झारखंड : धनबाद रिंग रोड़ घोटाला में ACB की बड़ी कार्रवाई, करीब एक दर्जन आरोपी हिरासत में लिए गए 

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धनबाद : झारखंड में एसीबी की टीम ने करीब 10 साल के बाद शुक्रवार को धनबाद रिंग रोड़ घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी की टीम ने इस घोटाला के मामले में करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वर्ष 2015 में इस मामले को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गयी थी।

गुरूवार रात से ही एसीबी की कार्रवाई चल रही है। अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में भू-राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी और कई बिचौलिए शामिल बताए जा रहे हैं। ACB की टीम ने आरोपियों को लेकर अस्पताल पहुंची है। जहाँ उनका मेडिकल जांच किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

जमीन के अधिग्रहण, नामांतरण और मुआवजा भुगतान में हुई गड़बड़ियों को लेकर एसीबी जांच कर रहा है। उसमें धनबाद रिंग रोड के भूमि अर्जन के बाद मुआवजा घोटाला का मामला है। भू-राजस्व विभाग लगातार एसीबी को पत्र लिख कर मामलों की जांच में तेजी लाने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है।

यह है मामला : धनबाद में रिंग रोड निर्माण को लेकर राज्य सरकार द्वारा रैयतों की भूमि अधिग्रहित की गई। रैयतों को भूमि के मुआवजा भुगतान में भारी गड़बड़ी की गई। एक अनुमान के मुताबिक मुआवजा भुगतान में 300 करोड़ तक की गड़बड़ी का आरोप है। 2014 में मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच तब निगरानी ब्यूरो और अब एसीबी को सौंप दी। प्रारंभिक जांच में भी गड़बड़ी की पुष्टि हुई। तत्कालीन जिला भू अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, लाल मोहन नायक सहित कई अन्य अधिकारी निलंबित भी हुए। नायक निलंबन अवधि में ही अब रिटायर भी हो चुके हैं। लेकिन अग्रेतर कार्रवाई के क्रम में एसीबी ने इन अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले अनुमति की मांग की थी।

झारखंड के धनबाद में 10 वर्ष बाद वर्ष 2024 में फिर से भूमि घोटाला मामले में आंदोलन हुआ था। रैयत यह जानना चाहते हैं कि आखिर एसीबी वर्षों से कौन सी जांच कर रही है, जो 2024 में भी पूरी नहीं हो पाई। मुआवजा राशि निकल भी गई, पर उनके हाथ क्यों खाली हैं? भूमि संबंधी समस्याओं से निजात दिलाने व घपला घोटालों की जांच कर कार्रवाई की मांग को लेकर भूमि बचाओ संघर्ष मोर्चा के सैकड़ों ग्रामीणों ने पिछले वर्ष रणधीर वर्मा चौक पर मौन धरना दिया था।