Xpoz-स्पेशलधनबाद-झारखंडबिहार-बंगाल एवं ओडिशा

SNMMCH : अस्पताल में ‘हंटर-कुत्तों’ का कब्जा…! इन्हें है ‘गरम-खून’ की लत

धनबाद-NewsXpoz (अमन्य सुरेश  8340184438) : अगर आप धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SNMMCH) में इलाज कराने या मरीज से मिलने जा रहे हैं…, तो सावधान हो जाए तथा सतर्क रहें। क्यूंकि अस्पताल परिसर और विभिन्न वार्ड में ‘हंटर-कुत्ते’ (Hunter-Dogs) बेख़ौफ़ घूम रहे हैं ! वह आपको या छोटे बच्चों को अपना शिकार बना सकते है। यह कहना है अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों का। क्योंकि मेडिकल वेस्ट तथा ‘गरम-खून’ से सनी कॉटन-बैंडेज का जहां-तहां खुले में फेंकने से परिसर में घूम रहे दर्जनों आवारा कुत्ते उसका सेवन करने के आदी हो चुके हैं। इसी कारण आवारा कुत्ते अस्पताल के वार्ड में मरीजों व बच्चों पर भी हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं।


NewsXpoz पर ताजा खबर देखें-पढ़ें और सुने…

नवजात शिशुओं पर बढ़ा खतरा : आवारा कुत्तों (Hunter-Dogs) से नवजात शिशुओं को भी खतरा बना रहता है। क्योंकि कुत्ते ज्यादातर बच्चों व नवजातों को अपना निशाना बनाते है। इसे देखते हुए शिशुओं को कुत्तों से बचाने की जरूरत है। अस्पताल में काफी लंबे समय से आवारा कुत्तों (Hunter-Dogs) का विभिन्न वार्ड में बेख़ौफ़ आवाजाही है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। अस्पताल में होमगार्ड जवानों की तैनाती है। इनकी ड्यूटी भी 24 घंटे रहती है। यह सुरक्षा कर्मी भी आवारा कुत्तों को वार्ड में घुसने से नहीं रोक पा रहे हैं।

Dog-Hunter
Dog-Hunter

NewsXpoz Digital  की टीम ने जब अस्पताल का जायजा लिया तो देखा कि अस्पताल के कुछ वार्ड में आवारा कुत्ते (Hunter-Dogs) घूम रहे हैं। प्रसूति वार्ड में बेड पर महिलाएं अपने नवजात के साथ भर्ती थी। वहीं वार्ड के आसपास कुत्ते की मौजूदगी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को बयां कर रही थी। थोड़ी सी लापरवाही होने पर यह आवारा कुत्ते नवजात शिशुओं पर झपट्टा मार सकते हैं। जिससे बड़ी घटना हो सकती है।मरीज पहले गंदगी, बदबू से ही परेशान रहते थे। परन्तु अब कुत्तों के काटने का डर भी मरीज व उनके परिजनों में बना हुआ है। वार्ड में कुत्ते बेख़ौफ़ घूम रहे हैं, लेकिन उन्हें भगाने वाला कोई नहीं। अस्पताल के वार्ड में इन दिनों कुत्ते कभी बेड के ऊपर, तो कभी बेड के नीचे और शौचालय में भी अपना बसेरा बना चुके हैं। अस्पताल के विभिन्न वार्ड में शाम ढलते ही मरीज के बेड तथा शौचालय में आवारा कुत्तों (Hunter-Dogs) का आना-जाना शुरू हो जाता है। कुत्तों के काटने के डर से मरीज या उनके परिजन उन्हें भगाने की भी हिम्मत नहीं दिखा पाते हैं। परिजन को रात भर जाग कर मरीजों की सुरक्षा करनी पड़ती है। वही इन दिनों ठंड की वजह से कई बार कुत्ते बेड पर सोए मरीजों के बिस्तर में भी घुस जाते हैं।

