नई दिल्ली : बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ लक्षित हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला देश के सुनामगंज जिले से सामने आया है, जहां एक हिंदू युवक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई.
इस घटना ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे समय में जब देश में अगले ही महीने चुनाव होने वाले हैं. मृतक की पहचान जॉय महापात्रो के रूप में हुई है.
पहले पीटा फिर जहर देकर मार डाला : परिवार का आरोप है कि जॉय को एक स्थानीय व्यक्ति ने पहले बेरहमी से पीटा और फिर जहर दे दिया. गंभीर हालत में उन्हें सिलीहट के एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. पुलिस जांच जारी है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं.
भीड़ से बचने के लिए नहर में कूदा, गई जान : यह मामला हाल ही में हुई एक और मौत के बाद सामने आया है. भंडारपुर गांव के 25 वर्षीय हिंदू युवक मितुन सरकार की मौत भीड़ के डर से भागते हुए हुई थी. चोरी के शक में पीछा कर रही भीड़ से बचने के लिए मितुन ने नहर में छलांग लगा दी थी. बाद में पुलिस ने उनका शव बरामद किया था.
अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा के डरावने आंकड़े : पिछले साल दिसंबर 2025 में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात और बिगड़ते चले गए. इसके बाद देश के अलग-अलग इलाकों से हिंदुओं पर हमलों और हत्याओं की कई घटनाएं सामने आईं. दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल और बजेंद्र बिस्वास की हत्या ने समुदाय में गहरी दहशत फैला दी. शरियतपुर जिले में एक हिंदू व्यापारी को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले जाने की घटना ने हालात की भयावहता को उजागर कर दिया.
इन घटनाओं की पुष्टि बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के बयान से भी होती है. संगठन के मुताबिक, अकेले दिसंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें 10 हत्याएं, लूटपाट और आगजनी के 23 मामले, डकैती और चोरी की 10 घटनाएं, झूठे ईशनिंदा आरोपों में हिरासत और यातना के चार मामले, बलात्कार के प्रयास की एक घटना और शारीरिक हमलों के तीन मामले शामिल हैं.
