झारखंड : धनबाद में मजार विवाद गहराया, एक पक्ष ने किया मालिकाना हक़ का दावा; लगाई न्याय की गुहार 

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धनबाद : झारखंड के धनबाद में रेलवे स्टेशन के समीप स्थित मजार का विवाद दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। जिससे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। वर्षों से चले आ रहे विवाद के प्रति जिला प्रशासन सब कुछ जान कर भी अनजान बना हुआ है। जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

मालिकाना हक़ का दावा : रेलवे स्टेशन के समीप स्थित सबिली मजार के सज्जादा नशीन अब्दुल वाजिद खान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि उनके दादा सूफी संत हज़रत जलाल शाह सबिली (रअ) की कब्र मुबारक यहां पर मौजूद है। सबिली मस्जिद एवं मजार शरीफ की जमीन का पूरा एरिया 31 डिसमिल में हैं और उसके मालिक वे स्वयं हैं। मालिकाना हक से संबंधित सारे कागज़ात उन्हीं के नाम से हैं। उन्होंने बताया की यह संपत्ति उनकी है किंतु इस पर वक्फ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन है। इसकी दान पेटी में आने वाली राशि कल्याण विभाग में जाता है। किंतु अपराधिक प्रवृति के लोगों ने इस संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा जमा कर रखा है जिनमे  कई अवांछित तत्व शामिल हैं। यह लोग मस्जिद में शुक्रवार को चंदा के नाम पर अवैध वसूली करते हैं, जबकि उर्स में भी लाखों रुपया हड़प कर बैठे हैं, जिसकी जांच इनकम टैक्स और ईडी से होनी चाहिए।

बगैर अनुमति हो रहा है कंस्ट्रक्शन कार्य : अब्दुल वाजिद खान ने यह भी बताया कि अवांछित लोग नगर निगम और वक्फ बोर्ड की अनुमति एवं रेलवे की एनओसी के बगैर तथा हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए गैरकानूनी ढंग से सबिली मस्जिद में कंस्ट्रक्शन का काम कर आवाम की आंखों में धूल झोंक रहें हैं। जबकि कंस्ट्रक्शन की असल इंटीरियर डिजाइन उनके पास मौजूद है। हैरत और दुर्भाग्य की बात तो यह है कि मस्जिद के पश्चिमी छोर पर जहां से इमाम नमाज पढ़ाते हैं, उसी के समीप यह लोग बाथरूम, टॉयलेट और उसकी टंकी बनाने की मनमानी कर रहें हैं। साथ ही यह लोग रेलवे की बाउंड्री तोड़ कर वहां गेट लगवा रहें हैं जो कि सरासर गलत है।

दबंगों के खिलाफ नहीं दर्ज की गयी कार्रवाई : अब्दुल वाजिद खान ने बताया की 06 सितम्बर 25 को धनबाद थाना प्रभारी को आवेदन देकर उन्होंने कार्यवाही की मांग की थी, परन्तु आज तक एफआईआर भी दर्ज नहीं हुआ। जिला प्रशासन, न्यायालय, कल्याण विभाग, सुन्नी वक्फ बोर्ड आदि के समक्ष उन्होंने कई बार न्याय की गुहार लगाई है, किंतु आज तक इन दबंगों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई और संबंधित विभाग बिल्कुल मौन हैं। जबकि इनमे से अधिकांश लोग कई आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हैं, जिन पर अनेकों मामले दर्ज हैं। इनका विरोध करने पर यह लोग मेरे साथ दुर्व्यवहार करते हैं और मुझे धमकियां भी देते हैं। इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को बचाने के लिए अब्दुल वाजिद खान ने न्याय की गुहार लगाई है।