  1. हरेक साल लगभग 20 हजार की होती है मौत : देशभर में खुलेआम घूम रहे कुत्ते गंभीर जन स्वास्थ्य संकट बन गए हैं। ये हर साल लाखों लोगों पर हमले कर रहे हैं और चिंताजनक रफ्तार से देश के नागरिकों को मार रहे हैं। वे वन्यजीवों को तबाह करते हैं, सड़क हादसों का कारण (बीमा आंकड़ों के मुताबिक, सड़क हादसों की दूसरी सबसे बड़ी वजह कुत्ते हैं) बनते हैं और भारत को दुनिया का रेबीज कैपिटल बनाते हैं। पिछले कुछ समय से अलग-अलग जगह से लगातार कुत्तों द्वारा काटने (Hunter-Dogs) और उससे मौत के कई मामले सामने आ रहे हैं। इन्हें लेकर लोगों में दहशत का माहौल है। आंकड़े बताते हैं कि कुत्ते के काटने और रेबीज होने से देश में हर साल करीब 20 हजार लोगों की मौत होती है। इनमें स्ट्रीट डॉग्स के काटने के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।
  2. रेबीज फैलने पर हो सकते हैं दुष्परिणाम : कई बार देखने में आता है कि कुत्ते के काटने (Hunter-Dogs) पर व्यक्ति उसे हल्के में लेता है और जहां घाव होता है, वहां चूना या अन्य इलाज अपनाता है, लेकिन यह काफी नहीं है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि रेबीज फैल जाता है तो यह व्यक्ति के लिए काफी घातक सिद्ध हो सकता है। व्यक्ति पागलों जैसी हरकत करने लगता है। वह पानी से भी डरने लगता है। इसके अलावा कई तरह की बीमारियां भी उसे घेर सकती हैं। यदि समय रहते उपचार नहीं मिले तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।
  3. कुत्ता काटने पर यह करें : इसके लिए सबसे पहले कुत्तों से उचित दूरी बनाकर रखें। खास कर बच्चों को कुत्तों से दूर रखें। ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। अगर कुत्ता (Hunter-Dogs) आपको काट ले नाखून से खरोंच ले या किसी घाव वाली जगह पर चाट ले, तो सबसे पहले शरीर के उस हिस्से को साफ पानी से धो ले। साबुन की मदद से उस जगह को साफ कर खुला रहने दे। इसके बाद आपके बिना अधिक देर किए तुरंत डॉक्टर के पास जाकर टीका लगवाना चाहिए। कुत्ता या बिल्ली पालने से पहले उन्हें प्रीवेंटिव रेबीज वैक्सीन लगवा देना बिल्कुल ना भूले। कुत्ते के काटने या चाटने पर किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे को अपनाने से बचे। इन सब से अलग घाव को सेंकने से भी बचें, यह परेशानी को और बढ़ाने का काम करता है।
  4. यह है खतरनाक : बता दें कि रेबीज एक वायरस है। जो संक्रमित जानवर की लार में रहता है। जब यह जानवर इंसान को काट लेता है या शरीर के कुछ अंग जैसे मुंह, नाक और आंख को चाट लेता है तो यह विषाणु लार के जरिए एक्टिव हो सकते हैं। क्योंकि रेबीज का कोई इलाज नहीं है। मेडिकल साइंस करीब 4500 साल से आज तक इस बीमारी का इलाज नहीं खोज पाया है। ऐसे में इंसानी शरीर में एक बार रेबीज का वायरस एक्टिव हो जाए तो उसे बचाना बेहद मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है।
  5. कुत्ते-बिल्ली के चाटने से भी रेबीज का खतरा : ऐसे में लोग जितना हो सके उतना गलियों और सड़कों पर आवारा घूम रहे कुत्तों से दूरी बनाकर चलते हैं। हालांकि वह इस बात से अनजान रह जाते हैं कि काटने से अलग कुत्तों (Hunter-Dogs) द्वारा चाटने से भी आपको रेबीज हो सकता है। ऐसे में स्ट्रीट डॉग्स के साथ-साथ पालतू कुत्तों को लेकर भी खतरा उतना ही बढ़ जाता है।
  6. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक घरों में पाले जा रहे कुत्ते या बिल्ली भी आपके लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। क्योंकि कई बार आप प्यार जताने के लिए जानवरों के बेहद करीब आ जाते हैं और करीब आने पर जानवर आपको चाटते हैं, जिसे अधिकतर लोग आम समझ कर नजर अंदाज कर देते हैं। लेकिन यह खतरनाक हो सकता है, क्योंकि रेबीज के विषाणु लार के जरिए एक्टिव हो सकते हैं।

खाने-पीने के चक्कर में आ जाते हैं आवारा कुत्ते : अस्पताल प्रबंधन से बात कि तो प्रबंधक ने कहा कि अस्पताल परिसर में खाने-पीने के चक्कर में आवारा कुत्ते वार्ड में आ जाते हैं। इसके प्रति मरीजों व सुरक्षा कर्मियों को जागरूक किया गया है।

NewsXpoz Digital

NewsXpoz Digital ...सच के साथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *