बेंगलुरु : कर्नाटक में मैसुरू सिटी कॉरपोरेशन ने सार्वजनिक जगह पर पेशाब को रोकने के लिए नायाब तरीका ढूंढ निकाला है। कर्नाटक के इस ऐतिहासिक शहर में कई जगह ऐसे हैं, जहां खाली दीवारों के पास लोग खुले में पेशाब करने से नहीं हिचकते। ऐसा ही एक इलाका मैसूर सेंट्रल बस स्टैंड का है। अब इस जगह पर सिटी कॉरपोरेशन ने स्टील की चमकदार चादरें लगा दी हैं, जो शीशे जैसी चमकदार है।
अब किसी ने ग्रामीण बस स्टैंड के सामने की दीवार पर पेशाब करने की कोशिश की तो उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी। 80 मीटर लंबी दीवार पर चमकदार स्टील की परतें ऐसे लगाई गई हैं, जो रोशनी के साथ ही आईने का काम करेगा। दीवार के साथ रोशनी के लिए स्ट्रीट लाइट भी लगाई गई है, जो शाम को भी जलती है।
बताया जा रहा है कि यह पहल मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन द्वारा की गई थी। इसके तहत, सब-अर्बन बस स्टैंड के पास वाली उस दीवार को निशाना बनाया गया, जो खुले में पेशाब करने वालों के लिए एक आम जगह बन चुकी थी।
अंधेरा होते ही जलेंगी एलईडी लाइट्स : इन शीशों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि अगर कोई पेशाब करने आता है और वह जैसे ही दीवार के सामने खड़ा होता है, शीशे में वह दिखाई देता है। खास बात है कि पीछे मौजूद हर कोई शख्स उसे देख सकता है। अगर वह पेशाब करेगा तो पीछे से आते-जाते सारे राहगीर उसे देख सकते हैं। इन चमकदार पैनलों के चारों ओर LED लाइट भी लगाई गई हैं ताकि रात को अंधेरे में भी यह साफ नजर आएं और अंधेरे का फायदा उठाकर कोई पेशाब न करे।
पेशाब करने के दौरान दिखता है चेहरा : सिर्फ़ जुर्माना लगाने या चेतावनी देने पर निर्भर रहने के बजाय, कॉर्पोरेशन ने लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने का एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने दीवार को एक चमकदार स्टील के शीशे से ढक दिया, ताकि जो भी व्यक्ति वहां पेशाब करने की कोशिश करें, उसे अपना ही चेहरा शीशे में देखना पड़े।
इस नई व्यवस्था का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस क्लिप में, वीडियो बनाने वाला व्यक्ति दीवार के साथ-साथ चलता हुआ यह दिखाता है कि कैसे यह चमकदार सतह लोगों को गलत काम करने से रोकती है। जैसा कि उसने समझाया, इसके पीछे का विचार बहुत सीधा-साधा था। ज़्यादातर लोग किसी सार्वजनिक जगह पर, खुद को शीशे में देखते हुए इस तरह का काम करने में असहज महसूस करेंगे।
उस व्यक्ति ने यह भी कहा कि अगर वे बस एक बोर्ड लगा देते जिस पर लिखा होता कि यहां पेशाब करना एक दंडनीय अपराध है, तो कोई भी इसे गंभीरता से नहीं लेता। लोगों को रोकने का यही एकमात्र तरीका है।
लोग बोले- अच्छी पहल : इस पहल को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसे अभियानों के तहत चलाए जा रहे बड़े स्वच्छता प्रयासों का ही एक हिस्सा माना जा रहा है। इसके पीछे यह उम्मीद है कि इस तरह के रचनात्मक उपाय, बिना किसी सख़्त कार्रवाई की ज़रूरत के, लोगों को बेहतर नागरिक व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
ऑनलाइन, इस पर लोगों की प्रतिक्रिया ज़्यादातर सकारात्मक रही है। कई यूजर्स ने इसे शहरों की एक आम समस्या का एक समझदारी भरा और व्यावहारिक हल बताया है। कई कमेंट करने वालों ने इस विचार की तारीफ करते हुए इसे बेहतरीन सोच कहा और सुझाव दिया कि जिन दूसरे शहरों में भी ऐसी ही समस्याएं हैं, वहां भी इसे अपनाया जाना चाहिए। कुछ लोगों ने इस हल के मनोवैज्ञानिक पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना था कि खुद को ऐसी स्थिति में देखने से होने वाली शर्मिंदगी एक मजबूत रोक के तौर पर काम कर सकती है।
