झारखंड : पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक का 84 साल की उम्र में निधन, 4 दिन पहले कोर्ट से मिली थी 3 साल की सजा

Mannan-Mallick-Cong-Death

धनबाद : झारखंड के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मन्नान मल्लिक का मंगलवार सुबह रांची के पल्स अस्पताल में निधन हो गया। उन्होंने 84 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। कुछ दिन पहले ही 15 साल पुराने एक मामले में उन्हें व अन्य आरोपियों अदालत ने दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि तुरंत बाद ही जमानत भी मिल गई थी।

कांग्रेस के टिकट पर धनबाद से जीते थे मन्नान मल्लिक : मन्नान मल्लिक वर्ष 2009 में कांग्रेस के टिकट पर धनबाद विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें मंत्री बनने का अवसर मिला। मंत्री रहते हुए उन्होंने जनहित और विकास से जुड़े कई विषयों पर काम किया। इससे पहले वह लंबे समय तक धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। वह राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (आरसीएमएस) और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष रहे।

10 जुलाई को सुनाई गई थी सजा : पूर्व मंत्री मन्नान मलिक की निधन की खबर लोगों के जेहन में इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि अभी हाल में ही तीन दिन पहले 10 जुलाई को धनबाद के बहुचर्चित मटकुरिया गोलीकांड में 15 साल बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इस मामले में पूर्व मंत्री मन्नान मलिक समेत 30 आरोपियों को दंगा, सरकारी कार्य में बाधा पहुचाने और आगजनी के मामलों में दोषी पाते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। हालांकि हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था। सजा सुनाए जाने के बाद अदालत ने सभी दोषियों को जमानत भी दे दी थी।

क्या था मामला? : यह मामला 27 अप्रैल 2011 का है। उस दिन मटकुरिया क्षेत्र में बीसीसीएल के क्वार्टरों को अतिक्रमण मुक्त कराने पहुंची पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। करीब डेढ़ दशक तक चली सुनवाई के बाद इस मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। लोक अभियोजक सत्येंद्र कुमार राय ने बताया कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया है। गंभीर धाराओं में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण आरोपियों को उससे बरी किया गया, जबकि दंगा, सरकारी कार्य में बाधा और आगजनी के आरोप साबित होने पर सजा सुनाई गई।