झारखंड : एयर एंबुलेंस क्रैश घटना में 5 KM तक पैदल चलकर मौके पर पहुंची टीम, 7 घंटे चला राहत कार्य

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नई दिल्ली/रांची : रांची से दिल्ली आ रही यह एयर एंबुलेंस झारखंड के जिस चतरा इलाके के घने जंगलों में क्रैश हुई थी, वहां राज्य पुलिस और रेस्क्यू टीम को पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। रेस्क्यू ऑपरेशन इतना मुश्किल था कि यह मंगलवार सुबह करीब पांच बजे तक चला। तब जाकर मौके से एयर एंबुलेंस में सवार सभी लोगों को निकाला जा सका। इन सभी की मौत हो चुकी थी।

टीम को 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा : पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही उन्हें प्लेन क्रैश की सूचना मिली, तुरंत रेस्क्यू के लिए झारखंड पुलिस और अन्य टीमें मौके लिए रवाना हो गईं। लेकिन आगे बढ़ते वक्त जंगल इतना घना और रास्ता इतना उबड़-खाबड़ था, जहां गाड़ियां नहीं चल सकती थीं। ऐसे में रेस्क्यू टीम को पैदल चलना पड़ा। चतरा के एसपी सुमित अग्रवाल ने बताया कि प्लेन क्रैश के बारे में सोमवार रात 9:15 बजे के आसपास गांव वालों से पता लगा था। इसमें बताया गया था कि जंगलों में कोई हवाई जहाज गिरा है। मौके की गंभीरता को देखते हुए रात में रेस्क्यू टीम तैयार की गई और मौके पर पहुंचा गया। लेकिन रास्ता ऐसा था। जहां गाड़ियों से नहीं जाया जा सकता था। इसलिए करीब पांच किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।

मौके पर घना अंधेरा, लाइट की कोई व्यवस्था नहीं : मौके पर पहुंचने पर देखा कि वहां घना अंधेरा था और लाइट की कोई व्यवस्था नहीं थी। प्लेन में सवार लोग इधर-उधर छिटके हुए थे। घने जंगलों और दुर्गम परिस्थितियों में चलाया गया यह ऑपरेशन सोमवार रात करीब 10 बजे से शुरू होकर मंगलवार सुबह करीब पांच बजे तक चला। तब जाकर सारे शवों को निकाला जा सका। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मौके पर कुछ पुलिस वालों को छोड़ा गया। ताकि साक्ष्यों से कोई छेड़छाड़ ना कर सके। मौके पर जांच एजेंसी एएआईबी की टीम और अन्य अधिकारी पहुंचे।

रांची में बड़ा बड़ा रडार सिस्टम नहीं : दूसरी तरफ, इस मामले में दो और बातों का पता लगा है। वह यह कि रांची एयरपोर्ट एटीसी के पास हवाई जहाजों का मूवमेंट रडार पर देखने के लिए बड़ा रडार सिस्टम नहीं लगा है और जो छोटा रडार सिस्टम रांची एयरपोर्ट पर लगा है, वह ऑटोमेटिक डिपेंडेंट सर्विलांस-ब्रॉडकास्ट (ADS-B) सिस्टम इस क्रैश हुए एयरक्राफ्ट में नहीं लगा था। जिससे रांची एटीसी इस एयर एंबुलेंस को अपने रडार पर नहीं देख पा रहे थे। वह एक खास सिस्टम के माध्यम से इस प्लेन से संपर्क में तो थे, लेकिन रडार के माध्यम से नहीं।