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RRTS के लिए नहीं दिया फंड तो विज्ञापन का पैसा प्रोजेक्ट में करेंगे ट्रांसफर

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को बड़ा झटका दिया है. RRTS प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार की लापरवाही पर SC ने नराजगी जाहिर की है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि अगर RRTS को उसके हिस्से का पैसा नहीं दिया गया तो दिल्ली सरकार के विज्ञापन फंड से इसकी भरपाई की जाएगी.

शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि अगर आपके पास विज्ञापनों के लिए पैसा है, तो आपके पास RRTS परियोजना के लिए पैसा क्यों नहीं है? आपको बता दें कि दिल्ली सरकार के चालू वित्तीय वर्ष में विज्ञापन बजट 550 करोड़ रुपये है और पिछले तीन वित्तीय वर्षों में केजरीवाल सरकार ने विज्ञापनों पर करीब 1,100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं.

दिल्ली सरकार ने RRTS परियोजना के लिए धन देने में असमर्थता जताई थी. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार से पिछले तीन वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों के लिए खर्चों का हिसाब मांगा था. इसके लिए हलपनामा दायर करने के का आदेश दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने अपने वादे का उल्लंघन किया है. कोर्ट की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी. इसी साल जुलाई में, दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया था कि 415 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान दो महीने के भीतर किया जाएगा.

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रैपिड रेल परियोजना ‘प्रदूषण कम करने की प्रक्रिया का हिस्सा’ है और इसका लोगों पर काफी असर भी पड़ता है. इसमें कहा गया कि विज्ञापन के लिए दिल्ली सरकार के बजट को रैपिड रेल परियोजना में लगाना चाहिए.

NCRTC द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि हम विज्ञापन बजट पर रोक लगाएंगे और इसे RRTS परियोजना के लिए यहां ले जाएंगे. अपनी याचिका में NCRTC ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पैसा न देकर सुप्रीम कोर्ट को पहले दिए गए अपने वादे को तोड़ा है.

मामले की सुनावाई न्यायमूर्ति एस.के.कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ कर रही थी. पीठ ने एक हफ्ते के भीतर RRTS को उसके हिस्से का फंड देने की हिदायत दी है. SC ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि अगर फंड की व्यवस्था करने में विफल रहते हैं तो दिल्ली सरकार के विज्ञापन फंड इसकी ‘वसूली’ की जाएगी. (इनपुट-एजेंसी)

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Posted & Updated by : Rajeev Sinha 

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