झारखंड : धनबाद में स्टेशन रोड स्थित सबिली मजार का विवाद गहराया, जिला प्रशासन से सुलझाने की मांग

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धनबाद : झारखंड के धनबाद में स्टेशन रोड स्थित हजरत सैयद हसन अली शाह इमाम हजरत जलाल शबिली की मजार बीते कई दशक से कोयलांचल में साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता रहा है। परंतु लगातार कई वर्षों से चले आ रहे विवाद से आस्था रखने वालों के दिलों दिमाग पर चोट पहुंचा रही है। जिससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करते हुए विवाद को अविलंब सुलझाना चाहिए।

स्टेशन रोड स्थित सबिली मजार-मस्जिद विवाद में एक पक्ष कमेटी फंड के हिसाब में गड़बड़झाला का आरोप लगा रहा था तो वहीं दूसरा पक्ष मजार के अंदर दबंगई करने का आरोप लगा रहा है। पुलिस-प्रशासन की मौजुदगी में दोनों पक्षों की कई बार बैठक हुइ। लेकिन विवाद दिन-ब-दिन उलझता और बढ़ता हुआ दिख रहा है।

धनबाद रेलवे स्टेशन के समीप स्थित ऐतिहासिक मजार शरीफ के विवाद को लेकर अब्दुल वाजिद खान ने धनबाद जिला प्रशासन को लिखित शिकायत देकर कई गंभीर बातें सामने रखी हैं। अब्दुल वाजिद खान ने बताया कि उनके दादा सूफी संत हज़रत जलाल शाह सबिली (रहमतुल्लाह अलैह) का देहांत वर्ष 1979 में हुआ था और उनकी कब्र मुबारक इसी स्थल पर स्थित है। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद एवं मजार शरीफ की कुल जमीन 31 डिसमिल है। इस संपत्ति को लेकर वर्ष 1989 में न्यायालय ने निर्णय दिया था कि इस जमीन पर रेलवे का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि यहां से प्राप्त धनराशि सीधे कल्याण विभाग को भेजी जाती है।

धनबाद में मजार से जुड़े विवाद मुख्य रूप से जमीन के मालिकाना हक, अवैध कब्जे, प्रबंधन और धार्मिक स्थल की पवित्रता को लेकर हैं। ऐतिहासिक मजार शरीफ जैसे स्थान पर इमाम के साथ बदसलूकी, अवैध कब्जाधारियों को हटाने और वक्फ बोर्ड की संपत्ति के दुरुपयोग के मामले हैं। जिससे तनाव और पुलिस हस्तक्षेप की स्थिति बनी हुई है, जैसा कि अब्दुल वाजिद खान ने बताया है।

ऐतिहासिक मजार शरीफ (मस्जिद व मजार) विवाद :

  • इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा और अनुचित उपयोग का आरोप है।
  • दान पेटी के पैसों का सही हिसाब न रखने और पुरानी समिति के कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी कार्य करने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
  • समिति के सदस्यों को धमकियां मिलने और परिसर में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे प्रशासन और वक्फ बोर्ड से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
  • धनबाद में मजार विवाद जमीन, संपत्ति प्रबंधन और धार्मिक स्थलों के संचालन से जुड़े हैं, जिससे स्थानीय समुदाय में असंतोष और तनाव पैदा होता है।