नई दिल्ली : बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत ने मंगलवार को वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया। बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने से कुछ सप्ताह पहले भारत ने यह कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए बांग्लादेश को ‘नॉन-फैमिली’ डिप्लोमेटिक पोस्टिंग कैटेगरी में डाल दिया है। ये सबसे सख्त सुरक्षा उपायों में से एक है। पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते अब तक के सबसे खराब दौर में हैं, लेकिन बांग्लादेश में भारतीय डिप्लोमैट्स के लिए नियम अधिक सख्त किए गए हैं।
सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने लिया फैसला : आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सिक्योरिटी स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर हमने उच्चायोग और अन्य पदों पर तैनात अपने अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मिशन (उच्चायोग) खुले हैं और सभी पदों पर कर्मी कार्यरत हैं। ढाका में स्थित उच्चायोग के अलावा चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भी भारत के राजनयिक कार्यरत हैं। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि राजनयिकों और अन्य अधिकारियों के परिवार भारत कब लौटेंगे।
नॉन-फैमिली डिप्लोमेटिक पोस्टिंग क्या है? : नॉन-फैमिली पोस्टिंग का मतलब एक ऐसी डिप्लोमैटिक असाइनमेंट है जहां अधिकारियों को पोस्टिंग की अवधि के दौरान अपने परिवार के सदस्यों, जैसे पति/पत्नी और बच्चों को साथ ले जाने की अनुमति नहीं होती है। ऐसी पोस्टिंग आमतौर पर उन इलाकों में होती हैं जहां सुरक्षा का खतरा, राजनीतिक अस्थिरता या संघर्ष होता है।
उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में भारतीय पोस्टिंग को ‘नो-चिल्ड्रन’ असाइनमेंट के तौर पर कैटेगराइज किया गया है। इसके तहत डिप्लोमैट्स अपने जीवनसाथी को साथ ले जा सकते हैं, लेकिन बच्चों को नहीं। भारत की तरफ से बांग्लादेश को नॉन फैमिली पोस्टिंग के बाद उस कैटेगरी में डाल दिया गया है जो पहले इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और साउथ सूडान जैसी हाई-रिस्क पोस्टिंग के लिए रिजर्व थी। अब तक, बांग्लादेश में तैनात भारतीय कर्मचारियों को अपने परिवार के सदस्यों को साथ रखने की इजाजत थी।
भारत-बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण : अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने पर भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए। भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर होने वाले हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। बांग्लादेश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव से स्थिति और भी जटिल हो गई है। नई दिल्ली ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर बार-बार चिंता जताई है। साथ ही, ढाका पर इस मुद्दे को ठीक से हल न कर पाने का आरोप लगाया है।
भारत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। भारत ने अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में कथित वृद्धि को लेकर बांग्लादेश सरकार की आलोचना की है। ऐसी ही एक घटना में दीपू दास को कथित तौर पर भालुका में ईशनिंदा के आरोप में पीटा गया और आग लगा दी गई।
