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New Year 2024 : नयी ऊर्जा के साथ बुलंद इरादे…

धनबाद-NewsXpoz (राजीव सिन्हा 9135421800) : नया साल 2024 (New-Year-2024) द्वार पर है। इस नए साल का सभी को स्वागत करना है। सकारात्मक रहते हुए हमें हर उस चुनौती का सामना करना है जिसका अंदेशा हमारे सामने है। यह वर्ष आप सभी के जीवन में मंगल, आरोग्य और शांति लाए ऐसी ही कामना है। नववर्ष 2024 (New-Year-2024) सभी को शुभ हो। फिर से मुस्कुराता हुआ नया-नकोर कैलेंडर आपका स्वागत करने को आतुर है। दीवार पर सजे या मोबाइल-लैपटॉप पर सजे इस कैलेंडर में तारीखें वही होंगी, बदलना आपको अपने इरादों को है। अगर इरादे पहले से पक्के हैं तो उन्हें नए कैलेंडर में भी बस कॉपी पेस्ट करना है।


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बीते दिन हर एक के लिए कठिन थे, हो सकता है आगे और भी कठिन दिन आये लेकिन सोच अगर सकारात्मक होगी तो वे कठिनाइयां मुश्किल नहीं लगेंगी। ठीक जैसे सूरज रोज हमें रौशनी देने के इरादे से ही अपनी किरणों का उजाला फैलाता है। किसी दिन बादल आ भी जाएं तो भी सूरज फिर निकलता है, उसी ऊर्जा के साथ, उन्ही इरादों को संग लिए। बस तो आप भी बांध लीजिये दिल में हौसलों और पक्के इरादों की पुड़िया, जो जब भी खुले आपके लिए जादुई असर कर डाले। इस जादू पर यकीन के साथ कीजिए नए साल का स्वागत।

महामारी से बचना जरूरी : 2024 (New-Year-2024) के आगमन के साथ ही देशवासियों को कोरोना महामारी से बचके रहना पड़ेगा। कर्नाटक और केरल में कोरोना का JN.1-वैरिएंट तबाही मचा रहा है। यहां तक की दिल्ली और महाराष्ट्र में भी इस वैरिएंट ने दस्तक दे दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में कुल एक्टिव केसों की संख्या बढ़कर 4,170 हो चुकी है। कर्नाटक से 34 मामले, महाराष्ट्र से 9, गोवा से 14, केरल से 6, तमिलनाडु से 4 और तेलंगाना से 2 मामले सामने आए।

नव वर्ष या नया साल (New-Year-2024) एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है।

पश्चिमी नव वर्ष : नव वर्ष उत्सव (New-Year-2024) 4 हजार वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी नव वर्ष उत्सव के लिए चुनी गई थी। रोम के शासक जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45 वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष, यानि, ईसापूर्व 46 ईस्वी को 445 दिनों का करना पड़ा था।

हिब्रू नव वर्ष : हिब्रू मान्यताओं के अनुसार भगवान द्वारा विश्व को बनाने में सात दिन लगे थे। इस सात दिन के संधान के बाद नया वर्ष (New-Year-2024) मनाया जाता है। यह दिन ग्रेगरी के कैलेंडर के मुताबिक 5 सितम्बर से 5 अक्टूबर के बीच आता है।

हिन्दू नव वर्ष : महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के दिन छत पर गुड़ी लगाने की परम्परा है। हिंदुओं का नव वर्ष (New-Year-2024) चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन अर्थात् वर्ष प्रतिपदा एवं गुड़ी पड़वा पर प्रत्येक वर्ष विक्रम संवत के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होता है।

