धनबाद : गैंगस्टर प्रिंस खान के दो गुर्गों के एनकाउंटर होने की सूचना सामने आ रही है। झारखंड के धनबाद जिले में बोर्रागढ़ भागाबांध के पास धनबाद और रांची पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया। रविवार-सोमवार की देर रात हुई कार्रवाई में दो अपराधियों को गोली लगी है। जबकि भागने के क्रम में फहीम के साले टुन्ना खान के पुत्र अफजल उर्फ अमन के पैर में चोट लगने की बात सामने आ रही है। पुलिस ने तीनों को घायल अवस्था में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। हालाँकि खबर लिखे जाने तक पुलिस ने पुष्टि नहीं की है।

कभी धनबाद के वासेपुर की तंग गलियों में मामूली विवादों और छोटी गोलीबारी से अपराध की शुरुआत करने वाला प्रिंस खान आज पूरे झारखंड के लिए ‘खौफ का दूसरा नाम’ बन चुका है। वासेपुर के गैंगस्टर प्रिंस खान का खौफ इन दिनों झारखंड की राजधानी रांची और धनबाद समेत कई शहरों में सुर्खियों में हैं। प्रिंस खान की ओर से कई कारोबारियों को धमकी देकर रंगदारी की मांग की गई है। रंगदारी नहीं देने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है।
वह कभी दुबई तो कभी पाकिस्तान में बैठकर किसी रोज रांची के एयरपोर्ट इलाके में स्थित रेस्टोरेंट में गोलियां चलवा देता है, तो कभी किसी बड़े कारोबारी को वर्चुअल नंबर से कॉल कर ‘खोपड़ी खोल देने’ की धमकी देता है। धनबाद से लेकर रांची, बोकारो, जमशेदपुर, चतरा और पलामू तक के उद्योगपति उसके निशाने पर हैं। प्रिंस खान के आतंक पर अंकुश की झारखंड पुलिस की कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं।

रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह बेखौफ : तीन साल पहले इंटरपोल की ओर से रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह बेखौफ है। झारखंड पुलिस को सूचना मिली है कि अब प्रिंस खान की पनाहगाह दुबई से बदलकर पाकिस्तान का पंजाब प्रांत हो गई है, जहां से वह न केवल रंगदारी का धंधा चला रहा है, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। पुलिस अब उसे आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रिया में जुटी है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को इस गैंगस्टर के बढ़ते आतंक की गूंज सुनाई दी।
पाकिस्तान से ‘वर्चुअल क्राइम’ का एक अभेद्य साम्राज्य : जांच रिपोर्टों के अनुसार, उसने पासपोर्ट कार्यालय की खामियों का फायदा उठाया और पहले दुबई में ठिकाना बनाया। लेकिन जब वहां एटीएस और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का दबाव बढ़ा, तो वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जाकर छिप गया। यहीं से वह अपने ‘मेजर’ (गुर्गों का कोड नेम) के माध्यम से ‘वर्चुअल क्राइम’ का एक अभेद्य साम्राज्य चला रहा है।
थ्रेट कॉल या ऑडियो संदेश भेजकर रंगदारी : प्रिंस खान का अपराध करने का तरीका बिल्कुल किसी डार्क वेब थ्रिलर जैसा है। वह सीधे कॉल करने के बजाय इंटरनेट कॉलिंग और वर्चुअल नंबरों का सहारा लेता है। वह पहले थ्रेट कॉल या ऑडियो संदेश भेजता है, और यदि मांग पूरी नहीं होती, तो उसके गुर्गे संबंधित प्रतिष्ठान पर फायरिंग या बमबारी करते हैं। वारदात के तुरंत बाद वह सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेते हुए वीडियो जारी करता है और राज्य के आईपीएस अधिकारियों तक को खुलेआम चुनौती देता है।
रांची पुलिस ने पिछले साल प्रिंस खान के गुर्गों को गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ में पता चला कि गिरोह को अपराधियों को हथियार और गोला-बारूद पाकिस्तान से ‘ड्रोन’ के माध्यम से पंजाब के मोगा के रास्ते सप्लाई किए जा रहे हैं।
50 से अधिक गुर्गों को भेजा गया जेल : यद्यपि एटीएस और झारखंड पुलिस ने पिछले एक साल में उसके 50 से अधिक गुर्गों को जेल भेजा है, लेकिन असली चुनौती उस ‘मास्टरमाइंड’ के प्रत्यर्पण की है, जो सुरक्षित पनाहगाहों में बैठकर झारखंड में मौत और वसूली का खेल खेल रहा है। पिछले हफ्ते झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्र ने हाई-लेवल मीटिंग में पुलिस को ‘फ्री हैंड’ देते हुए उसके गुर्गों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है।
