रांची : झारखंड में बैंकिंग गतिविधियों को लेकर एक बेहद दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों में कर्ज (Loan) लेने और कारोबारी गतिविधियों में शामिल होने की होड़ बढ़ी है। इस दौड़ में मुस्लिम समुदाय सबसे आगे निकल गया है। मुस्लिम समुदाय लोन लेने में सबसे आगे हैं। मुस्लिम समुदाय ने राज्य के कुल अल्पसंख्यक ऋण का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्राप्त किया है।
छह महीने में अल्पसंख्यक समुदाय ने लिया 2,941 करोड़ का कर्ज : स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 तक की छह महीने की अवधि में झारखंड के विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों ने कुल 2,941 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मुस्लिम समुदाय की भागीदारी इसमें सबसे ज्यादा रही है। कुल 1 लाख 70 हजार 30 मुस्लिम लाभार्थियों ने 2,111 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जो कुल अल्पसंख्यक ऋण का 71.81 फीसदी है।
लोन लेने में दूसरे और तीसरे नंबर पर कौन? : लोन लेने के मामले में मुस्लिम समाज के बाद ईसाई समुदाय दूसरे स्थान पर है। ईसाई समुदाय ने इस अवधि में 432.73 करोड़ रुपये का लोन लिया। वहीं, सिख समुदाय 252.79 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में अन्य समुदायों का भी ब्योरा दिया गया है।
राज्य में जैन समुदाय के लोगों ने 122.57 करोड़ रुपये, बुद्धिस्ट समुदाय के लोगों ने 20.31 करोड़ रुपये और पारसी समुदाय के लोगों ने 1.14 करोड़ रुपये का ऋण लिया है।
लोन देने में रांची ने मारी बाजी : वित्तीय सक्रियता के मामले में झारखंड की राजधानी रांची शीर्ष पर बनी हुई है। रांची जिले में अल्पसंख्यक समुदाय के 63 हजार 101 लोगों के बीच कुल 791.13 करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया। वहीं दूसरे नंबर पर पूर्वी सिंहभूम हैं, यहां 7 हजार 841 लाभार्थियों को 367.77 करोड़ रुपये का ऋण मिला। तीसरे नंबर पर कोयलांचल यानी धनबाद है, जहां 20 हजार 774 लोगों ने 304.26 करोड़ रुपये का कर्ज लिया।
बता दें, झारखंड सरकार भी राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाती है। ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी अपना काम-धंधा शुरू कर अपनी आर्थिक स्थित को सुधार सकें।
