रांची : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि स्विट्जरलैंड के दावोस में आजकल एक व्हाइट बैच की बहुत चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है यह बहुत बड़ा सम्मान है। प्रतुल शाहदेव ने दावा किया कि वास्तविकता में व्हाइट बैच एक पास होता है जो आपको कॉन्फ्रेंस के किसी भी रूम में जाने की इजाजत देता है। यह बैच सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले शीर्ष राजनीतिक प्रतिनिधियों और बिजनेस लीडर्स को सामान्य तौर पर दिया जाता है ताकि वह एक हॉल से दूसरे हॉल जा सके। जब पास भी सम्मान का हिस्सा होने लगे तो हम तो यही करेंगे – हद कर दी जहांपनाह आपने।
‘व्हाइट बैज’ प्रतिष्ठा और सर्वोच्च पहुंच का प्रतीक : वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) 2026 में ‘व्हाइट बैज’ कोई साधारण पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह प्रतिष्ठा और सर्वोच्च पहुंच का प्रतीक है। इसे वहां की ‘अघोषित पदानुक्रम’ (Hierarchy) में सबसे ऊपर माना जाता है।
व्हाइट बैज केवल चुनिंदा वैश्विक नेताओं को : जानकारों के अनुसार व्हाइट बैज केवल चुनिंदा वैश्विक नेताओं को दिया जाता है। इसमें राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। हाल ही में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को इससे सम्मानित किया गया। इसके अलावा अति विशिष्ट अतिथियों को डब्ल्यूईएफ बैज दिया जाता है, ये बैच उन्हें दिया जाता है, की ओर से व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया जा हो। यह बैज धारक को ‘सुपर वीआईपी’ एक्सेस देता है।
बैज धारकों को ही प्रवेश की अनुमति : दावोस का ‘कांग्रेस सेंटर’ वह मुख्य स्थान है जहां दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोग गुप्त बैठकें और चर्चाएं करते हैं। यहां केवल बैज धारकों को ही प्रवेश मिलता है। एक्सक्लूसिव इवेंट्स को दौरान यह बैज उन सभी सत्रों और हाई-प्रोफाइल पार्टियों के दरवाजे खोलता है जहां साधारण डेलिगेट्स या प्रेस (ऑरेंज बैज) नहीं जा सकते। बैज पहनने वाले को तुरंत एक ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में पहचान दिलाता है, जिससे अन्य शीर्ष नेताओं के साथ संवाद करना आसान हो जाता है।
अन्य बैजों से कैसे अलग है? : दावोस में बैजों में ऑरेंज बैज प्रेस और मीडिया के लिए होता है। जबकि ग्रीन-ब्लू बैज सरकारी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों या अन्य स्टाफ के लिए होता है।
