झारखंड : घुसपैठ और मनी लॉन्ड्रिंग केस में हाईकोर्ट का फैसला

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रांची : मनी लॉन्ड्रिंग और बांग्लादेशी घुसपैठ से जुड़े मामले में आरोपी रोनी मंडल को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने पीएमएलए कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान आदेश को चुनौती देने वाली रोनी मंडल की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय का पक्ष सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

ईडी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद पीएमएलए कोर्ट में संज्ञान आदेश की सुनवाई के दौरान रोनी मंडल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जुड़ा हुआ था। ऐसे में यह कहना कि उसे सुनवाई का अवसर नहीं मिला, सही नहीं है और इस आधार पर दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने ईडी की दलीलों से सहमति जताते हुए याचिका खारिज कर दी। मामले में ईडी की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा।

गौरतलब है कि बांग्लादेशी घुसपैठ और मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में ईडी ने 12 नवंबर 2024 को एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। गिरफ्तार आरोपियों में दो बांग्लादेशी नागरिक रोनी मंडल और समीर चौधरी के साथ ही दो भारतीय नागरिक पिंटू हलधर और पिंकी बसु मुखर्जी शामिल हैं।

ईडी के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक रोनी मंडल ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाया था, जिसको लेकर पासपोर्ट कार्यालय द्वारा उसे नोटिस भी जारी किया गया था। वहीं एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक संदीप चौधरी पिछले करीब चार वर्षों से आरोपी पिंकी बसु मुखर्जी के घर पर रह रहा था।

इस पूरे मामले में ईडी ने 11 नवंबर 2024 को झारखंड और पश्चिम बंगाल के 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। छापेमारी के बाद चारों आरोपियों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई के दौरान ईडी ने फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पासपोर्ट, अवैध हथियार, अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, नकदी और आभूषण बरामद किए थे।

ईडी ने बरियातू थाना में दर्ज कांड संख्या 188/2024 को टेकओवर कर लिया है। सभी आरोपियों पर मानव तस्करी, अवैध घुसपैठ और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।