  1. भारतीय नव वर्ष : भारत के विभिन्न भागों में नव वर्ष दो-तीन प्रमुख तिथियों को मनाया जाता है। प्रायः पहली दो तिथियाँ मार्च और अप्रैल के महीने में पड़ती है।
  2. पहली तिथि : मेष संक्रान्ति अथवा वैशाख संक्रान्ति (बैसाखी) अथवा विषुव/विषुवत संक्रान्ति (बिखौती) अथवा सौरमण युगादि भी कहते हैं। इस तिथि को मुख्य रूप से सौरमण वर्ष पद मानने वाले प्रान्त नये वर्ष के रूप से मनाते हैं, जैसे : तमिलनाडु और केरल। इसके अतिरिक्त बंगाल और नेपाल भी इसे नव वर्ष के रूप में मनाते है।
  3. हिमालयी प्रान्तों जैसे : उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू के साथ साथ पंजाब, पूर्वांचल और बिहार में केवल एक पर्व के रूप मनाया जाता है पर नव वर्ष (New-Year-2024) के रूप में नहीं। उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू, पंजाब, पूर्वांचल और बिहार में नव सम्वतसर वर्ष प्रतिपदा के दिन आरम्भ होता है। सिखों के द्वारा नवनिर्मित नानकशाही कैलेंडर के अनुसार सिख नव वर्ष चैत्र संक्रांति को मनाया जाता है।
  4. दूसरी तिथि : वर्ष प्रतिपदा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) अथवा चन्द्रमण युगादि। इस तिथि को मुख्य रूप से चन्द्रमण वर्ष पद मानने वाले प्रान्त नये वर्ष (New-Year-2024) के रूप से मनाते हैं। कर्नाटक एवं तेलुगू राज्य- तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश में इसे उगादी (युगादि=युग+आदि का अपभ्रंश) के रूप में मनाते हैं। यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है।
  5. कश्मीरी नववर्ष भी इसी दिन होता है और उसे नवरेह के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में यही दिन मनाया जाता है। और सिन्धी इसी दिन को चेटी चंड कहते हैं। सिंधी उत्सव चेटीचंड, उगाड़ी और गुड़ी पड़वा एक ही दिन मनाया जाता है। मदुरै में चित्रैय महीने में चित्रैय तिरूविजा नए वर्ष (New-Year-2024) के रूप में मनाया जाता है।
  6. तीसरी तिथि : बलि प्रतिपदा (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)। यह दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है। दीपावली पर सब हिन्दू महालक्ष्मी पूजा कर एक वर्ष के लेखे जोखे को बंद कर देते हैं। अगले दिन से नये आर्थिक/वाणिज्यिक वर्ष का आरम्भ होता है। व्यापारी वर्ग प्रधान प्रान्तों यह दिन मुख्य रूप से नव वर्ष के रूप में मनाते हैं । मारवाड़ी नया बरस दीपावली के अगले दिन होता है। गुजराती नया बरस भी दीपावली के अगले दिन होता है। इस दिन जैन धर्म का नववर्ष (New-Year-2024) भी होता है।
  7. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व : इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की। सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। उन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत का पहला दिन प्रारंभ होता है। प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है। शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्र का पहला दिन यही है।
  8. सिखो के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस है। स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृण्वंतो विश्वमआर्यम का संदेश दिया। सिंध प्रांत के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए। राजा विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों और शकों को पराजित कर भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। शक संवत की स्थापना की। युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ।
  9. भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व : वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंध से भरी होती है। फसल पकने का प्रारंभ यानी किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है। नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए यह शुभ मुहूर्त होता है।

भारतीय नववर्ष कैसे मनाये : हम परस्पर एक दूसरे को नववर्ष (New-Year-2024) की शुभकामनाएं दें। पत्रक बांटे, झंडे, बैनर….आदि लगावे। अपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें। इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फेहराएँ।

अपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की बंदनवार से सजाएँ। घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ। इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें। प्रतिष्ठानों की सज्जा एवं प्रतियोगिता करें। झंडी और फरियों से सज्जा करें। इस दिन के महत्वपूर्ण देवताओं, महापुरुषों से सम्बंधित प्रश्न मंच के आयोजन करें। वाहन रैली, कलश यात्रा, विशाल शोभा यात्राएं कवि सम्मेलन, भजन संध्या , महाआरती आदि का आयोजन करें। चिकित्सालय, गौशाला में सेवा, रक्तदान जैसे कार्यक्रम।

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