कनाडा : NSA अजित डोभाल की इंटेलिजेंस एडवाइजर के साथ बनी सहमति, खालिस्तानियों को बड़ा झटका

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नई दिल्ली : जस्टिन ट्रूडो के सत्ता से बेदखल होते ही भारत और कनाडा के रिश्ते दोगुनी तेजी से सुधर रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते अब पहले से ज्यादा मजबूत होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब कनाडा ने भारत को तोड़ने की इच्छा रखने वाले खालिस्तानी आतंकियों को बड़ा झटका दे दिया है। कनाडा की यात्रा पर पहुंचे भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच सिक्योरिटी को लेकर बातचीत की। अजीत डोभाल ने इस दौरान कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एडवाइजर के साथ-साथ प्रधानमंत्री की डिप्टी क्लर्क नथाली ड्रोइन से बात की।

भारत और कनाडा राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और साइबर सुरक्षा पर सहयोग को गहरा करने के लिए एक साझा वर्क प्लान पर सहमत हुए। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि बैठक भारत और कनाडा के बीच रेगुलर द्विपक्षीय सुरक्षा बातचीत का हिस्सा थी। दोनों पक्षों ने अपने देशों और नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने की पहलों पर हुई प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान ही सहयोग को गाइड करने के लिए एक वर्कप्लान पर सहमति जताई गई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस कदम का मकसद द्विपक्षीय संचार को सुव्यवस्थित करना और आपसी चिंता के मुद्दों पर समय पर जानकारी साझा करना है, जिसमें ड्रग्स का अवैध प्रवाह, खासकर फेंटानिल प्रीकर्सर और अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क शामिल हैं।

किन मुद्दों पर बनी सहमति : भारत और कनाडा सिक्योरिटी और कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करेंगे। दोनों देशों की एजेंसियां मौजूदा कामकाजी संबंधों को और मजबूत करेंगी।

बातचीत जारी रखने पर सहमति : भारत और कनाडा ने साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी पर सहयोग को औपचारिक बनाने और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों पर जानकारी शेयर करने का भी वादा किया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, वे घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के मुताबिक, धोखाधड़ी और इमिग्रेशन लागू करने से जुड़े सहयोग पर बातचीत जारी रखने पर भी सहमत हुए।

बनाए रखे हैं संस्थागत चैनल : भारत और कनाडा ने आतंकवाद विरोधी, कानून प्रवर्तन सहयोग और उभरते खतरों को कवर करने वाली सुरक्षा बातचीत के लिए संस्थागत चैनल बनाए रखे हैं। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय अपराधों, ड्रग तस्करी, साइबर खतरों और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने के लिए संरचित जुड़ाव की आवश्यकता पर जोर दिया है।