झारखंड : सुशील श्रीवास्तव एक ‘रोमियो’…प्यार में बदला धर्म और फिर बना ‘गैंगस्टर’; AK-47 ने किया छलनी?

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चतरा : क्या आप जानते हैं कि सुशील श्रीवास्तव क्राइम की दुनिया में कैसे आया? जवाब है-इश्क। हम बात कर रहे हैं सुशील श्रीवास्तव की। वही गैंगस्टर जिसे 2015 में हजारीबाग सिविल कोर्ट में गोलियों से भून दिया गया था। कल 18 फरवरी को उसकी हत्या के आरोपियों को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। कहते हैं इश्क में शख्स बन भी सकता है और बिगड़ भी सकता है। फिल्मों में अक्सर हम यह देखते आए हैं। लेकिन असल जिंदगी में भी एक शख्स था, जो ग्रेजुएशन कर रहा था और बाकी मध्यम वर्ग परिवार की तरह एक अच्छी नौकरी की ख्वाहिश रखता था। लेकिन प्यार को पाने के लिए उसकी जिंदगी में इतने मोड़ आए कि वो नामी गैंगस्टर बन गया।

झारखंड के चतरा जिले के हंटरगंज ब्लॉक में एक छोटा सा गांव है-कुपा। सुशील का परिवार इसी गांव से था। पिता खेती करते थे और खुद सुशील श्रीवास्तव रांची में कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। बस पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात मीनू नाम की लड़की से हो गई। दोनों में प्यार हो गया और बात शादी तक पहुंच गई।

जैसे ही सुशील के घरवालों को पता चला कि मीनू हिंदू नहीं ईसाई है तो उन्होंने रिश्ते से इनकार कर दिया। लेकिन सुशील मन से मीनू को अपना मान चुका था और अब पीछे हटना मुमकिन नहीं था। नतीजा ये हुआ कि परिवार वालों ने घर से निकाल दिया।

शादी के शुरू हुई गरीबी से जंग : 24 साल के सुशील ने मीनू से शादी कर ली और दोनों खुशी-खुशी रांची में रहने लगे। यही नहीं सुशील ने ईसाई धर्म भी अपना लिया। लेकिन जल्द ही मोहब्बत को कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ा। कहते हैं प्यार से पेट नहीं भरता। पैसों की तंगी ने रोजमर्रा के खर्चे चलाना भी दूभर कर दिया। दोनों 3 बच्चों के माता-पिता भी बन चुके थे।

जब ठेकेदारी के लिए सहना पड़ा अपमान : पैसा कमाने के लिए सुशील श्रीवास्तव ने ठेकेदारी में घुसने की कोशिश की। बात 1992 की है। परिवार की जिम्मेदारी उठानी थी। इसलिए पैसा जरूरी था। एक PWD इंजीनियर से संपर्क किया और रामगढ़ में ठेकेदारी का काम मांगा। बताते हैं कि उस इंजीनियर का नाम राधेश्याम रजक था। इस इंजीनियर ने ठेका तो नहीं दिया, लेकिन सुशील श्रीवास्तव की बेइज्जती बहुत की। बस यहीं से उसकी जिंदगी बदल गई।

डॉन भोला पांडे से मुलाकात : उसने उस समय के कुख्यात कोयला डॉन भोला पांडे की गैंग ज्वाइन कर ली। जल्द ही वो उसका खास बन गया। करीब 2 साल बाद उसने उस इंजीनियर को मौत के घाट उतार दिया, जिसने उसकी बेइज्जती की थी। वह यहीं नहीं रुका और अपराध लगातार बढ़ते चले गए। कोयला सेक्टर में उसकी दहशत बढ़ने लगी। पुलिसवाले तक उसे ‘बाबा’ कहकर बुलाते थे।

2015 में AK-47 से भूना : 2 जून, 2015 का दिन था। हजारीबाग सिविल कोर्ट में सुबह 11 बजे सुशील श्रीवास्तव और उसके दो साथियों को पेशी के लिए लाया गया। कोर्ट परिसर में ही उसे AK-47 से ताबड़तोड़ गोलियां दागकर मार डाला। उसके दोनों साथियों की भी मौत हो गई। हत्यारों ने पूरे 30 राउंड गोलियां चलाई थीं।

झारखंड हाईकोर्ट ने विकास तिवारी, संतोष पांडे, विशाल कुमार सिंह, राहुल देव पांडे और दिलीप साव को मिली उम्रकैद की सजा को पलट दिया है। अब इनके बरी होने से फिर वही सवाल खड़ा हो गया है, जो 2015 से सामने है…सुशील श्रीवास्तव को मारा किसने?