बिहार : नालंदा में NIA ने किया कारतूस तस्करी नेटवर्क का खुलासा; ज्वेलरी शॉप में एके-47 की गोलियों का धंधा

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नालंदा : बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ में बीते दिन एनआईए और एटीएस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कारतूस तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई की थी। जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ रही है, की जानकारियों का खुलासा हो रहा है। बिहारशरीफ में एक ज्वेलरी दुकान और गन हाउस की आड़ में एके-47 जैसे घातक हथियारों की गोलियों की सप्लाई की जा रही थी। इस सिंडिकेट का जाल हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैला हुआ है।

सीएसपी केंद्रों के जरिए होता था करोड़ों का लेन-देन : जांच एजेंसियों ने छापेमारी के दौरान हिलसा और चिकसौरा स्थित सीएसपी केंद्रों से अहम डिजिटल गैजेट्स और डीवीआर जब्त किए हैं। जांच में सामने आया है कि हथियारों और कारतूसों की खरीद-बिक्री के लिए नकद के बजाय डिजिटल पेमेंट का सहारा लिया जाता था। मुख्य अपराधी सत्येंद्र सिंह अपने रिश्तेदार और सीएसपी संचालक कुंदन के जरिए गिरफ्तार तस्कर मोहम्मद परवेज तक पैसे पहुंचाता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।

हरियाणा और कानपुर से जुड़ा है कनेक्शन : यह सिंडिकेट केवल स्थानीय नहीं बल्कि एक बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह है। जांच में सामने आया है कि यूपी के कानपुर स्थित लाइसेंसी दुकानों से गोलियां खरीदी जाती थीं, जिसकी फंडिंग और कंट्रोल हरियाणा के कुरुक्षेत्र से होता था। हरियाणा का मास्टरमाइंड विजय और कुश कालरा इस पूरे खेल की मुख्य कड़ी हैं, जिन्हें एनआईए पहले ही दबोच चुकी थी। पिछले कुछ महीनों में फतुहा और लहेरी से करीब 2500 कारतूस बरामद किए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में प्रतिबंधित एके-47 की गोलियां शामिल थीं।

कौन है मास्टरमाइंड सत्येंद्र सिंह? : नेटवर्क की मुख्य कड़ी माना जाने वाला बिहारशरीफ का सत्येंद्र सिंह एक शातिर अपराधी है। वह साल 2001 में पटना के सिगरियावा और 2009 में पटना-नालंदा बॉर्डर पर अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार हो चुका है। परिजनों के अनुसार, वह अवैध धंधों और नशे की लत के कारण अपनी पैतृक जमीन तक बेच चुका है। एनआईए की टीम ने सत्येंद्र के ससुराल मिर्जापुर और अन्य ठिकानों पर 5 घंटे तक सघन तलाशी ली, जहां से चेकबुक, मोबाइल और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज बरामद हुए हैं।

NIA और ATS की रेड में कई सुराग : बिहारशरीफ से पकड़े गए तस्कर परवेज के मोबाइल से मिले सुरागों के आधार पर ही एनआईए ने हिलसा के राममूर्ति नगर और चिकसौरा में दबिश दी थी। टीम ने अलमारी, पलंग और बक्सों तक की तलाशी ली। फिलहाल मुख्य आरोपी सत्येंद्र सिंह फरार है, जिसकी तलाश में बिहार और पड़ोसी राज्यों में छापेमारी जारी है। एजेंसी अब उन गैंग्स की तलाश कर रही है, जो इन हथियारों और गोलियों के अंतिम खरीदार थे।