रांची : आज महाशिवरात्रि का त्योहार देश-दुनिया में धूमधाम से मनाया जा रहा है। बिहार और झारखंड में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। रांची, देवघर, पटना, मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख शहरों में प्रशासन और मंदिर समितियों ने भव्य तैयारियां की हैं।
शिव की भक्ति में बिहार और झारखंड समेत देश-दुनिया के भक्त रमे हुए हैं। महाशिवरात्रि पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। पटना, मुजफ्फरपुर, रांची और देवघर जैसे शहरों के शिव मंदिरों में विशेष आयोजन किया गया है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक कर रहे हैं। शोभायात्राओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा माहौल शिवमय और भक्ति पूर्ण हो गया है।
देश-दुनिया में महाशिवरात्रि का पर्व : त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी की शाम 5 बजकर 4 मिनट पर खत्म हो गई। इसके बाद चतुर्दशी शुरू हुई। आज महाशिवरात्रि का मुख्य दिन है। जहां चतुर्दशी तिथि पूरे दिन और रात प्रभावी है। दृक पंचांग के अनुसार नक्षत्र उत्तराषाढ़ा शाम 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। उसके बाद श्रवण लग जाएगा। योग व्यतिपात है, जो 16 फरवरी की देर रात 2 बजकर 47 मिनट तक है। चंद्रमा मकर राशि में संचरण करेंगे।
देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम और मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पटना में भव्य शोभायात्राएं निकाली जा रही हैं, जिनमें डिजिटल और 3D झांकियां आकर्षण का केंद्र हैं। शिवालयों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है, जिससे माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर ‘मोर मुकुट’ परंपरा : झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर ‘मोर मुकुट’ बांधने की अत्यंत प्राचीन और अनूठी परंपरा निभाई गई। यह रस्म भगवान शिव के अपरूप श्रृंगार का प्रतीक है, जो उन्हें एक दिव्य दूल्हे के रूप में पेश करती है। मान्यता है कि शिव-शक्ति के मिलन से पूर्व, बाबा को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस दौरान मुख्य शिखर पर पारंपरिक तरीके से मोर मुकुट स्थापित किया जाता है, जो उनकी शाही बारात के प्रस्थान का संकेत है। ये दृश्य न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए शिव के ‘वर स्वरूप’ के दर्शन का पावन अवसर भी होता है।
पटना से दानापुर तक आज 30 शोभायात्रा : पटना से दानापुर तक इस वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्ति और तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। श्री श्री महाशिवरात्रि शोभायात्रा समिति की ओर से आयोजित यह यात्रा इस बार अपनी भव्यता और ‘डिजिटल अवतार’ के लिए चर्चा में है। इस साल का सबसे बड़ा आकर्षण गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का 3D प्रतिरूप होगा। पटना से दानापुर के बीच कुल 30 अलग-अलग केंद्रों से छोटी-बड़ी शोभायात्राएं निकलेंगी, जो एक विशाल समागम का रूप लेंगी। मुख्य मंच पर राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रहेगी, जिनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और देशभर से आए प्रतिष्ठित साधु-संत शामिल होंगे।
बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता : झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में महाशिवरात्रि को लेकर भक्तों का उत्साह सातवें आसमान पर है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशिष्ट स्थान रखने वाले इस धाम में महापर्व की भव्यता देखते ही बन रही।
