‘कृष का गाना सुनेगा’ से वायरल हुआ किशोर धूम अचानक लापता, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

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जमशेदपुर : ‘कृष का गाना सुनेगा…’ यह एक पंक्ति जमशेदपुर के फुटपाथ पर जीवन बिताने वाले किशोर धूम उर्फ पिंटू की पहचान बन गई। उसकी अनोखी आवाज, मासूमियत और सहज अंदाज ने सोशल मीडिया पर ऐसा असर डाला कि वो कुछ ही दिनों में देशभर में चर्चित हो गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके वीडियो तेजी से वायरल हुए और धूम एक इंटरनेट सेंसेशन बन गया।

लेकिन अब वही धूम अचानक लापता हो गया है। बागबेड़ा क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि धूम पिछले कई दिनों से नजर नहीं आ रहा है। जो बच्चा रोज सड़कों, चौक-चौराहों और फुटपाथ पर दिखाई देता था, उसका इस तरह अचानक गायब होना लोगों को परेशान कर रहा है। न तो उसके ठिकाने की कोई ठोस जानकारी है और न ही यह साफ हो पाया है कि वो किसके साथ और किन परिस्थितियों में गया।

धूम के वायरल होने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों से कई यूट्यूबर, कंटेंट क्रिएटर और डिजिटल चैनल जमशेदपुर पहुंचे। किसी ने उसके साथ गीत रिकॉर्ड किया, किसी ने इंटरव्यू लिया और किसी ने भावनात्मक कहानी के जरिए वीडियो बनाए। इन वीडियो को लाखों-करोड़ों व्यूज मिले और कई लोगों ने इससे आर्थिक लाभ भी कमाया। विडंबना यह है कि जिस बच्चे की आवाज और पहचान से लोकप्रियता और कमाई हुई, वही बच्चा आज लापता है।

धूम के गायब होने के बाद यह सवाल राष्ट्रीय स्तर पर उठने लगा है कि इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। क्या सोशल मीडिया से कमाई करने वालों की कोई जवाबदेही तय होनी चाहिए? क्या बच्चों की सहमति और सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है?

मामले को गंभीर बताते हुए बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान और बाल संरक्षण से जुड़ी संस्था के अध्यक्ष सदन ठाकुर ने उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी और वरीय पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडे को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में आशंका जताई गई है कि कुछ लोग धूम को एक कमरे में रखकर उसके वीडियो बना रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्र या समाज सेवा के नाम पर आर्थिक लाभ उठा रहे हैं।

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि नशा मुक्ति और समाज सेवा के नाम पर काम करने का दावा करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों की वैधानिक स्थिति की जांच हो। क्या वे पंजीकृत हैं, क्या उनके पास मेडिकल और प्रशासनिक अनुमति है, और क्या वास्तव में किसी बच्चे का पुनर्वास किया जा रहा है, इन सभी बिंदुओं पर जांच जरूरी बताई गई है।

बाल अधिकार संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला केवल एक बच्चे की गुमशुदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विफलता का उदाहरण बन जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और संवेदनशीलता से कार्रवाई करता है।