नालंदा : जिला शिक्षा विभाग का एक और अजीबो-गरीब कारनामा सामने आया है, जहां जेल में बंद शिक्षक को 22 महीने तक वेतन मिलता रहा, लेकिन दोषमुक्त होकर बाहर आने और दोबारा स्कूल ज्वाइन करने के बाद वेतन रोक दिया गया। यह मामला अब विभागीय लापरवाही, सिस्टम की खामियों और एक शिक्षक के परिवार की आर्थिक पीड़ा की कहानी बन चुका है। दीपनगर थाना क्षेत्र के नबीनगर गांव निवासी ब्रज किशोर चौधरी हत्या के एक मामले में न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे। इसी दौरान उन्होंने टीआरई-1 परीक्षा पास कर ली।
हैरानी की बात यह रही कि जेल प्रशासन की अनुमति से 30 नवंबर, 2023 को उन्हें पुलिस अभिरक्षा में हाईस्कूल तिउरी में शिक्षक के पद पर योगदान कराया गया। योगदान के कुछ समय बाद वे फिर जेल भेजे गए, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। बावजूद इसके, वेतन हर महीने खाते में जाता रहा। पटना हाईकोर्ट के आदेश पर 25 जुलाई, 2025 को ब्रज किशोर चौधरी को पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया गया। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर 2025 (पत्रांक–5763) जारी कर उनका निलंबन समाप्त किया। निलंबन हटते ही शिक्षक ने हाईस्कूल तिउरी में नियमित योगदान किया और तब से लगातार पढ़ा भी रहे हैं। लेकिन यहीं से शुरू हुई असली परेशानी।
नवंबर और दिसंबर 2025 का वेतन आज तक भुगतान नहीं हुआ। परिवार की आर्थिक हालत खराब है। मजबूरी में शिक्षक रोजाना स्कूल की छुट्टी के बाद शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। शिक्षक ब्रज किशोर चौधरी का कहना है कि निलंबन अवधि में विभाग की गलती से वेतन दिया गया। अब वही राशि एकमुश्त लौटाने को कहा जा रहा है। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि एक साथ पैसा लौटा सकूं। किश्तों में भुगतान की अनुमति मांगी है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
मामले पर सफाई देते हुए डीओ आनंद शंकर ने कहा कि तिउरी हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक ने निलंबन की सूचना प्रखंड कार्यालय को दी थी, लेकिन वहां के एकाउंटेंट राजन कुमार की लापरवाही से जेल में रहते हुए वेतन भुगतान होता रहा। जांच में आरोप सही पाए गए हैं और एकाउंटेंट पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