रांची के पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता : रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य शिव बारात निकाली जाएगी। श्री शिव बारात आयोजन महासमिति द्वारा आयोजित इस महोत्सव की तैयारियां की गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोपहर 3 बजे शिव बारात को रवाना करेंगे। इस दौरान सुबोधकांत सहाय, विधायक सीपी सिंह और कुणाल अजमानी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे। इस वर्ष महादेव ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ के दिव्य स्वरूप में दर्शन देंगे। उनके साथ भूत-प्रेतों और गणों की पारंपरिक टोली भी शामिल होगी। शिव बारात पहाड़ी मंदिर के मुख्य द्वार से शुरू होकर शनि मंदिर (अपर बाजार), शहीद चौक, फिरायालाल चौक, गांधी चौक और रातू रोड होते हुए पिस्का मोड़ स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। यहीं भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न होगा।
सहस्र शिवलिंग के लघु स्वरूप और नंदी की प्राण-प्रतिष्ठा : पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ऐतिहासिक अनुष्ठान किया जा रहा है। मंदिर परिसर के तालाब किनारे बने मंडप में सहस्र शिवलिंग के लघु स्वरूप और नंदी की प्राण-प्रतिष्ठा की जा रही है। ये नवनिर्मित शिवलिंग दुनिया के सबसे ऊंचे (33 फीट) शिवलिंग का ही छोटा स्वरूप है। इसे विशेष रूप से भक्तों की पूजा-अर्चना के लिए स्थापित किया जा रहा है। इसका निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उसी दुर्लभ पत्थर से किया गया है, जिससे मुख्य 33 फीट ऊंचा शिवलिंग बना है। इस अद्भुत शिवलिंग में 72 लिंगों की 14 कतारें (वृत्त) उकेरी गई हैं, जिनमें कुल 1008 छोटे शिवलिंग समाहित हैं। इसकी स्थापना मंदिर परिसर के ‘सहस्र शिवलिंग मण्डपम’ में की जा रही है।
पटना महावीर मंदिर में विशेष इंतजाम : पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर महादेव का भव्य अभिषेक किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस बार रुद्राभिषेक का आयोजन विशेष और व्यवस्थित है। रुद्राभिषेक की प्रक्रिया सुबह 5 बजे से शुरू हो गई, जो रात 10:00 बजे तक लगातार चलेगी। मंदिर के चारों शिवलिंगों पर अभिषेक के लिए 60 से ज्यादा भक्तों ने एडवांस बुकिंग कराई थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। भक्तों को बाहर से कोई भी पूजन सामग्री (जैसे दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि) लाने की आवश्यकता नहीं है। सभी सामग्री मंदिर द्वारा ही उपलब्ध कराई जा रही है।
बेतिया मनोकामना शिव मंदिर में भव्य आयोजन : महाशिवरात्रि पर विद्वान पंडितों का समागम देखने को मिल रहा। अयोध्या, काशी, प्रयागराज और उज्जैन जैसे पावन तीर्थों से 500 प्रख्यात विद्वान बेतिया पहुंच हैं। ये पंडित सागर पोखरा स्थित मंदिर में सुबह के 4 बजे से आराधना शुरू कर दिए हैं, जो देर रात तक निरंतर पूजा-पाठ और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करेंगे। महादेव के विशेष श्रृंगार के लिए उत्तराखंड के गंगोत्री से दुर्लभ ब्रह्म कमल मंगाए गए। शिवरात्रि के दौरान हर चार घंटे के अंतराल पर भगवान का चार बार विशेष अभिषेक और चार बार भव्य श्रृंगार किया जा रहा है।
देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम में भक्तों की भारी भीड़ : देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में महाशिवरात्रि को लेकर भक्तों का उत्साह सातवें आसमान पर है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशिष्ट स्थान रखने वाले इस धाम में महापर्व की भव्यता देखते ही बन रही। श्रद्धालुओं क तांता लगा हुआ है। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए VIP दर्शन पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। हालांकि, भक्तों की सुविधा के लिए ‘शीघ्रदर्शनम’ की व्यवस्था प्रभावी है। शाम को केकेएन स्टेडियम से शिव बारात निकाली जाएगी, जो शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए बाबा मंदिर पहुंचेगी। देर रात से लेकर सोमवार सूर्योदय तक शिव-पार्वती विवाह की रस्म निभाई जाएगी। इस दौरान चार प्रहर की विशेष पूजा होगी और परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग पर चार बार सिंदूर अर्पित किया जाएगा। बाबा भोलेनाथ और माता पार्वती सहित सभी 22 मंदिरों के शिखर पर पंचशूलों को पुनः स्थापित कर दिया गया है।
