए जा चुके थे। ऐप अब थर्ड पार्टी सोर्स जैसे- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और SMS के जरिए टेक्स्ट मैसेज भेजकर लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। भारत के अलावा मैक्सिको, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, कोलंबिया, पेरू, फिलीपींस, मिस्र, केन्या, नाइजीरिया और सिंगापुर में भी ये ऐप ऑपरेट किए जाते हैं
  5. लोन के नाम पर पर्सनल डेटा हासिल करते हैं : एक रिपोर्ट में पता चला कि इंस्टेंट लोन देने के नाम पर ये ऐप कई तरह की परमिशन जैसे- कॉल लॉग्स, स्टोरेज, मीडिया फाइल्स, कॉन्टेक्ट लिस्ट और लोकेशन डेटा को बायपास करते हैं। इसके अलावा यूजर्स का पर्सनल डेटा हासिल करने के लिए एड्रेस, बैंक अकाउंट और फोटो जैसी डिटेल भी शेयर करने को कहते हैं।
  6. लोगों को जान से मारने की धमकी भी देते हैं : जिन ऐप्स को बंद किया गया है वे प्ले-स्टोर की पॉलिसी को चकमा दे रहे थे। इन ऐप से लोगों को तुरंत लोन मिलता है, लेकिन इसके लिए काफी ब्याज वसूला जाता है और लोन चुकाने के लिए टाइम भी कम दिया जाता है। यूजर की सारी डिटेल्स मिलने के बाद ऐप लोन चुकाने के लिए ब्लैकमेल करना शुरू कर देते हैं। ये लोग लोन ऐप्स के जरिए लोगों को जान से मारने की धमकी भी देते हैं। इतना ही नहीं यूजर द्वारा लोन के लिए अप्लाई नहीं करने या लोन सेंक्शन नहीं होने के बाद भी ऐप के जरिए मिली जानकारी को आधार बनाकर ये ऐप लोन चुकाने के लिए ब्लैकमेल करते हैं।

RBI ने लोन कंपनियों को चेताया : भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि लोन देने वाली किसी लिस्टेड वेबसाइट या उसके ऐप पर जाते हैं, तब यह जरूर देखें कि वो RBI से रजिस्टर्ड है या फिर RBI से रजिस्टर्ड किसी बैंक या NBFC के साथ काम कर रहा है। लोन देने वाली सभी कंपनियों को अपनी कंपनी पहचान संख्या (CIN) और सर्टिफिकेट ऑफ़ रजिस्ट्रेशन (COR) को साफ़ तौर पर दिखाना होगा।

अपनों को भरोसे में लेना है उपाय : साइबर सेल के एक अधिकारी का कहना है कि यदि साइबर ठगों के झांसे में आ जाएं तो भयभीत होने की जरूरत नहीं हैं। अपने परिचितों और रिश्तेदारों को इसकी जानकारी देकर उनका भरोसा हासिल करें। साइबर ठग 10-20 परिचितों रिश्तेदारों को धमकी देंगे, उनके दबाव में न आएं।

वह अश्लील-फोटो वीडियो डालेंगे, उनको इग्नोर कर दें। दो-तीन दिन में सब शांत हो जाएगा। जहां से उनको रुपया नहीं मिलता, वह अगले शिकार पर लग जाते हैं। यदि रुपया देना शुरू कर दिया, तो वह पीछा नहीं छोड़ते। किसी के झांसे में न आएं। ऋण लेने या अन्य किसी लालच में आकर अनजान ऐप डाउनलोड न करें। यदि किसी झांसे में फंस जाते हैं, तो तत्काल पुलिस को सूचना दें।

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