पटना : बिहार में इस समय बांकीपुर उपचुनाव चर्चा के केंद्र में है। ये सीट हाई प्रोफाइल सीट बन गई है। जन सुराज के मुखिया प्रशांत किशोर लगातार इस सीट पर जीत के लिए जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। उधर, बीजेपी के कैंडिडेट बदलने की चर्चा को लेकर माहौल गर्म है। अभिषेक बंटी के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के पीछे चारा घोटाले का कनेक्शन बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें, तो बीजेपी को इनपुट मिला था कि अभिषेक बंटी का परिवार चारा घोटाले से जुड़ा रहा है। यदि ये मुद्दा पीके उठा देते हैं, तो पार्टी को नुकसान हो जाएगा।
बांकीपुर कैंडिडेट बदलने की इनसाइड स्टोरी : बांकीपुर में कैंडिडेट बदलने के पीछे की कहानी में बिहार का चर्चित चारा घोटाला वाला कनेक्शन सामने आया है। अभिषेक बंटी ने चुपचाप शुक्रवार को पार्टी कार्यालय में एक संक्षिप्त प्रेस कांफ्रेंस में चुनाव से पीछे हटने की घोषणा की। कुछ मिटनों में पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा के नाम का ऐलान कर दिया। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बीजेपी नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर स्वीकार किया है कि अभिषेक बंटी के परिवार के करीबी को चारा घोटाला में दोषी ठहराया गया था।
बीजेपी ने सावधानी में उठाया ये कदम- सूत्र : बीजेपी नेता ने पीटीआई से बातचीत में ये स्वीकार किया है कि पार्टी को डर था कि अगर जन सुराज ने ये मुद्दा पीक कर लिया, तो पार्टी के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती थी। प्रशांत किशोर मीडिया से बोल चुके हैं कि बीजेपी खुद मान रही है कि वो भ्रष्ट लोगों को मैदान में उतारती है। जानकारी के मुताबिक चारा घोटाला से जुड़े मामले में अभिषेक बंटी के पिता रविंद्र प्रसाद और मां चंचला सिन्हा का नाम आया था। बीजेपी के शीर्ष नेताओं को पूर्व में इसकी जानकारी नहीं थी।
शीर्ष नेतृत्व को नहीं पता थी घोटाले की बात : सूत्रों के मुताबिक जैसे ही केंद्रीय नेतृत्व तक ये बात पहुंची, आनन- फानन में कैंडिडेट बदल दिया गया। जैसे ही अभिषेक बंटी ने पीछे हटने का ऐलान किया। उसके ठीक तुरंत बाद बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति का पत्र सोशल मीडिया पर तैरने लगा। जिसमें नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया। इससे पूर्व दोपहर में एनडीए नेताओं की अहम बैठक हुई। अचानक शाम में अभिषेक बंटी ने मीडिया को संबोधित किया। कुल मिलाकर घटनाक्रम नाटकीय रहा। अभिषेक ने डायरेक्ट वही पत्र मीडिया के सामने पढ़ दिया, जो प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा था।
अभिषेक उर्फ बंटी ने नामांकन लिया वापस : अभिषेक ने इस दौरान नेतृत्व का धन्यवाद किया। पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में काम करने की बात कही। उसके बाद उठ कर चले गए। सियासी जानकार मानते हैं कि पूरी तैयारी पहले से हो गई थी। बीजेपी ने बिना देरी किए नये उम्मीदवार का नाम सामने ला दिया। पार्टी ग्राउंड पर कार्यकर्ताओं को तैयार रखना चाहती थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीआई कोर्ट ने 2022 में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के साथ जिन 75 लोगों को चारा घोटाले में दोषी माना था, उसमें अभिषेक के पिता भी शामिल थे।
बांकीपुर से नये उम्मीदवार की तत्काल घोषणा : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिषेक के पिता मगध मेडिकल कॉर्पोरेशन के प्रबंधक रह चुके हैं। 139 करोड़ रुपये के घोटाला के मामले में उन्हें तीन साल की सजा हुई थी। हालांकि, ये भी जानकारी मिल रही है कि अभिषेक बंटी पर किसी तरह का कोई मामला दर्ज नहीं है। वो बीते दो दशकों से बीजेपी के निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में बने हुए हैं। उन्होंने अपने हलफनामे में दावा किया है कि उन्हें किसी भी मामले में अब तक दोषसिद्धी या सजा नहीं सुनाई गई है। न ही ऐसा कोई मामला है।
