असम : नॉर्थ ईस्ट में भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी…हाईवे बना रनवे, चीन के लिए बड़ा संदेश?

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नई दिल्ली : असम के डिब्रूगढ़ में मोरन बाईपास पर इमरजेंसी लैंडिंग की सुविधा भारत के लिए स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा है। डिफेंस अधिकारियों ने इस कदम को भारत की नेशनल सिक्योरिटी और इलाके की मजबूती के लिए ‘बहुत अहम पल’ बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को IAF C-130J सुपर हरक्यूलिस में मोरन बाईपास पर उतरे। उन्होंने नेशनल हाईवे 127 के 4.2 km लंबे मजबूत हिस्से को देश को समर्पित किया।

उद्घाटन के मौके पर राफेल और सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट्स का एक एडवांस्ड एरियल डिस्प्ले हुआ। इसमें हाईवे की क्षमता दिखाई गई कि यह कुछ ही मिनटों में एक सिविलियन ट्रांजिट रूट से एक हाई-परफॉर्मेंस मिलिट्री रनवे में बदल सकता है।

क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी ? : इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी एक ‘अल्टरनेटिव रनवे’ है जिसे सीधे नेशनल हाईवे सिस्टम में बनाया गया है। इंडियन एयर फोर्स (IAF) के साथ मिलकर डिजाइन किए गए ये हिस्से खास पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (PQC) से बनाए गए हैं ताकि मॉडर्न एविएशन की बहुत अधिक गर्मी और वजन झेल सकें। मोरन ELF एक खास ‘डुअल-यूज’ एसेट के तौर पर तैयार किया गया है।

क्यों खास है ये ईएलएफ :

  • फाइटर जेट्स : 40 टन तक के भारी लड़ाकू विमान।
  • ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट : 74 टन तक के स्ट्रेटेजिक लिफ्टर।
  • हेलीकॉप्टर : टैक्टिकल सपोर्ट के लिए रोटरी-विंग एसेट्स का तेजी से डिप्लॉयमेंट।

चीन के लिए संदेश? : कई जानकार इसे चीन के लिए संदेश मान रहे हैं। यह ईएलएफ चीन बॉर्डर (LAC) से लगभग 300 km दूर है। यह जगह चबुआ और तेजपुर जैसे आस-पास के एयरबेस के लिए एक जरूरी ‘बैकअप’ का काम करती है। वॉर सिचुएशन में, जहां मेन एयरफील्ड को टारगेट किया जा सकता है, ELF भारतीय वायुसेना को जरूरी ऑपरेशनल रिडंडेंसी देता है। हाईवे नेटवर्क पर लैंडिंग ऑप्शन फैलाकर, भारत असरदार तरीके से एक ‘मोबाइल’ एयर डिफेंस ग्रिड बनाता है। इसे दुश्मन के लिए एक फिक्स्ड, स्टैटिक एयरबेस के मुकाबले बेअसर करना काफी मुश्किल होता है।

कितना फायदेमंद होगा यह ईएलएफ : मिलिट्री में इसके इस्तेमाल के अलावा, ELF ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (HADR) के लिए एक जरूरी टूल है। यह फैसिलिटी दूर-दराज के इलाकों के लिए एक भरोसेमंद एयर ब्रिज बनाती है। कम समय में इससे भारी ट्रांसपोर्ट प्लेन जान बचाने वाले सामान, रेस्क्यू टीम और मेडिकल मदद को सीधे ऊपरी असम के बीचों-बीच उतार सकते हैं।

मोरन फैसिलिटी एक बड़े नेशनल सिक्योरिटी इनिशिएटिव का हिस्सा है और पूरे भारत में 28 ELF साइट्स में से चौथी है। अभी लगभग 15 चालू हैं, यह ग्रिड राजस्थान के रेगिस्तान से लेकर उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेस वे और अब, नॉर्थ ईस्ट के स्ट्रेटेजिक बॉर्डर तक फैला हुआ है।