हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग जिले से सामाजिक समरसता की एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले के चौपारण प्रखंड में रविवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 15 परिवारों ने ईसाई धर्म को त्याग कर स्वेच्छा से सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ की। हिंदू धर्म की विराट संस्कृति और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से प्रेरित होकर इन परिवारों ने अपनी पुरानी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय लिया।
सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक एकजुटता पर जोर : चौपारण प्रखंड के ग्राम चक्रसार और बजरंग क्लब दादपुर परिसर में सामाजिक समरसता एवं पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से ग्रामीण बैठकों का आयोजन किया गया था। इस बैठक में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। बैठकों का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारा और अपनी विरासत के संरक्षण पर चर्चा करना था।
‘ईसाई मिशनरी के प्रभाव में आकर अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गए थे’ : ग्राम चक्रसार और सिंहपुर के इन परिवारों ने बताया कि वे पूर्व में ईसाई मिशनरी पादरियों के प्रभाव में आकर अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि इससे वे अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूर्वजों की परंपराओं को भूलने लगे थे। समय के साथ अपनी जड़ों के प्रति जागरूकता बढ़ी और उन्होंने सर्वसम्मति से हिंदू धर्म में लौटने का फैसला किया।
मंत्रोच्चारण और विधि-विधान से भव्य स्वागत : घर वापसी करने वाले परिवारों का ग्रामीणों ने पारंपरिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ स्वागत किया। इस दौरान वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण रहा। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने संदेश दिया कि समाज में प्रेम, सौहार्द और एकजुटता ही सबसे बड़ी शक्ति है।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति : इस अवसर पर यवनपुर पंचायत की मुखिया जानकी यादव, दादपुर पंचायत के पूर्व मुखिया प्रतिनिधि अरविंद सिन्हा, विहिप-बजरंग दल के संजय सिंह, शेखर गुप्ता, शंभु साव, संजीव सिंह तथा चौपारण इकाई के अनेक सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और आपसी सहयोग पर बल दिया।
