चिकन नेक कॉरिडोर को बनाया जाएगा सुरक्षित, भारतीय रेलवे ने किया अंडरग्राउंड लाइन बिछाने का इंतजाम

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नई दिल्ली : भारत ने बदलते जियो पॉलिटिक्स और देश में बैठे गद्दारों से निपटने के लिए माकूल नीतियों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में देश के पूरे भूभाग को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाले पश्चिम बंगाल के चिकन नेक कॉरिडोर को हमेशा के लिए सुरक्षित बनाने की योजना तैयार की गई है। बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन पड़ोसियों की इस चिकन नेक कॉरिडोर पर गलत नजर तो रही ही है, देश में बैठे देश के दुश्मनों का भी इसको लेकर मंसूबा बहुत खतरनाक है। कभी पूर्वोत्तर का संपर्क भारत से काटने के लिए यहां से गुजरने वाली रेलवे लाइन और सड़कों पर मवाद डालने की बात उठाई गई थी, अब भारतीय रेलवे ने उन मंसूबों को जमीन के अंदर गाड़ने की फौलादी योजना तैयार की है।

शरजील इमाम ने चिकन नेक को लेकर क्या कहा : 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपों में तिहाड़ जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम ने सीएए के खिलाफ आंदोलन के दौरान पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले चिकन नेक कॉरिडोर के नाम से कुख्यात सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर कहा था, “पांच लाख लोग हमारे पास हों ऑर्गेनाइज्ड तो हम हिंदुस्तान और नॉर्थ-ईस्ट को परमानेंटली कट कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए तो कट कर ही सकते हैं। मतलब, इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उन्हें हटाने में एक महीना लगे। जाएं एयर फोर्स से। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है।”

पूर्वोत्तर तक पहुंचने का एकमात्र जमीनी गलियारा : जबसे बांग्लादेश में शेख हसीना को पाकिस्तान समर्थित कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों ने जबरन सत्ता से बेदखल किया और मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार को कमान मिली है, भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर देश के दुश्मनों की भी नजरें गड़ गई हैं। कहने के लिए तो यह जमीन की मात्र 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा संकरा गलियारा है, लेकिन सच्चाई ये है कि पूर्वोत्तर के आठों राज्यों तक पहुंचने का यही एकमात्र जमीनी रास्ता है।

चिकन नेक कॉरिडोर में बिछेगी अंडरग्राउंड लाइन : चिकन नेक कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत को समझते हुए मोदी सरकार ने बहुत बड़ा फैसला लिया है। इस इलाके में न सिर्फ नई वैकल्पिक रेलवे लाइनें बिछाई जाएंगी, बल्कि अंडरग्राउंड रेलवे लाइन भी बिछाने का इंतजाम कर लिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में गुवाहाटी में कहा,’जो स्ट्रैटेजिक सेक्शन है, करीब 40 किलोमीटर का पूर्वोत्तर के राज्यों को पूरे देश से जोड़ने वाला जो हिस्सा है, उस हिस्से के लिए विशेष प्लानिंग की गई है। चार लाइन और अंडरग्राउंड लाइन की भी प्लानिंग की गई है।’

20 से 24 मीटर गहराई में बनेगी अंडरग्राउंड लाइन : अंडरग्राउंड रेलवे सुरंग आमतौर पर 20 से 40 मीटर गहराई में बनाई जाती है। नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) इस स्ट्रेटेजिक अंडरग्राउंड रेलवे को जमीन से 20 से 24 मीटर की गहराई में बनाएगा, ताकि देश के दुश्मनों का दिमाग भी वहां पहुंचते-पहुंचते ठंडा पड़ जाए। एनएफआई के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव का कहना है ‘सुरक्षा के नजरिए से अंडरग्राउंड स्ट्रेच महत्वपूर्ण है।’ यह अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क पश्चिम बंगाल में टिन माइल हाट से रंगापानी स्टेशनों के बीच बनेगा। एक अंडरग्राउंड रेलवे लाइन पश्चिम बंगाल के बागडोगरा को जोड़ेगा,जिसे देश के एयर डिफेंस मैकेनिज्म के लिए बहुत ही अहम माना जा रहा है।

टिन माइल हाट और रंगापानी स्टेशन के बीच क्यों : भारतीय रेलवे ने पश्चिम बंगाल के टिन माइल हाट और रंगापानी स्टेशनों के बीच अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाना तय किया है, इसके पीछे यहां का भूगोल है। दार्जिलिंग जिले में मौजूद टिन माइल हाट सिलीगुड़ी से मात्र 10 किलोमीटर दूरी पर है। यह रंगापानी ब्लॉक का हिस्सा है। यहां से बांग्लादेश की सीमा बहुत ही नजदीक है।

चिकन नेक कॉरिडोर की भौगोलिक स्थिति : सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक कॉरिडोर के 22 किलोमीटर के गलियारे के निचले हिस्से में बांग्लादेश, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में चीन के कब्जे वाली तिब्बत की चुंबी वैली है। चुंबी वैली में चीन की सैन्य गतिविधियां बहुत ही ज्यादा रहती हैं। इस वजह से यह कॉरिडोर भारत की सुरक्षा के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। यहां पर किसी भी तरह की कमजोरी, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में देश की परेशानी बढ़ा सकती है।