राष्ट्रपति के अनादर पर गरमाई सियासत, बीजेपी ने बताया शर्मनाक

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नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित संथाल सम्मेलन कार्यक्रम को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। जहां एक ओर बीजेपी ने राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू के प्रदेश दौरे के दौरान उनके अपमान करने का आरोप लगाते हुए इसे शर्मनाक और अभूतपू्र्व बताया है। तो वहीं बीजेपी और राष्ट्रपति मुर्मू के इन आरोपों पर टीएमसी ने पलटवार करते हुए राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति कार्यालय के दुरुपयोग का आरोप लगाया। सीएम ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति कार्यक्रम में शामिल न होने पर भी दो टूक जवाब दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में गहरा दुख पहुंचाया है। पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा, माननीय राष्ट्रपति का पद हमारे गणतंत्र का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और इसे हमेशा वह गरिमा, प्रोटोकॉल और सम्मान मिलना चाहिए जिसका यह हकदार है। पश्चिम बंगाल में आज राष्ट्रपति के संवैधानिक पद के अनुरूप व्यवस्थाओं में हुई कोई भी चूक दुर्भाग्यपूर्ण है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा, आज जो कुछ हुआ वह बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य है। भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान, टीएमसी सरकार द्वारा हमारे संवैधानिक संस्थानों के प्रति घोर उपेक्षा को दर्शाता है। आदिवासी समुदाय की भावनाओं के प्रति ऐसी असंवेदनशीलता दिखाना और भी चिंताजनक है। स्वयं राष्ट्रपति जी एक गौरवशाली आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं, और उन्होंने जो पीड़ा व्यक्त की है, उससे हम सभी को गहरा दुख पहुंचा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार आज अपने अराजक व्यवहार से और भी निचले स्तर पर गिर गई। उसने प्रोटोकॉल की पूरी तरह अनदेखी कर राष्ट्रपति का अपमान किया।’ उन्होंने कहा, तृणमूल सरकार न केवल नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का मनमाने ढंग से उल्लंघन करती है, बल्कि राष्ट्रपति को भी नहीं बख्शती।’

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, संथाल समुदाय को उनके अपने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से दूर रखने वाली व्यवस्थाओं का चयन करके, टीएमसी सरकार ने न केवल आदिवासी समाज की भावनाओं की अवहेलना की है, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है।

पश्चिम बंगाल के भाजपा सह-प्रभारी अमित मालवीय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में आज की घटनाएं ममता बनर्जी सरकार के तहत ‘संवैधानिक ढांचे के पूर्ण पतन’ की ओर इशारा करती हैं।

बीजेपी के आरोपों पर सीधे ममता बनर्जी ने पलटवार किया। मुख्यमंत्री बनर्जी ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि आज भाजपा संविधान को कहां ले गई है? अब उन्हें (राष्ट्रपति) भी भाजपा की राजनीति को बढ़ावा देने और भाजपा के एजेंडे को पूरा करने के लिए भेज दिया गया है। मुझे खेद है, महोदया। मैं आपका बहुत सम्मान करती हूं। लेकिन आप भाजपा के जाल में फंस गई हैं। यह दावा करते हुए कि राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल सरकार पर जानबूझकर लोगों को अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भाग लेने से रोकने का आरोप लगाया है, मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आरोप निराधार हैं, क्योंकि राज्य सरकार इस कार्यक्रम की आयोजक नहीं थी।

ममता बनर्जी ने कहा कि यह कोई राजकीय कार्यक्रम नहीं था। राज्य सरकार को तो इस कार्यक्रम की जानकारी भी नहीं थी। हमें जानकारी मिलती है कि वह कब आएंगी और कब जाएंगी। हम यथासंभव व्यवस्था करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर कोई हर दिन आता है, तो मैं हर बार कैसे उपस्थित हो सकती हूं? क्या हमारे पास करने के लिए काम नहीं है? क्या हमें हर समय आपके पीछे-पीछे घूमना पड़ेगा? साल में एक बार आइए, मैं आपको लेने जाऊंगी। अगर आप साल में 50 बार आते हैं, तो मेरे पास हर बार उपस्थित होने का समय नहीं है।

दार्जिलिंग पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन था। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद जब मैं यहां आई तो मुझे एहसास हुआ कि अगर यह सम्मेलन यहीं आयोजित होता तो बेहतर होता, क्योंकि यह इलाका बहुत विशाल है। मुझे नहीं पता प्रशासन के मन में क्या चल रहा था। उन्होंने कहा कि नहीं, यह जगह भीड़भाड़ वाली है, लेकिन मुझे लगता है कि यहां आसानी से पांच लाख लोग इकट्ठा हो सकते थे। मुझे नहीं पता कि उन्होंने हमें वहां, इस स्थान से दूर क्यों ले गए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी जगह जाती हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए, लेकिन वह नहीं आईं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता दीदी भी मेरी बहन हैं, मेरी छोटी बहन। मुझे नहीं पता कि वह मुझसे नाराज थीं, इसलिए ऐसा हुआ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को वार्षिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जो मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित होने वाला था। हालांकि, अधिकारियों ने सुरक्षा और अन्य व्यवस्था संबंधी कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया।

शनिवार दोपहर जब राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल पर पहुंची, तो वहां केवल कुछ ही लोग उपस्थित थे। सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ही एकमात्र प्रतिनिधि थे, जो हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उपस्थित थे।

प्रोटोकॉल के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए आमतौर पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री उपस्थित होता है। कोलकाता में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के विरोध में लगातार दूसरे दिन भी अपना धरना जारी रखा।