तेलंगाना : रेवंत सरकार ने 800 साल पुराना शिव मंदिर ढहाया, कांग्रेस सरकार पर भड़की BJP-BRS, बढ़ा विवाद

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हैदराबाद : तेलंगाना के वारंगल जिले में, लगभग 800 साल पुराने माने जाने वाले एक प्राचीन शिव मंदिर को गिराए जाने से लोगों में भारी गुस्सा है। गांव वाले और राजनेता, अधिकारियों पर विकास के नाम पर इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के एक अहम हिस्से को नष्ट करने का आरोप लगा रहे हैं। खानपुर मंडल के अशोक नगर गांव में एक ऐतिहासिक मिट्टी के किले के अंदर स्थित इस मंदिर को, कथित तौर पर एक ‘एकीकृत स्कूल परियोजना’ के निर्माण के लिए जमीन समतल करने के काम के दौरान गिरा दिया गया। विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तेलंगाना के वारंगल ज़िले में एक प्राचीन मंदिर को गिराए जाने की निंदा की है।

BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने शुक्रवार को इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया और मंदिर को तुरंत फिर से बनवाने की मांग की। रामा राव ने पोस्ट किया, ‘इस राज्य में ऐसे बेवकूफों का राज चल रहा है जिन्हें तेलंगाना के इतिहास, संस्कृति या अस्तित्व की ज़रा भी समझ नहीं है। यह बेहद शर्मनाक है कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने वारंगल ज़िले के खानपुर मंडल में अशोकनगर के पास, 800 साल पहले काकतियों द्वारा बनवाए गए एक प्राचीन शिव मंदिर को गिराकर ज़मीन में मिला दिया।’

काकतीय सम्राट गणपति देव शासनकाल का मंदिर : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस प्राचीन मंदिर को गिराए जाने की निंदा की है। तेलंगाना BJP के ‘X’ हैंडल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया है, ‘हमारी विरासत के प्रति कांग्रेस की लापरवाही एक बार फिर इस घटना से सामने आ गई है। काकतीय सम्राट गणपति देव के शासनकाल में बना यह मंदिर, जो तेलंगाना की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शान का प्रतीक था, अब मलबे के ढेर में बदल गया है।’

रेवंत सरकार, जिसने बेरहमी से हजारों घरों को गिरा दिया और लाखों पेड़ों को काट डाला, अब हमारी ऐतिहासिक विरासत को भी नहीं बख्श रही है। मैं मांग करता हूं कि यह तोड़फोड़ तुरंत रोकी जाए और शिव मंदिर को फिर से बनवाया जाए। केटी रामाराव

सबसे दुखद बात यह है कि राज्य के पुरातत्व विभाग की सुरक्षा में होने के बावजूद, इसे इस तरह से ज़मीन में मिला दिया गया, जो बेहद शर्मनाक है। BJP ने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी के शासन में, सरकारी सुरक्षा प्राप्त ऐतिहासिक इमारतों को भी ज़रा सी भी सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। -बीजेपी

800 साल पुराने शिव मंदिर का इतिहास : इस बीच, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग ने कथित तौर पर मंदिर को गिराए जाने के मामले में एक केस दर्ज कर लिया है। वकील रामा राव इमानेनी ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के समक्ष इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि एक इंटीग्रेटेड स्कूल के निर्माण के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल करके इस मंदिर को गिरा दिया गया। कहा जाता है कि इस मंदिर में फरवरी 1231 ई. का एक दुर्लभ शिलालेख मौजूद था। सात पंक्तियों वाले इस तेलुगू शिलालेख को 1965 में विरासत विभाग द्वारा प्रलेखित किया गया था। कहा जाता है कि यह मंदिर परिसर ऐतिहासिक कोटा कट्टा मिट्टी के किले वाले क्षेत्र का हिस्सा था, जो प्राचीन तालाबों और किलेबंदियों से घिरा हुआ था।

सरकार ने दी सफाई : वहीं सरकार ने इस मामले में सफाई दी है। उन्होंने कहा कि 6 मई को राजस्व विभाग, पुरातत्व विभाग, खानापुर तहसीलदार, तेलंगाना स्टेट एजुकेशन एंड वेलफेयर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीजीईडब्ल्यूआईडीसी) और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों की संयुक्त जांच की गई। जांच में पाया गया कि 30 एकड़ भूमि घनी झाड़ियों और पेड़ों से ढकी हुई थी। प्रस्तावित यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल कॉम्प्लेक्स के लिए सफाई और समतलीकरण के दौरान वहां एक पुरानी और जर्जर संरचना के अवशेष मिले। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का विध्वंस या तोड़फोड़ निर्माण एजेंसी द्वारा नहीं किया गया।

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह सरकारी भूमि है न कि देवस्थान (एंडोमेंट) भूमि और पहले ही इसे जनजातीय कल्याण विभाग को आवंटित किया जा चुका था। पुरातत्व विभाग ने भी पुष्टि की कि यह संरचना किसी संरक्षित स्मारक या पुरातात्विक स्थल के रूप में दर्ज नहीं है। जांच टीम ने पाया कि यह ढांचा लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और उपयोग में नहीं था।

सत्य शारदा और डी माधव रेड्डी ने स्थल का दौरा किया और आश्वासन दिया कि इस संरचना को इतिहासकारों, स्थापत्य और पुरातत्व विभाग के परामर्श से उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाएगा। साथ ही इसे पुरातत्व विभाग में अधिसूचित कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब विपक्षी दल बीआरएस और बीजेपी ने कथित विध्वंस को लेकर आपत्ति जताई और तत्काल पुनर्स्थापन की मांग की थी।