नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा परिसर में कथित फांसी घर के विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व स्पीकर रामनिवास गोयल और पूर्व डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने इन चारों पर कार्रवाई की सिफारिश करते हुए अपनी जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रख दी है। अब इस रिपोर्ट पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता बुधवार को लेंगे।
दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने सदन में अपनी पहली रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि 5, 6 और 7 अगस्त 2025 को विधानसभा में फांसी घर मामले पर विस्तृत चर्चा हुई थी। इसके बाद सदन की भावना को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने इस पूरे प्रकरण की जांच विशेषाधिकार समिति को सौंपी थी।
इसकी रिपोर्ट में बताया कि 9 अगस्त 2022 को विधानसभा परिसर में जीर्णोद्धार के बाद फांसी घर के अनावरण का कार्यक्रम आयोजित हुआ था। उस समय अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री थे और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। तत्कालीन स्पीकर रामनिवास गोयल की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में मनीष सिसोदिया और राखी बिड़ला भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम को लेकर मीडिया में भी व्यापक प्रचार हुआ और आम लोग इसे देखने बड़ी संख्या में पहुंचे।
हालांकि फरवरी 2025 में नई विधानसभा के गठन के बाद जब विधानसभा भवन को राष्ट्रीय महत्व का धरोहर स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। राष्ट्रीय अभिलेखागार से मिली जानकारी के मुताबिक विधानसभा परिसर में जिस जगह को फांसी घर बताया गया था, वह दरअसल टिफिन रूम थी। किसी भी आधिकारिक ऐतिहासिक दस्तावेज में वहां फांसी घर होने का प्रमाण नहीं मिला।
इस पूरे मामले में समिति ने चारों पूर्व पदाधिकारियों को लिखित जवाब देने और फिर व्यक्तिगत रूप से समिति के सामने पेश होने के लिए बुलाया। 13 और 20 नवंबर 2025 को उन्हें समन जारी किए गए। समिति का कहना है कि हाईकोर्ट में याचिका लंबित होने का हवाला देकर चारों नेता लगातार पेश होने से बचते रहे, जबकि अदालत की ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई थी।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि समिति के मुताबिक यह जानबूझकर किया गया टालमटोल है और इससे सदन के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। समिति ने इसे विधानसभा और उसकी समिति की अवमानना करार दिया है। साथ ही लोकसभा और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि समितियों को गवाही के लिए बुलाने और उपस्थिति सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है।
विशेषाधिकार समिति ने सिफारिश की है कि चारों नेताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही फांसी घर की असलियत से जुड़े मूल सवाल पर जांच जारी रखी जाएगी और अगले सत्र में अलग रिपोर्ट पेश की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन को बताया कि बुधवार को इस रिपोर्ट पर चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा।
